जोतिष श्री हरिप्रसाद जोशी जि को भुत बर्तमान और भबिष्य ।
जोतिष श्री हरिप्रसाद जोशी जि का जन्मकुंण्डली
जोतिष श्री हरिप्रसाद जोशी
|| मुख्य विवरण ||
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जोतिष श्री हरिप्रसाद जोशी जि का जन्मकुंण्डली
लग्न क्या है?
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वैदिक ज्योतिष में लग्न का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। बालक के जन्म के समय में जो राशि पूर्वीय क्षितिज पर उदित होती है। वह राशि लग्न राशि कहलाती है। तथा यह राशि जिस भाव में पड़ती है। वह भाव लग्न भाव कहलाता है। लग्न ज्योतिष से एक व्यक्ति के जीवन की सूक्ष्मतम घटनाओं का अध्ययन करने में सहायता मिलती है। जबकि दैनिक, साप्ताहिक, मासिक और वार्षिक भविष्वाणियां चन्द्र राशि और सूर्य राशि पर आधारित होती है। आपका लग्न है: मकर |
स्वास्थ्य मकर लग्न के लिए
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मकर लग्न का स्वामी होने के कारण आपको हवा से होने वाली बीमारियां, श्वांस और आंखो की बीमारी प्रभावित कर सकती है। इसके अतिरिक्त आपको कभी न कभी उच्च रक्त चाप की परेशानी भी कष्ट दे सकती है। तथा सावधानी न बरतने पर आपको जोड़ो, बाल दांत, चर्म रोग, और तंत्रिका जैसे रोग भी पीड़ित कर सकते हैं। आपकी लग्न के लोगों को दुर्घटना होने पर हड्डियों का टूटना और घुटने में चोट की समस्या विशेष रूप से परेशान कर सकती है। |
स्वभाव व व्यक्तित्व मकर लग्न के लिए
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मकर लग्न के लोग अक्सर धार्मिक होने का दिखावा करते है। लेकिन हकीकत में आप धार्मिक नहीं होते, जैसा की आप दिखाना चाहते है। आप स्वभाव से आत्मकेंद्रित और जिद्दी भी हो सकते हैं। आप दूसरों की बात सुनने की बजाय अपनी बात रखना पसंद करते है इसलिए कभी कभी आप अपना नियंत्रण खो देते हैं और दूसरों को काफी चोट पहुंचा देते है। आपकी लग्न के लोगों में अच्छी संगठनात्क क्षमता होती है,आप काम के प्रति जूनूनी, भौतिकवादी, रूढ़िवादी और अधिकार को सम्मान देने वाले होते हैं। आपकी लग्न के लोग महत्वाकांक्षी, गंभीर और काम के प्रति समर्पित होते हैं। साथ ही आप आत्म अनुशासित, जिम्मेवार, और व्यवहारिक प्रकृति के भी होते है। लेकिन समय समय पर अपने आप को असहाय महसूस करते हैं। तार्किक क्षमता आपमें बेहद प्रबल होती है। दूसरों से व्यवहार के दौरान आप शांत और आत्मकेंन्द्रित नजर आते हो लेकिन एक बार विश्वास जमने पर आप दोस्तों के प्रति प्रतिबद्ध होते हैं। आपका सामाजिक, प्रयासों के लिए तैयार रहना, काम के लिए सब कुछ करना तथा अपना आत्मसम्मान सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है। आपमें भौतिकवादी दृष्टिकोण के बजाय दार्शनिकता का भाव अधिक होता है। आप स्वयं के सुख के लिए प्यार में पड़ने के लिए तैयार रहते है। |
शारीरिक रूप-रंग मकर लग्न के लिए
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मकर लग्न के लोग काफी दुबले, हड्डी दिखने वाले और औसत उंचाई वाले होते हैं। आपकी भोहें और छाती पर बडे बडे बाल पाये जाते हैं। आपका माथा सामान्यता बड़ा और लंबे दांतवाले होते है, जो कभी कभी होठ के बाहर भी दिखाई देते हैं। आपके व्यक्तित्व से परिपक्वता और मजबूती का आभास होता है। आपकी नज़र में तटस्थता,संयम, और सर्वसाधारण द्वारा चिह्नित गुण साफ झलकता है। आप कभी कभी वैज्ञानिक दार्शनिक, बुद्धिमान व्यक्ति जैसे दिखते हैं। |
|| विस्तृत भविष्यफल ||
चरित्र
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आपके कुछ हद तक दार्शनिक चरित्र के है। आप एक विशालहृदय वाले व्यक्ति हैं हांलाकि थोड़े से मुंहफट हैं। आप काफी हद तक आत्मसम्मानके प्रति सचेत हैं और जो लोग आपके इस चारित्रिक गुण को समझते हैं, वेआपके अंतरंग मित्र होते हैं।आप उच्च आदर्श रखते हैं, जिन्हें प्रायः वास्तविकता केधरातल पर नहीं उतारा जा सकता। परन्तु जब आप इसमें विफल होकर निराश हो जातेहैं तो आप इसी कारण अत्यन्त हीे व्यग्र हो जाते हैं, इसलिये आप समय से पूर्व हीकार्य के प्रति उदासीन हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, आप जीवन में न तो सफलता औरन ही प्रसन्नता, आराम की प्राप्ति कर पाते हैं, जोकि आपके गुणों को देखते हुएप्राप्त होनी चाहिए।आप जनता के समक्ष अपने आप को अभिव्यक्त करना जानतेहैं और भगवान ने आपको प्रसन्नमुखी होने का वरदान दिया है। हंसमुख होने केकारण आपके अनेक मित्र हैं और आप उनका समय-समय पर मनोरंजन करते रहते हैं।आपके ऊपर आपके दोस्तों का प्रभाव देखा जा सकता है, लेकिन यह नितान्त आवश्यकहै कि आप बुद्धिमत्तापूर्ण अपने मित्रों को चुनें।आपकी विफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि आपबहुआयामी हैं, जिस कारणवश आपकी शक्ति बहुत सी दिशाओं मेें विभक्त होजाती है। कृपया एक ही दिशा में विचारपूर्वक कार्य करें, जिससे आपको अत्यन्तप्रसन्नता और लाभ प्राप्त होगा। |
सौभाग्य व संतुष्टि
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आप वस्तु व व्यक्ति के आर-पार देख सकते हैं,अर्थात् आपसे कुछ भी छुपाना सम्भव नहीं है। आपकी अन्तर्दृष्टि की यहीस्पष्टता आपको विपक्षियों से पार पाने में व सन्तोष प्राप्त करने मेंआपकी सहायता करती है। आपके अन्दर परिस्थितियों को तुरन्त समझने की एवंसमस्याओं के त्वरित निराकरण की क्षमता है। |
जीवन शैली
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लोग यह कहते हैं कि हर सफल व्यक्ति के पीछे उससे प्रेमकरने वाले का हाथ होता है, यह कहावत आप पर पूर्णतः चरितार्थ होती है। आपकाजीवनसाथी आपके उद्देश्यप्राप्ति में आपको प्रेरित करेगा। |
रोजगार
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क्योंकि आप सिक्के के दौनों पहलू देखना जानते हैं,विधि एवं कानून आपके लिये सर्वोत्तम कार्यक्षेत्र हैं। आप श्रमिक-मध्यस्थ की तरहया ऐसा कोई भी कार्यक्षेत्र जहां आपके पास शान्ति एवं सद्भाव बनाये रखने काकार्य हो, बेहतर करेंगे। आप उन कार्यक्षेत्रों से दूर रहें जहां आपको तुरन्त एवंबारम्बार निर्णय लेना पड़ता हो क्योंकि ऐसा करने में आपको कठनाई महसूसहोगी। |
व्यवसाय
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आपका मानवीय स्वभाव और दूसरों के दुःख-दर्द दूर करने की इच्छा के कारण चिकित्सा कार्यक्षेत्र आपके लिये उपयुक्त है। इन दोनों में ही आप अपनी आकांक्षा को प्राप्त कर पाएंगे और संसार में निश्चय ही अच्छा एवं उपयोगी कार्य कर पाएंगे। यदि आप ये कार्यक्षेत्र नहीं भी अपना पाते हैं, तो भी आपके मिजाज के अनुरूप अन्य कई सम्भावनाएं हैं। एक शिक्षक के तौर पर आप बहुत अच्छा कार्य कर सकते हैं। एक प्रबन्धक के तौर पर आप अपने कर्तव्यों का निर्वाहन ठीक ढंग से कर पाएंगे औैर आपके सहकर्मी आपके आदेशानुसार कार्य करेंगे,क्योंकि वे जानते हैं कि आप एक अच्छे मित्र हैं। इसके अलावा भी आप कई भिन्न कार्यक्षेत्रों में अच्छा जीवन यापन कर सकते हैं, मुख्यतरू साहित्यिक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति, जो कि मिलाकर आपको लेखक बनाती हैं। आप टीवी और फिल्म के लिये एक बेहतर अभिनेता भी हो सकते हैं। यदि आप इस तरह के कार्य क्षेत्रों का चुनाव करते हैं, तो आप अपने धन व समय को सामाजिक कार्यों में भी लगाएंगे। |
स्वास्थ्य
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आपके अन्दर प्रचुर अन्र्तऊर्जा है। आपहृष्ट-पुष्ट हैं व साधारणतः आप किसी प्रकार के रोग से ग्रसित नहींहोंगे, जबतक कि आप ज़रूरत से बहुत ज़्यादा कार्य नहीं करते। सिर्फ इसलिये कि आपमोमबत्ती को दोनों सिरों से जला सकते हैं, आपको यह करने के बारे में नहींसोचना चाहिए। आपको अपने प्रति संयमी होना चाहिए और अपनेस्वास्थ्य-कोष में से ज़रूरत से ज़्यादा लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए;अन्यथा आप जीवन के उत्तरार्ध में गम्भीर बीमारियों को निमन्त्रण दे सकते हैं।बीमारी यदि प्रायः नहीं आती है, तो अचानक ही आएगी। यद्यपि उसने परिपक्व होने मेंकाफी लम्बा समय लिया होगा। आप थोड़ा सा दिमाग लगाने पर पाएंगे कि आपने रोगको स्वयं ही आमन्त्रित किया है। इसमें कोई शक नहीं है कि आप उससे बच सकते थे।आपके नेत्र आपकी कमज़ोरी हैं और कृपया उसका ख़्याल रखें। आप पैंतीस की उम्रके बाद नेत्र-विकार से ग्रसित हो सकते हैं। |
रुचि
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पठन, चित्रकारी, नाटक और इसी तरह के समय बिताने के वेतरीके, जिसमें कलात्मक व साहित्यिक सोच की आवश्यकता हो; आपके दिमाग में घरकरेंगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा, यदि आपके अन्दर आध्यात्मिकता या पराविद्याके प्रति रुचि जागृत हो। यात्रा से जुड़ी सभी वस्तुएं आपको आकर्षित करतीहैं, चाहे वह ज़मीन हो, समुद्र या हवा हो। क्रिकेट एवं फुटबाॅल जैसे खेलों केलिये आपके पास बहुत कम समय होगा। यद्यपि, आपके पास टेबिल-टेनिस, कैरम,बैडमिण्टन जैसे ‘इन्डोर‘ खेलों में आपकी अभिरुचि होगी। |
प्रेम आदि
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आप कभी भी मित्रों को नहीं भूलते। परिणामस्वरूप,आपकी एक बड़ी मित्रमण्डली है, जिसमें से कई विदेशी भाषा बोलने में सक्षमहैं। इसी बड़े मित्रसमूह से आप अपना जीवनसाथी चुनेंगे। आपकी यह पसन्द आपकेपरिचितों को आश्चर्यचकित कर देगी। आप अरामपूर्वक विवाह करेंगे, लेकिन अन्यलोगों की तरह विवाह आपके लिये सब कुछ नहीं होगा। अन्य कई विचलन ऐसे भीहोंगे, जो आपका ध्यान घर से हटाएंगे। यदि आपका जीवनसाथी इस झुकाव को कमकरने का प्रयत्न करेगा, तो यह आपके पारिवारिक जीवन के लिये खतरा साबित हो सकताहै। |
वित्त
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वित्त संबन्धी मामलों में, आपको किसी बात की चिन्ताकी आवश्यकता नहीं है। आपके मार्ग में कई सुअवसर आएंगे। आप शून्य से भी काफीकुछ बना सकते हैं, बड़ी एवं उतार-चढ़ाव वाली योजनायें, आपका एकमात्रजोखिम हैं। वित्त के सम्बन्ध में आप अपने मित्रों के लिये, यहंा तक कि स्वयं केलिये एक पहेली होंगे। आप अपने धन का असामान्य तरीकों मे निवेश करेंगे।सामान्य तौर पर, आप पैसा बनाने में सफल रहेंगे मुख्यतः जमीन, घर, अचल सम्पत्तिसे जुडे हुए क्षेत्रों |
चरित्र
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हरिप्रसाद, आपके कुछ हद तक दार्शनिक चरित्र के है। आप एक विशालहृदय वाले व्यक्ति हैं हांलाकि थोड़े से मुंहफट हैं। आप काफी हद तक आत्मसम्मानके प्रति सचेत हैं और जो लोग आपके इस चारित्रिक गुण को समझते हैं, वेआपके अंतरंग मित्र होते हैं।आप उच्च आदर्श रखते हैं, जिन्हें प्रायः वास्तविकता केधरातल पर नहीं उतारा जा सकता। परन्तु जब आप इसमें विफल होकर निराश हो जातेहैं तो आप इसी कारण अत्यन्त हीे व्यग्र हो जाते हैं, इसलिये आप समय से पूर्व हीकार्य के प्रति उदासीन हो जाते हैं। परिणामस्वरूप, आप जीवन में न तो सफलता औरन ही प्रसन्नता, आराम की प्राप्ति कर पाते हैं, जोकि आपके गुणों को देखते हुएप्राप्त होनी चाहिए।आप जनता के समक्ष अपने आप को अभिव्यक्त करना जानतेहैं और भगवान ने आपको प्रसन्नमुखी होने का वरदान दिया है। हंसमुख होने केकारण आपके अनेक मित्र हैं और आप उनका समय-समय पर मनोरंजन करते रहते हैं।आपके ऊपर आपके दोस्तों का प्रभाव देखा जा सकता है, लेकिन यह नितान्त आवश्यकहै कि आप बुद्धिमत्तापूर्ण अपने मित्रों को चुनें।आपकी विफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि आपबहुआयामी हैं, जिस कारणवश आपकी शक्ति बहुत सी दिशाओं मेें विभक्त होजाती है। कृपया एक ही दिशा में विचारपूर्वक कार्य करें, जिससे आपको अत्यन्तप्रसन्नता और लाभ प्राप्त होगा। |
सौभाग्य व संतुष्टि
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हरिप्रसाद, आप वस्तु व व्यक्ति के आर-पार देख सकते हैं,अर्थात् आपसे कुछ भी छुपाना सम्भव नहीं है। आपकी अन्तर्दृष्टि की यहीस्पष्टता आपको विपक्षियों से पार पाने में व सन्तोष प्राप्त करने मेंआपकी सहायता करती है। आपके अन्दर परिस्थितियों को तुरन्त समझने की एवंसमस्याओं के त्वरित निराकरण की क्षमता है। |
जीवन शैली
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हरिप्रसाद, लोग यह कहते हैं कि हर सफल व्यक्ति के पीछे उससे प्रेमकरने वाले का हाथ होता है, यह कहावत आप पर पूर्णतः चरितार्थ होती है। आपकाजीवनसाथी आपके उद्देश्यप्राप्ति में आपको प्रेरित करेगा। |
|| लाल किताब फलकथन || सत प्रतिशत सत्य
| सूर्य आपके 9th भाव में स्थित है |
नवमें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो जातक भाग्यशाली, अच्छे स्वभाव वाला, अच्छे पारिवारिक जीवन वाला और हमेशा दूसरों की मदद करने वाला होगा। यदि बुध पांचवें घर में होगा तो जातक का भाग्योदय 34 साल के बाद होगा। यदि नवमें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो जातक बुरा और अपने भाइयों के द्वारा परेशान किया जाएगा। सरकार से अरुचि और प्रतिष्ठा की हानि। उपाय: (1) उपहार या दान के रूप में चांदी की वस्तुएं कभी स्वीकार न करें। चांदी की वस्तुएं अक्सर दान करते रहें। (2) पैतृक बर्तन और पीतल के बर्तन नहीं बेचना चाहिए बल्कि इन्हें हमेशा इस्तेमाल करना चाहिए। (3) अत्यधिक क्रोध और अत्यधिक कोमलता से बचें। |
| चंद्र आपके 7th भाव में स्थित है |
सातवां घर शुक्र और बुध से संबंधित होता है। जब चंद्रमा इस भाव में स्थित होता है तो परिणाम शुक्र, बुध और चंद्रमा से प्रभावित होता है। शुक्र और बुध मिलकर सूर्य का प्रभाव देते हैं। पहला भाव सातवें को देखता है नतीजन पहले घर से सूर्य की किरणे सातवें भाव में बैठे चंद्रमा को सकारात्म रूप से प्रभावित करती हैं जिसका मतलब है कि चंद्रमा से संबंधित चीजों और रिश्तेदारों लाभकारी और अच्छे परिणाम मिलेंगे। शैक्षिक उपलब्धियां पैसा या धन कमाने के लिए उपयोगी साबित होंगी। उसके पास जमीन जायदाद हो या न हो लेकिन उसके पास नकद निश्चित रूप से हमेशा रहेगा। उसके पास कवि या ज्योतिषी बनने की अच्छी योग्यता होगी। अथवा वह चरित्रहीन हो सकता है और रहस्यवाद और अध्यात्मवाद को बहुत चाहता होगा। सातवें भाव में स्थित चंद्रमा जातक के जीवनसाथी और मां के बीच अर्थ संघर्ष देता है जो दूध के व्यवसाय में प्रतिकूल प्रभावी होता है। ऐसे में जातक अगर मां का कहना नहीं मानता तो उसे तनाव और परेशानियों का सामना करना पडता है। उपाय: (1) 24वें वर्ष में शादी न करें। (2) अपनी माँ को हमेशा खुश रखें। (3) लाभ कमाने के लिए कभी भी दूध या पानी न बेचें। (4) खोया बनाने के लिए दूध को न जलाएं। |
| मंगल आपके 5th भाव में स्थित है |
पांचवां घर मंगल के नैसर्गिक मित्र सूर्य का घर होता है। इसलिए इस घर में मंगल बहुत अच्छे परिणाम देता है। जातक के पुत्र उसकी प्रसिद्धि और धनार्जन के माध्यम बनते हैं। जातक की समृधि पुत्र प्राप्ति के बाद कई गुना बढ़ जाती है। शुक्र और चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करने वाली वस्तुएं और रिश्तेदार को हर तरीके से फायदेमंद साबित होंगे। जातक के पूर्वजों में से कोई चिकित्सक या वैद्य रहा होगा। जातक की उम्र के साथ उसकी समृधि भी बढती जाती है। लेकिन विपरीत लिंगी के साथ भावनात्मक लगाव और रोमांस जातक के लिए अत्यधिक विनाशकारी साबित होंगे और जातक की मानसिक शांति और रातों की नीद खराब करने के कारण बनेंगे। उपाय: (1) अपना नैतिक चरित्र अच्छा बनाए रखें। (2) रात को अपने बिस्तर के सिरहने एक बर्तन में पानी रखें और सुबह उसे किसी गमले में डाल दें। (3) अपने पूर्वजों की श्राद्ध करें और घर में एक नीम के पेड़ लगाएं। |
| बुध आपके 9th भाव में स्थित है |
नौवें घर में भी बुध बहुत बुरा प्रभाव देता है क्योकि यह बृहस्पति का घर होता है और बुध उसका शत्रु ग्रह है। यह लगातार मानसिक बेचैनी और विभिन्न प्रकार की मानहानि का कारण बनता है। यदि चंद्रमा केतु, और बृहस्पति 1, 3, 6, 7, 9 और 11 घरों में हों तो, बुध अधिक फायदेमंद परिणाम नहीं देता। उपाय: (1) हरे रंग के प्रयोग से बचें। (2) अपनी नाक छिदवायें। (3) किसी मिट्टी के बर्तन में मशरूम भरकर धार्मिक जगह दान करें। (4) किसी साधु या फ़कीर से कोई ताबीज़ न लें। |
| गुरु आपके 7th भाव में स्थित है |
सातवां घर शुक्र का होता है, अत: यह मिश्रित परिणाम देगा। जातक का भाग्योदय शादी के बाद होगा और जातक धार्मिक कार्यों में शामिल होगा। घर के मामले में मिलने वाला अच्छा परिणाम चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करेगा। जातक देनदार नहीं हो सकता है लेकिन उसके अच्छे बच्चे होंगे। यदि सूर्य पहले भाव में हो तो जातक एक अच्छा ज्योतिषी और आराम पसंद होगा। लेकिन यदि बृहस्पति सातवें भाव में नीच का हो और शनि नौवें भाव में हो तो जातक चोर हो सकता है। यदि बुध नौवें भाव में हो तो जातक के वैवाहिक जीवन परेशानियों से भरा होगा। यदि बृहस्पति नीच का हो तो जातक को भाइयों से सहयोग नहीं मिलेगा साथ ही वह सरकार के समर्थन से भी वंचित रह जाएगा। सातवें घर में बृहस्पति पिता के साथ मतभेद का कारण बनता है। ऐसे में जातक को चाहिए कि वह कभी भी किसी को कपड़े दान न करे, अन्यथा वह बडी गरीबी की चपेट में आ जाएगा। उपाय: (1) भगवान शिव की पूजा करें। (2) घर में किसी भी देवता की मूर्ति न रखें। (3) हमेशा अपने साथ किसी पीले कपडे में बांध कर सोना रखें। (4) पीले कपडे पहने हुए साधु और फ़कीरों से दूर रहें। |
| शुक्र आपके 9th भाव में स्थित है |
इस घर में स्थित शुक्र अच्छे परिणाम नहीं देता। जातक धनवान हो सकता है लेकिन अपनी रोटी के लिए उसे कडी मेहनत करनी पडेगी। उसे अपने प्रयासों का उचित पुरस्कार नहीं मिलेगा। घर में पुरुष सदस्यों, पैसा, धन और संपत्ति की कमी हो जाएगी। यदि शुक्र बुध या किसी अशुभ ग्रह के साथ है तो जातक सत्रह साल की उम्र से नशे और किसी रोग का शिकार हो जाएगा। उपाय: (1) घर की नींव में चांदी और शहद दबाएं। (2) यदि जातक स्त्री है तो लाल चूड़ियाँ पहनें जिनमें चांदी की धारियां हों अथवा चांदी की चूड़ियाँ जिन पर लाल रंग की डिजाइनिंग हो। (3) किसी नीम के पेड़ के नीचे 43 दिनों के लिए चांदी का टुकड़ा दबाएं। |
| शनि आपके 12th भाव में स्थित है |
शनि इस घर में अच्छा परिणाम देता है। जातक के दुश्मन नहीं होंगे। उसके कई घर होंगे। उसके परिवार और व्यापार में वृद्धि होगी। वह बहुत अमीर हो जाएगा। हालांकि, यदि जातक शराब पिए, मांशाहार करे या अपने घर के अंधेरे कमरे में रोशनी करे तो शनि नीच का हो जाएगा। उपाय: (1) किसी काले कपड़े में बारह बादाम बांधकर उसे किसी लोहे के बर्तन में भरकर किसी अंधेरे कमरे में रखने से अच्छे परिणाम मिलेंगे। |
| राहु आपके 1st भाव में स्थित है |
पहला घर मंगल और सूर्य से प्रभावित होता है, यह घर किसी सिंहासन की तरह होता है। पहले घर में बैठा ग्रह सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। जातक अपनी योग्यता से बडा पद प्राप्त करेगा। उसे सरकार से भी अच्छे परिणाम मिलेंगे। इस घर में राहू उच्च के सूर्य के समान परिणाम देगा। लेकिन सूर्य जिस भाव में बैठा है उस भाव के फल प्रभावित होंगे। यदि मंगल, शनि और केतू कमजोर हैं तो राहू बुरे परिणाम देगा अन्यथा यह पहले भाव में अच्छे परिणाम देगा। यदि राहू नीच का हो तो जातक को कभी भी ससुराल वालों से बिजली के उपकरण या नीले कपडे नहीं लेने चाहिए, अन्यथा उसके पुत्र पर बुरा प्रभाव पडता है। राहू के दुष्परिणाम 42 साल की उम्र तक मिलते हैं। उपाय: (1) बहते पानी में 400 ग्राम सुरमा बहाएं। (2) गले में चांदी पहनें। (3) 1:4 के अनुपात में जौ में दूध मिलाए और बहते पानी में बहाएं। (4) बहते पानी में नारियल बहाएं। |
| केतु आपके 7th भाव में स्थित है |
सातवां घर बुध और शुक्र का होता है। यदि सातवें भाव में स्थित केतू शुभ हो तो जातक चौबीस साल से लेकर चालीस साल तक खूब धन कमाएगा। जातक के बच्चों के अनुपात में धन की बृद्धि होती है। जातक के दुश्मन जातक से डरते हैं। यदि जातक को बुध, बृहस्पति अथवा शुक्र का सहयोग मिलता है तो जातक को कभी भी निराश नहीं होना पडता। यदि सातवें भाव में केतू अशुभ हो तो जातक अक्सर बीमार रहता है, बेकार के वादे करता है और तैतीस साल की अवस्था तक शत्रुओं से पीडित रहता है। यदि लग्न में एक से अधिक ग्रह हों तो जातक के बच्चे नष्ट हो जाते हैं। यदि जातक गालियां देता है तो जातक नष्ट होता है। यदि केतू बुध के साथ हो तो चौतीस सालों के बाद जातक के शत्रु अपने आप नष्ट हो जाते हैं। उपाय: (1) झूठे वादे, घमंड और गाली देने से बचे। (2) माथे पर केसर का तिलक लगाएं। (3) गंभीर संकट या कष्ट के समय बृहस्पति के उपचार करें। |
|| रत्न भविष्यवाणी ||
रत्न क्या हैं?
प्राचीन काल से रत्नों का उपयोग आध्यात्मिक क्रियाकलापों और उपचार के
लिए किया जाता रहा है। हालाँकि रत्न कठिनाई से मिलते थे और बहुत सुन्दर
होते थे, लेकिन उनके बहुमूल्य होने का प्रमुख कारण पहनने वाले को उनसे
हासिल होने वाली शक्तियाँ थीं। रत्न शक्तियों के भण्डार की तरह हैं, जिनका
असर स्पर्श के माध्यम से शरीर में जाता है। रत्नों का असर धारण करने वाले
पर सकारात्मक या नकारात्मक रूप से हो सकता है – यह इस बात पर निर्भर करता
है कि उन्हें किस तरह उपयोग में लाया जाता है। सभी रत्नों में अलग-अलग
परिमाण में चुम्बकीय शक्तियाँ होती हैं, जिनमें से कई उपचार के दृष्टिकोण
से हमारे लिए बेहद लाभदायक हैं। ये रत्न ऐसे स्पन्दन पैदा करते हैं, जिनका
हमारे पूरे अस्तित्व पर बहुत गहरा असर होता है। आइए, देखें कि आपके लिए
रत्न-विचार किस प्रकार है।
आपका जीवन रत्न
जीवन-रत्न लग्न के स्वामी का रत्न है। इस रत्न की रहस्यमयी शक्तियों का
अनुभव करने के लिए इसे जीवन भर धारण किया जा सकता है। जीवन रत्न धारण करना
सारी बाधाएँ मिटा सकता है और जातक को प्रसन्न, सफल व समृद्ध कर सकता है।
सामान्यतः इसे व्यक्ति की सर्वांगीण उन्नति के लिए धारण किया जाता है। इसके
ब्रह्माण्डीय तरंगें व्यक्ति के सम्पूर्ण अस्तित्व को प्रभावित करती हैं।
सुझाव
रत्न-सुझाव
नीलम
न्यूनतम आवश्यक भार
2 रत्ती
धारण करने के नियम
स्वर्ण धातु, मध्यमा अंगुली में
रत्न-धारण का मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनये नम:
आपका पुण्य-रत्न
जीवन परिश्रम और भाग्य का बढ़िया सम्मिश्रण है। अपना पुण्य-रत्न धारण
करके भाग्य को अपने हित में कार्य करने दें। व्यक्ति का पुण्य-रत्न वह होता
है, जो उस व्यक्ति के सौभाग्य को आकर्षित करके उसके जीवन में सुखद आश्चर्य
घोलता रहता है। हमारे अनुसार आपका पुण्य-रत्न है -
सुझाव
रत्न-सुझाव
हीरा
न्यूनतम आवश्यक भार
1 रत्ती
धारण करने के नियम
स्वर्ण धातु या चाँदी धातु, मध्यमा अंगुली में
रत्न-धारण का मंत्र
ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:
आपका भाग्य-रत्न
भाग्य-रत्न का निर्धारण नवम भाव के स्वामी के आधार पर किया जाता है। जब
आपको वाक़ई भाग्य की आवश्यकता होती है, यह रत्न उस समय नियति को आपके पक्ष
में करता है। व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में यह सकारात्मकता प्रवाहित
करता है। आपकी समृद्धि के मार्ग में जो भी बाधाएँ हों, भाग्य-रत्न उन्हें
दूर करने का कार्य करता है।
सुझाव
रत्न-सुझाव
पन्ना
न्यूनतम आवश्यक भार
1.5 रत्ती
धारण करने के नियम
स्वर्ण धातु, अनामिका अंगुली में या कनिष्ठिका अंगुली में
रत्न-धारण का मंत्र
ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:
|| साढे साती रिपोर्ट ||
| नाम | श्री हरिप्रसाद जोशी | ||
| जन्म जन्म-तिथि | 13 : 10 : 1990 | जन्म जन्म-समय | 14 : 30 : 0 |
| जन्म स्थान | दार्चुला जिल्ला, | ||
| लिंग | पुस्र्ष | तिथि | दशमी |
| राशि | कर्क | नक्षत्र | आश्लेषा |
| क्रम संख्या | साढे साती/ पनौती | शनि राशि |
आरंभ दिनांक | अंत दिनांक | चरण |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | छोटी पनौती | कुंभ | मार्च 06,1993 | अक्टूबर 15,1993 | |
| 2 | छोटी पनौती | कुंभ | नवंबर 10,1993 | जून 01,1995 | |
| 3 | छोटी पनौती | कुंभ | अगस्त 10,1995 | फ़रवरी 16,1996 | |
| 4 | साढे साती | मिथुन | जुलाई 23,2002 | जनवरी 08,2003 | उदय |
| 5 | साढे साती | मिथुन | अप्रैल 08,2003 | सितंबर 05,2004 | उदय |
| 6 | साढे साती | कर्क | सितंबर 06,2004 | जनवरी 13,2005 | शिखर |
| 7 | साढे साती | मिथुन | जनवरी 14,2005 | मई 25,2005 | उदय |
| 8 | साढे साती | कर्क | मई 26,2005 | अक्टूबर 31,2006 | शिखर |
| 9 | साढे साती | सिंह | नवंबर 01,2006 | जनवरी 10,2007 | अस्त |
| 10 | साढे साती | कर्क | जनवरी 11,2007 | जुलाई 15,2007 | शिखर |
| 11 | साढे साती | सिंह | जुलाई 16,2007 | सितंबर 09,2009 | अस्त |
| 12 | छोटी पनौती | तुला | नवंबर 15,2011 | मई 15,2012 | |
| 13 | छोटी पनौती | तुला | अगस्त 04,2012 | नवंबर 02,2014 | |
| 14 | छोटी पनौती | कुंभ | अप्रैल 29,2022 | जुलाई 12,2022 | |
| 15 | छोटी पनौती | कुंभ | जनवरी 18,2023 | मार्च 29,2025 | |
| 16 | साढे साती | मिथुन | मई 31,2032 | जुलाई 12,2034 | उदय |
| 17 | साढे साती | कर्क | जुलाई 13,2034 | अगस्त 27,2036 | शिखर |
| 18 | साढे साती | सिंह | अगस्त 28,2036 | अक्टूबर 22,2038 | अस्त |
| 19 | साढे साती | सिंह | अप्रैल 06,2039 | जुलाई 12,2039 | अस्त |
| 20 | छोटी पनौती | तुला | जनवरी 28,2041 | फ़रवरी 05,2041 | |
| 21 | छोटी पनौती | तुला | सितंबर 26,2041 | दिसम्बर 11,2043 | |
| 22 | छोटी पनौती | तुला | जून 23,2044 | अगस्त 29,2044 | |
| 23 | छोटी पनौती | कुंभ | फ़रवरी 25,2052 | मई 14,2054 | |
| 24 | छोटी पनौती | कुंभ | सितंबर 02,2054 | फ़रवरी 05,2055 | |
| 25 | साढे साती | मिथुन | जुलाई 11,2061 | फ़रवरी 13,2062 | उदय |
| 26 | साढे साती | मिथुन | मार्च 07,2062 | अगस्त 23,2063 | उदय |
| 27 | साढे साती | कर्क | अगस्त 24,2063 | फ़रवरी 05,2064 | शिखर |
| 28 | साढे साती | मिथुन | फ़रवरी 06,2064 | मई 09,2064 | उदय |
| 29 | साढे साती | कर्क | मई 10,2064 | अक्टूबर 12,2065 | शिखर |
| 30 | साढे साती | सिंह | अक्टूबर 13,2065 | फ़रवरी 03,2066 | अस्त |
| 31 | साढे साती | कर्क | फ़रवरी 04,2066 | जुलाई 02,2066 | शिखर |
| 32 | साढे साती | सिंह | जुलाई 03,2066 | अगस्त 29,2068 | अस्त |
| 33 | छोटी पनौती | तुला | नवंबर 05,2070 | फ़रवरी 05,2073 | |
| 34 | छोटी पनौती | तुला | मार्च 31,2073 | अक्टूबर 23,2073 | |
| 35 | छोटी पनौती | कुंभ | अप्रैल 12,2081 | अगस्त 02,2081 | |
| 36 | छोटी पनौती | कुंभ | जनवरी 07,2082 | मार्च 19,2084 | |
| 37 | साढे साती | मिथुन | सितंबर 19,2090 | अक्टूबर 24,2090 | उदय |
| 38 | साढे साती | मिथुन | मई 21,2091 | जुलाई 02,2093 | उदय |
| 39 | साढे साती | कर्क | जुलाई 03,2093 | अगस्त 18,2095 | शिखर |
| 40 | साढे साती | सिंह | अगस्त 19,2095 | अक्टूबर 11,2097 | अस्त |
| 41 | साढे साती | सिंह | मई 03,2098 | जून 19,2098 | अस्त |
| 42 | छोटी पनौती | तुला | दिसम्बर 26,2099 | मार्च 17,2100 | |
| 43 | छोटी पनौती | तुला | सितंबर 17,2100 | दिसम्बर 02,2102 |
शनि साढे साती
:
उदय चरण
|
यह शनि साढ़े साती का आरम्भिक दौर है। इस दौरान शनि चन्द्र से बारहवें भाव में स्थित होगा। आम तौर पर यह आर्थिक हानि, छुपे हुए शत्रुओं से नुक़सान, नुरुद्देश्य यात्रा, विवाद और निर्धनता को दर्शाता है। इस कालखण्ड में आपको गुप्त शत्रुओं द्वारा पैदा की हुई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सहकर्मियों से संबंध अच्छे नहीं रहेंगे और वे आपके कार्यक्षेत्र में बाधाएँ खड़ी कर सकते हैं। घरेलू मामलों में भी आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके चलते तनाव और दबाव की स्थिति पैदा होगी। आपको अपने ख़र्चों पर नियन्त्रण करने की आवश्यकता है, अन्यथा आप अधिक बड़े आर्थिक संकट में फँस सकते हैं। इस दौरान लम्बी दूरी की यात्राएँ फलदायी नहीं रहेंगी। शनि का स्वभाव विलम्ब और तनाव पैदा करने का है। हालाँकि अन्ततः आपको परिणाम ज़रूर मिलेगा। इसलिए धैर्य रखें और सही समय की प्रतीक्षा करें। इस दौर को सीखने का समय समझें और कड़ी मेहनत करें, परिस्थितियाँ स्वतः सही होती चली जाएंगी। इस समय व्यवसाय में कोई भी बड़ा ख़तरा या चुनौती न मोल लें। |
शनि साढे साती:
शिखर
चरण
|
यह शनि साढ़े साती का चरम है। प्रायः यह दौर सबसे मुश्किल होता है। इस समय चन्द्र पर गोचर करता हुआ शनि स्वास्थ्य-संबंधी समस्या, चरित्र-हनन की कोशिश, रिश्तों में दरार, मानसिक अशान्ति और दुःख की ओर संकेत करता है। इस दौरान आप सफलता पाने में कठिनाई महसूस करेंगे। आपको अपनी कड़ी मेहनत का परिणाम नहीं मिलेगा और ख़ुद को बंधा हुआ अनुभव करेंगे। आपकी सेहत और प्रतिरक्षा-तन्त्र पर्याप्त सशक्त नहीं होंगे। क्योंकि पहला भाव स्वास्थ्य को दर्शाता है इसलिए आपको नियमित व्यायाम और अपनी सेहत का ख़ास ख़याल रखने की ज़रूरत है, नहीं तो आप संक्रामक रोगों की चपेट में आ सकते हैं। साथ ही आपको मानसिक अवसाद और अज्ञात भय या फ़ोबिया आदि का सामना भी करना पड़ सकता है। संभव है कि इस काल-खण्ड में आपकी सोच, कार्य और निर्णय करने की क्षमता में स्पष्टता का अभाव रहे। संतोषपूर्वक परिस्थितियों को स्वीकार करना और मूलभूत काम ठीक तरह से करना आपको इस संकट की घड़ी से निकाल सकता है। |
शनि साढे साती:
अस्त
चरण
|
| यह शनि साढ़े साती का अन्तिम चरण है। इस समय शनि चन्द्र से दूसरे भाव में गोचर कर रहा होगा, जो व्यक्तिगत और वित्तीय मोर्चे पर कठिनाइयों को इंगित करता है। साढ़े साती के दो मुश्किल चरणों से गुज़रने के बाद आप कुछ राहत महसूस करने लगेंगे। फिर भी इस दौरान ग़लतफ़हमी आर्थिक दबाव देखा जा सकता है। व्यय में वृद्धि होगी और आपको इसपर लगाम लगाने की अब भी ज़रूरत है। अचानक हुई आर्थिक हानि और चोरी की संभावना को भी इस दौरान नहीं नकारा जा सकता है। आपकी सोच नकारात्मक हो सकती है। आपको उत्साह के साथ परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। आपको व्यक्तिगत और पारिवारिक तौर पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, नहीं तो बड़ी परेशानियाँ पैदा हो सकती हैं। विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई-लिखाई पर थोड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और उन्हें पिछले स्तर पर बने रहने के लिए अधिक परिश्रम की ज़रूरत होगी। परिणाम धीरे-धीरे और प्रायः हमेशा विलम्ब से प्राप्त होंगे। यह काल-खण्ड ख़तरे को भी दर्शाता है, अतः गाड़ी चलाते समय विशेष सावधानी अपेक्षित है। यदि संभव हो तो मांसाहार और मदिरापान से दूर रहकर शनि को प्रसन्न रखें। यदि आप समझदारी से काम लेंगे, तो घरेलू व आर्थिक मामलों में आने वाली परेशानियों को भली-भांति हल करने में सफल रहेंगे। |
आपकी कुण्डली और ज्योतिष में ग्रह विचार
सूर्य विचार
आपकी कुण्डली में सूर्य कन्या राशि में स्थित है, जो की सूर्य की सम-राशि
है। सूर्य आठवें, घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में नौवें घर में
स्थित है। सूर्य की दृष्टि तीसरे घर पर है। शनि, राहु की पूर्ण दृष्टि
सूर्य पर है।
सूर्य की यह स्थिति आपको लम्बी यात्राएं करवाएगी। आप स्वभाव से परोपकारी होंगे। आपको अपने परिवार से विशेष लगाव होगा लेकिन पिता से संबंध अधिक मधुर नहीं रहेंगे। आपके भीतर नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता पाई जाएगी। आप गृहस्थ होकर भी किसी योगी और तपस्वी की तरह जीवन व्यतीत करेंगे। सदाचार आपके स्वभाव में कूट-कूट कर भरा होगा।
आप स्वभाव से कुछ हद तक क्रूर हो सकते हैं। फिर भी अपनी साधना से आप स्वयं को सुखी रख पाएंगे। आपको विभिन्न प्रकार के वाहनों का सुख मिलेगा। आपके पास कई नौकर-चाकर हो सकते हैं। आपकी रुचि ज्योतिष या किसी अन्य गूढ विद्या में हो सकती है। इसके अलावा आपका लगाव कानून या कानून से संबंधित संस्थानों से हो सकता है।
इक्कीस वर्ष की उम्र के बाद आपके जीवन की कठिनाइयां धीरे-धीरे करके समाप्त होने लगेंगी। आप जिस किसी क्षेत्र में होंगे वहां आपको सम्मान मिलेगा। सूर्य की यह स्थिति आपको शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग करेगी और आप उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। यह स्थिति विदेश यात्रा के लिए भी आपको अनुकूलता प्रदान करेगी लेकिन आप अपने पुत्रों को लेकर कुछ हद तक चिंतित रह सकते हैं।
सूर्य की यह स्थिति आपको लम्बी यात्राएं करवाएगी। आप स्वभाव से परोपकारी होंगे। आपको अपने परिवार से विशेष लगाव होगा लेकिन पिता से संबंध अधिक मधुर नहीं रहेंगे। आपके भीतर नेतृत्व करने की अद्भुत क्षमता पाई जाएगी। आप गृहस्थ होकर भी किसी योगी और तपस्वी की तरह जीवन व्यतीत करेंगे। सदाचार आपके स्वभाव में कूट-कूट कर भरा होगा।
आप स्वभाव से कुछ हद तक क्रूर हो सकते हैं। फिर भी अपनी साधना से आप स्वयं को सुखी रख पाएंगे। आपको विभिन्न प्रकार के वाहनों का सुख मिलेगा। आपके पास कई नौकर-चाकर हो सकते हैं। आपकी रुचि ज्योतिष या किसी अन्य गूढ विद्या में हो सकती है। इसके अलावा आपका लगाव कानून या कानून से संबंधित संस्थानों से हो सकता है।
इक्कीस वर्ष की उम्र के बाद आपके जीवन की कठिनाइयां धीरे-धीरे करके समाप्त होने लगेंगी। आप जिस किसी क्षेत्र में होंगे वहां आपको सम्मान मिलेगा। सूर्य की यह स्थिति आपको शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग करेगी और आप उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। यह स्थिति विदेश यात्रा के लिए भी आपको अनुकूलता प्रदान करेगी लेकिन आप अपने पुत्रों को लेकर कुछ हद तक चिंतित रह सकते हैं।
चंद्र विचार
आपकी कुण्डली में चन्द्र कर्क राशि में स्थित है, जो की चन्द्र की
स्व-राशि है। चन्द्र सातवें, घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में सातवें
घर में स्थित है। चन्द्र की दृष्टि पहले घर पर है। राहु की पूर्ण दृष्टि
चन्द्र पर है।
चंद्रमा सातवें स्थान में होने से आप सभ्य व्यक्तियों की श्रेणी में गिने जाएंगे। आपको जलीय मार्ग से यात्रा करना अथवा जल के आस-पास रहना अधिक पसंद होगा। यद्यपि आपमें कभी-कभी अधीरता भी देखने को मिलेगी लेकिन अधिकांश मामलो में आप धैर्यवान ही रहते हैं। आपमें नेतॄत्त्व करने की क्षमता भी है। आपको अपने जीवन काल में बहुत सारी यात्राएं करनी पडेंगी।
आप एक अच्छे व्यापारी या वकील भी हो सकते हैं। आपकी स्फूर्ति प्रसंसनीय है लेकिन कुछ लोगों के नजरिए से आप अभिमानी भी हो सकते हैं। आपका विवाह अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है। जीवन साथी से आपका आत्मीय प्रेम रहेगा। आपके साथ-साथ आपके जीवन साथी का शारीरिक गठन देखने में लुभावना होना चाहिए। दोनो की रुचि विषय वासना के प्रति अधिक होनी चाहिए।
आपको आपके व्यवसाय में अच्छी सफलता मिलेगी। यदि आप विदेश गमन की इच्छा रखते हैं तो थोडे से प्रयास से ही आपका मनोरथ पूरा हो सकता है। आपको अपने जीवनसाथी के साथ खूब यात्राएं करने का मौका मिलेगा। आपकी संतान को भी यात्राओं का खूब शौक होगा। वो अपने व्यवसाय में सफल भी रहेंगे लेकिन उन्हें अपने व्यापार में कई बार परिवर्तन करने पड सकते हैं।
चंद्रमा सातवें स्थान में होने से आप सभ्य व्यक्तियों की श्रेणी में गिने जाएंगे। आपको जलीय मार्ग से यात्रा करना अथवा जल के आस-पास रहना अधिक पसंद होगा। यद्यपि आपमें कभी-कभी अधीरता भी देखने को मिलेगी लेकिन अधिकांश मामलो में आप धैर्यवान ही रहते हैं। आपमें नेतॄत्त्व करने की क्षमता भी है। आपको अपने जीवन काल में बहुत सारी यात्राएं करनी पडेंगी।
आप एक अच्छे व्यापारी या वकील भी हो सकते हैं। आपकी स्फूर्ति प्रसंसनीय है लेकिन कुछ लोगों के नजरिए से आप अभिमानी भी हो सकते हैं। आपका विवाह अपेक्षाकृत जल्दी हो सकता है। जीवन साथी से आपका आत्मीय प्रेम रहेगा। आपके साथ-साथ आपके जीवन साथी का शारीरिक गठन देखने में लुभावना होना चाहिए। दोनो की रुचि विषय वासना के प्रति अधिक होनी चाहिए।
आपको आपके व्यवसाय में अच्छी सफलता मिलेगी। यदि आप विदेश गमन की इच्छा रखते हैं तो थोडे से प्रयास से ही आपका मनोरथ पूरा हो सकता है। आपको अपने जीवनसाथी के साथ खूब यात्राएं करने का मौका मिलेगा। आपकी संतान को भी यात्राओं का खूब शौक होगा। वो अपने व्यवसाय में सफल भी रहेंगे लेकिन उन्हें अपने व्यापार में कई बार परिवर्तन करने पड सकते हैं।
मंगल विचार
आपकी कुण्डली में मंगल वृषभ राशि में स्थित है, जो की मंगल की सम-राशि
है। मंगल चौथे, ग्यारहवें घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में पांचवें घर
में स्थित है। मंगल की दृष्टि आठवें, ग्यारहवें, बारहवें घर पर है। राहु
की पूर्ण दृष्टि मंगल पर है।
पांचवे भाव में स्थित मंगल आपमें चंचलता देने के साथ-साथ आपको बुद्धिमान बनाता है लेकिन आपके स्वभाव में उग्रता जल्द ही आ जाती है। यदि आप कुसंगति के स्वयं को नहीं बचाएंगे तो आप भी व्यसनी हो जाएंगे। छल कपट से दूर रहना भी आपके लिए हितकर होगा। आपको पेट से सम्बंधित परेशानियां भी समय-समय पर परेशान कर सकती है अत: खान-पान पर संयम रखना जरूरी होगा।
ज्यादतियों और सट्टे बाजारी के शौक के कारण आपको घाटा भी उठाना पड सकता है। इन कारणों से आप तनावग्रस्त और आक्रामक हो सकते है। हांलाकि आप बुद्धिमान व्यक्ति हैं लेकिन कोई-कोई निर्णय बिना विवेक के भी ले सकते हैं। आपका प्रथम पुत्र बहुत जल्द गुस्सा करने वाला होगा, उसे दुर्घटनाओं और चोट लगने का भय बना रहेगा। कोई संतान अवज्ञाकारी भी हो सकती है।
आपकी संतान शल्य चिकित्सा के माध्यम से हो सकती है। आप पेट की तकलीफों और कब्जजन्य रोगों से परेशान रह सकते हैं। आप विपरीतलिंगी के प्रति अधिक आकर्षित हो सकते है, यदि आपने इस मामले में संयम से काम नहीं लिया तो आपकी बदनामी भी हो सकती है। आपको जिम जाना अथवा व्यायाम करना बहुत पसंद होगा।
पांचवे भाव में स्थित मंगल आपमें चंचलता देने के साथ-साथ आपको बुद्धिमान बनाता है लेकिन आपके स्वभाव में उग्रता जल्द ही आ जाती है। यदि आप कुसंगति के स्वयं को नहीं बचाएंगे तो आप भी व्यसनी हो जाएंगे। छल कपट से दूर रहना भी आपके लिए हितकर होगा। आपको पेट से सम्बंधित परेशानियां भी समय-समय पर परेशान कर सकती है अत: खान-पान पर संयम रखना जरूरी होगा।
ज्यादतियों और सट्टे बाजारी के शौक के कारण आपको घाटा भी उठाना पड सकता है। इन कारणों से आप तनावग्रस्त और आक्रामक हो सकते है। हांलाकि आप बुद्धिमान व्यक्ति हैं लेकिन कोई-कोई निर्णय बिना विवेक के भी ले सकते हैं। आपका प्रथम पुत्र बहुत जल्द गुस्सा करने वाला होगा, उसे दुर्घटनाओं और चोट लगने का भय बना रहेगा। कोई संतान अवज्ञाकारी भी हो सकती है।
आपकी संतान शल्य चिकित्सा के माध्यम से हो सकती है। आप पेट की तकलीफों और कब्जजन्य रोगों से परेशान रह सकते हैं। आप विपरीतलिंगी के प्रति अधिक आकर्षित हो सकते है, यदि आपने इस मामले में संयम से काम नहीं लिया तो आपकी बदनामी भी हो सकती है। आपको जिम जाना अथवा व्यायाम करना बहुत पसंद होगा।
बुध विचार
आपकी कुण्डली में बुध कन्या राशि में स्थित है, जो की बुध की उच्च राशि
है। बुध छठें, नौवें घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में नौवें घर में
स्थित है। बुध की दृष्टि तीसरे घर पर है। शनि, राहु की पूर्ण दृष्टि बुध
पर है।
नवम भाव का बुध शुभफल देने वाला कहा गया है। यहां का बुध आपको धर्मात्मा और भाग्यशाली बनाता है। अत: आप सदाचारी, धर्म को जानने वाले और बुद्धिमान व्यक्ति हैं। आपको सज्जनों की संगति मिलती रहेगी। आप धर्म के विपरीत जाकर कोई काम नहीं करेंगे। आप एक जिज्ञासु व्यक्ति हैं और दान पुण्य करने में भी आपकी अच्छी रुचि होगी।
आप विभिन्न प्रकार के सुखों का उपभोग करेंगे। तीर्थ यात्रा और धार्मिक कार्यों जैसे यज्ञ आदि में आपकी अच्छी रुचि होगी। आप एक पराक्रमी व्यक्ति हैं और हमेशा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे। आप हमेशा किसी न किसी शोध में या नई चीजों की खोज में लगे रहने वाले व्यक्ति हैं। आप समाज में या अपने परिवार में राजा के समान सम्मानित व्यक्ति होंगे।
आप अपने कुल को अपने ज्ञान, धन और यश से उज्ज्वल और पवित्र करने वाले हैं। आप उपकार और विद्या के कारण लोगों के आदरणीय बनेंगे। लेकिन आपको अपने ज्ञान और बुद्धि पर घमण्ड करने से बचना होगा। आपकी उम्र के उन्तीसवें वर्ष में आपकी माता को कष्ट हो सकता है। आप कवि, वक्ता, संगीतज्ञ, संपादक, लेखक या ज्योतिषी हो सकते हैं।
नवम भाव का बुध शुभफल देने वाला कहा गया है। यहां का बुध आपको धर्मात्मा और भाग्यशाली बनाता है। अत: आप सदाचारी, धर्म को जानने वाले और बुद्धिमान व्यक्ति हैं। आपको सज्जनों की संगति मिलती रहेगी। आप धर्म के विपरीत जाकर कोई काम नहीं करेंगे। आप एक जिज्ञासु व्यक्ति हैं और दान पुण्य करने में भी आपकी अच्छी रुचि होगी।
आप विभिन्न प्रकार के सुखों का उपभोग करेंगे। तीर्थ यात्रा और धार्मिक कार्यों जैसे यज्ञ आदि में आपकी अच्छी रुचि होगी। आप एक पराक्रमी व्यक्ति हैं और हमेशा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे। आप हमेशा किसी न किसी शोध में या नई चीजों की खोज में लगे रहने वाले व्यक्ति हैं। आप समाज में या अपने परिवार में राजा के समान सम्मानित व्यक्ति होंगे।
आप अपने कुल को अपने ज्ञान, धन और यश से उज्ज्वल और पवित्र करने वाले हैं। आप उपकार और विद्या के कारण लोगों के आदरणीय बनेंगे। लेकिन आपको अपने ज्ञान और बुद्धि पर घमण्ड करने से बचना होगा। आपकी उम्र के उन्तीसवें वर्ष में आपकी माता को कष्ट हो सकता है। आप कवि, वक्ता, संगीतज्ञ, संपादक, लेखक या ज्योतिषी हो सकते हैं।
गुरु विचार
आपकी कुण्डली में गुरु कर्क राशि में स्थित है, जो की गुरु की उच्च राशि
है। गुरु बारहवें, तीसरे घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में सातवें घर
में स्थित है। गुरु की दृष्टि ग्यारहवें, पहले, तीसरे घर पर है। राहु की
पूर्ण दृष्टि गुरु पर है।
आप शारीरिक रूप से सुंदर और और आकर्षक व्यक्तित्त्व के मालिक हैं। लोग आपसे मिलकर प्रसन्न होते हैं अर्थात आपके आकर्षण के कारण लोग आपसे मिलकर आपके वशीभूत हो जाते हैं। आपकी वाणी आकर्षक और प्रभावशाली होगी। आप कुशाग्र बुद्धि और विद्या सम्पन्न व्यक्ति हैं। आप ज्योतिष काव्य साहित्य, कला प्रेमी और शास्त्र परिशीलन में आसक्त रहने वाले व्यक्ति हैं।
आप प्रतापी यशस्वी और प्रसिद्ध होंगे। लेकिन यहां स्थित बृहस्पति कभी-कभी विपरीत लिंगी के प्रति अधिक आशक्ति देता है परंतु उनके प्रति लम्बे समय तक समर्पित रहना आपको पसंद नहीं होगा। फिर भी आपका जीवन साथी कुलीन और धनवान होना चाहिए। विवाह के कारण आपका भाग्योदय होगा और आपको धन, सुख, श्रेष्ठ पद और मान्यता मिलेगी। आपका जीवन साथी गुणों से युक्त होगा।
सप्तम भाव का बृहस्पति कामुकता अधिक देता है। यहां स्थित कभी-कभी अभिमानी भी बनाता है। अत: इन पर नियंत्रण भी आवश्यक होगा। आप शीघ्र ही बडी उन्न्ति और बडा पद प्राप्त करेंगे। आपको सरकारी कामों, कचहरी के काम, मंत्रणा देने का काम, सलाहकार का काम, चित्रकला आदि के द्वारा लाभ मिल सकता है। आप न्याय के काम से भी धनार्जन कर सकते हैं।
आप शारीरिक रूप से सुंदर और और आकर्षक व्यक्तित्त्व के मालिक हैं। लोग आपसे मिलकर प्रसन्न होते हैं अर्थात आपके आकर्षण के कारण लोग आपसे मिलकर आपके वशीभूत हो जाते हैं। आपकी वाणी आकर्षक और प्रभावशाली होगी। आप कुशाग्र बुद्धि और विद्या सम्पन्न व्यक्ति हैं। आप ज्योतिष काव्य साहित्य, कला प्रेमी और शास्त्र परिशीलन में आसक्त रहने वाले व्यक्ति हैं।
आप प्रतापी यशस्वी और प्रसिद्ध होंगे। लेकिन यहां स्थित बृहस्पति कभी-कभी विपरीत लिंगी के प्रति अधिक आशक्ति देता है परंतु उनके प्रति लम्बे समय तक समर्पित रहना आपको पसंद नहीं होगा। फिर भी आपका जीवन साथी कुलीन और धनवान होना चाहिए। विवाह के कारण आपका भाग्योदय होगा और आपको धन, सुख, श्रेष्ठ पद और मान्यता मिलेगी। आपका जीवन साथी गुणों से युक्त होगा।
सप्तम भाव का बृहस्पति कामुकता अधिक देता है। यहां स्थित कभी-कभी अभिमानी भी बनाता है। अत: इन पर नियंत्रण भी आवश्यक होगा। आप शीघ्र ही बडी उन्न्ति और बडा पद प्राप्त करेंगे। आपको सरकारी कामों, कचहरी के काम, मंत्रणा देने का काम, सलाहकार का काम, चित्रकला आदि के द्वारा लाभ मिल सकता है। आप न्याय के काम से भी धनार्जन कर सकते हैं।
शुक्र विचार
आपकी कुण्डली में शुक्र कन्या राशि में स्थित है, जो की शुक्र की नीच
राशि है। शुक्र पांचवें, दसवें घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में नौवें
घर में स्थित है। शुक्र की दृष्टि तीसरे घर पर है। शनि, राहु की पूर्ण
दृष्टि शुक्र पर है।
नवम भाव में शुक्र स्थित होने के कारण आप शारीरिक रूप से बलिष्ठ होंगे। आप धार्मिक, शुद्धचित्त, परोपकारी और गुणवान व्यक्ति हैं। आप ईश्वर पर विश्वास करने वाले धार्मिक व्यक्ति हैं। कहा गया है कि नौवें भाव में शुक्र होने से जातक पवित्र आत्मा होता है। जातक पवित्र तीर्थों की यात्रा करने वाला, जप आदि कार्य करने वाला होता है। अत: आपमें भी ये गुण होने चाहिए।
गुरुजनों देवों और अतिथियों की सेवा करने में आपको आनंद आता है। आप दयालु, उदार और संतोषी स्वभाव के हैं। आपकी रुचि गायन, वादन, सिनेमा जैसी ललित कलाओं में आपकी रुचि होनी चाहिए अथवा आप इन कलाओं में दक्ष हो सकते हैं। आप एक अच्छे अभिनेता, काव्य नाटक पढने वाले और विद्या व्यसनी हो सकते हैं। आपको समुद्री प्रवास करने का मौका भी मिल सकता है।
अपने स्तर पर आपकी गणना धनाढ्यों में होगी। आप अपने बाहुबल से भूब धन अर्जित करेंगे। आप ब्याज पर रुपए पैसों के लेन देन का काम कर सकते हैं। आपके धन में उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहेगी। आपको सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। आप उत्तम परिधान पहनने वाले राजप्रिय व्यक्ति होंगे। विवाह के बाद आप अधिक सफल होंगे। यह स्थिति पिता के लिए कभी-कभार थोडी प्रतिकूलता दे सकती है।
नवम भाव में शुक्र स्थित होने के कारण आप शारीरिक रूप से बलिष्ठ होंगे। आप धार्मिक, शुद्धचित्त, परोपकारी और गुणवान व्यक्ति हैं। आप ईश्वर पर विश्वास करने वाले धार्मिक व्यक्ति हैं। कहा गया है कि नौवें भाव में शुक्र होने से जातक पवित्र आत्मा होता है। जातक पवित्र तीर्थों की यात्रा करने वाला, जप आदि कार्य करने वाला होता है। अत: आपमें भी ये गुण होने चाहिए।
गुरुजनों देवों और अतिथियों की सेवा करने में आपको आनंद आता है। आप दयालु, उदार और संतोषी स्वभाव के हैं। आपकी रुचि गायन, वादन, सिनेमा जैसी ललित कलाओं में आपकी रुचि होनी चाहिए अथवा आप इन कलाओं में दक्ष हो सकते हैं। आप एक अच्छे अभिनेता, काव्य नाटक पढने वाले और विद्या व्यसनी हो सकते हैं। आपको समुद्री प्रवास करने का मौका भी मिल सकता है।
अपने स्तर पर आपकी गणना धनाढ्यों में होगी। आप अपने बाहुबल से भूब धन अर्जित करेंगे। आप ब्याज पर रुपए पैसों के लेन देन का काम कर सकते हैं। आपके धन में उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहेगी। आपको सभी प्रकार के भौतिक सुखों की प्राप्ति होगी। आप उत्तम परिधान पहनने वाले राजप्रिय व्यक्ति होंगे। विवाह के बाद आप अधिक सफल होंगे। यह स्थिति पिता के लिए कभी-कभार थोडी प्रतिकूलता दे सकती है।
शनि विचार
आपकी कुण्डली में शनि धनु राशि में स्थित है, जो की शनि की सम-राशि है।
शनि पहले, दूसरे घर का स्वामी होकर आपकी कुण्डली में बारहवें घर में स्थित
है। शनि की दृष्टि दूसरे, छठें, नौवें घर पर है। मंगल की पूर्ण दृष्टि
शनि पर है।
यहां स्थित शनि आपको एकांतप्रिय बनाता है। आप त्यागी और दयालु व्यक्ति हो सकते हैं। आपका संबंध दानगृह, कारागार जैसी जगहों से हो सकता है। आप गुप्त रीति से धन संचय करते हैं। गुप नौकरी या हल्के कामों से आपको लाभ होता है। आप अपने शत्रुओं को सहज पराजित कर सकते हैं। आप बडे-बडे दान और यज्ञ करने में रुचि ले सकते हैं।
आप जन समूह के नेता भी हो सकते हैं। आप वकील, वैरिस्टर या ज्योतिषी भी हो सकते हैं। आप कुछ ऐसे कामों से जुडा व्यवसाय भी कर सकते हैं लो आम लोगों की सोच से हटकर हो। यहाम स्थित शनि के कुछ अशुभफल भी कहे गए हैं। अतक आप कुछ हद तक निर्लज्ज या कठोर भी हो सकते हैं। झूठ और ठगी के माध्यम से धनार्जन कर सकते हैं।
आपके शरीर के किसी अंग में कष्ट रह सकता है या आप किसी एक अंग से हीन हो सकते हैं। आपको मांस मदिरा के सेवन न करने और कुसंगति से बचने की सलाह दी जाती है। आपको नेत्ररोग, उन्माद या रक्तविकार की परेशानी रह सकती है। फिजूलखर्ची न करें। स्वजनों से प्रेम करें और धन संग्रह करने के लिए सदैव प्रयासरत रहें जो जीवन में बडी तरक्की भी मिल सकती है।
यहां स्थित शनि आपको एकांतप्रिय बनाता है। आप त्यागी और दयालु व्यक्ति हो सकते हैं। आपका संबंध दानगृह, कारागार जैसी जगहों से हो सकता है। आप गुप्त रीति से धन संचय करते हैं। गुप नौकरी या हल्के कामों से आपको लाभ होता है। आप अपने शत्रुओं को सहज पराजित कर सकते हैं। आप बडे-बडे दान और यज्ञ करने में रुचि ले सकते हैं।
आप जन समूह के नेता भी हो सकते हैं। आप वकील, वैरिस्टर या ज्योतिषी भी हो सकते हैं। आप कुछ ऐसे कामों से जुडा व्यवसाय भी कर सकते हैं लो आम लोगों की सोच से हटकर हो। यहाम स्थित शनि के कुछ अशुभफल भी कहे गए हैं। अतक आप कुछ हद तक निर्लज्ज या कठोर भी हो सकते हैं। झूठ और ठगी के माध्यम से धनार्जन कर सकते हैं।
आपके शरीर के किसी अंग में कष्ट रह सकता है या आप किसी एक अंग से हीन हो सकते हैं। आपको मांस मदिरा के सेवन न करने और कुसंगति से बचने की सलाह दी जाती है। आपको नेत्ररोग, उन्माद या रक्तविकार की परेशानी रह सकती है। फिजूलखर्ची न करें। स्वजनों से प्रेम करें और धन संग्रह करने के लिए सदैव प्रयासरत रहें जो जीवन में बडी तरक्की भी मिल सकती है।
राहु विचार
आपकी कुण्डली में राहु मकर राशि में स्थित है। राहु पहले घर में स्थित
है। राहु की दृष्टि पांचवें, सातवें, नौवें घर पर है। चंद्र, गुरु, केतु
की पूर्ण दृष्टि राहु पर है।
इस भाव में स्थित राहू के मिश्रित फल कहे गए हैं। आप परोपकारी और धैर्यवान व्यक्ति हैं। यहां स्थित राहू आपके कद को ऊंचा बनाता है। आपका शरीर कभी रोगी तो कभी निरोगी रहता है। आपको धन की कमी नहीं रहेगी। कहीं न कहीं से किसी न किसी माध्यम से आपको धन की प्राप्ति होती रहेगी। आप दूसरे के धन अपने लिए प्रयोग करेंगे साथ ही उसी धन से दूसरों को भी लाभ पहुंचाना चाहेंगे।
आप अपने जीवन काल में विभिन्न भोगों का उपभोग करेंगे। आपका वेष लोगों में प्रभावशाली रहेगा। आप बडों से विनम्र व्यवहार करते हैं। आप छोटे स्तर में पैदा होकर भी बडा स्तर प्राप्त कर पाएंगे और लोगों की नजरों में श्रेष्ठता प्राप्त करेंगे। आप साहसिक कार्य करने में दक्ष हैं लेकिन हो सकता है कि शिक्षा में आपका ध्यान कम हो। फिर भी आप व्यवहारिक कामों में निपुण होंगे और दूसरों से अपना काम करवाने में समर्थ होंगे।
आप अपने वादे को पूरा करने में विश्वास रखते हैं। आप बुद्धिमान और व्यवहार कुशल व्यक्ति हैं लेकिन यहां स्थित राहू के कुछ अशुभ परिणाम भी कहे गए हैं अत: आपमें बेवजह शक करने की आदत हो सकती है। अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझने का भ्रम रह सकता है। आप चाहेंगे कि हर व्यक्ति आपके निर्देशानुसार आचरण करे। इसकारण आप लोगों की नजरों से गिर सकते हैं।
इस भाव में स्थित राहू के मिश्रित फल कहे गए हैं। आप परोपकारी और धैर्यवान व्यक्ति हैं। यहां स्थित राहू आपके कद को ऊंचा बनाता है। आपका शरीर कभी रोगी तो कभी निरोगी रहता है। आपको धन की कमी नहीं रहेगी। कहीं न कहीं से किसी न किसी माध्यम से आपको धन की प्राप्ति होती रहेगी। आप दूसरे के धन अपने लिए प्रयोग करेंगे साथ ही उसी धन से दूसरों को भी लाभ पहुंचाना चाहेंगे।
आप अपने जीवन काल में विभिन्न भोगों का उपभोग करेंगे। आपका वेष लोगों में प्रभावशाली रहेगा। आप बडों से विनम्र व्यवहार करते हैं। आप छोटे स्तर में पैदा होकर भी बडा स्तर प्राप्त कर पाएंगे और लोगों की नजरों में श्रेष्ठता प्राप्त करेंगे। आप साहसिक कार्य करने में दक्ष हैं लेकिन हो सकता है कि शिक्षा में आपका ध्यान कम हो। फिर भी आप व्यवहारिक कामों में निपुण होंगे और दूसरों से अपना काम करवाने में समर्थ होंगे।
आप अपने वादे को पूरा करने में विश्वास रखते हैं। आप बुद्धिमान और व्यवहार कुशल व्यक्ति हैं लेकिन यहां स्थित राहू के कुछ अशुभ परिणाम भी कहे गए हैं अत: आपमें बेवजह शक करने की आदत हो सकती है। अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझने का भ्रम रह सकता है। आप चाहेंगे कि हर व्यक्ति आपके निर्देशानुसार आचरण करे। इसकारण आप लोगों की नजरों से गिर सकते हैं।
केतु विचार
आपकी कुण्डली में केतु कर्क राशि में स्थित है। केतु सातवें घर में स्थित
है। केतु की दृष्टि ग्यारहवें, पहले, तीसरे घर पर है। राहु की पूर्ण
दृष्टि केतु पर है।
यहां स्थित केतू को केवल आर्थिक मामलों के लिए कुछ हद तक अच्छा माना गया है। अत: आपको धन का उत्तम सुख मिल सकता है, और लौटा हुआ धन स्थिर रहेगा। लेकिन अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल दाता कहा गया है। कहा गया है कि यहां स्थि केतू जातक को मतिमंद और मूर्ख बनाता है। जातक अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझता है।
जातक स्वयं के चरित्र को ध्यान में न रखकर दूसरों के चरित्र पर संदेह करता है। यहां स्थित केतू आपका अपमान करा सकता है। वैवाहिक सुख कम मिलता है। दुष्टों की संगति मिलती है। मित्रों से भी कष्ट मिलता है। यात्राएं कष्टकारी या असफल हो जाती हैं। आपको मार्ग संबंधी चिंताएं रहेंगी। आपका धन अधिक खर्च होगा।
कई मामलों में आपका धन बेकार में नष्ट हो जाएगा। आपको आर्थिक चिंता रह सकती है। पिता के द्वारा संचित धन जल्दी नष्ट हो जाता है। शत्रुओं का भय रहता है और शत्रुओं के द्वारा धन हानि भी होती है। सरकार से भी भय बना रहता है। वात रोग, अंतडियों के रोग और वीर्य संबंधी रोग हो सकते हैं। आपको जल के माध्यम से भी भय बना रहेगा।
यहां स्थित केतू को केवल आर्थिक मामलों के लिए कुछ हद तक अच्छा माना गया है। अत: आपको धन का उत्तम सुख मिल सकता है, और लौटा हुआ धन स्थिर रहेगा। लेकिन अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल दाता कहा गया है। कहा गया है कि यहां स्थि केतू जातक को मतिमंद और मूर्ख बनाता है। जातक अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा समझता है।
जातक स्वयं के चरित्र को ध्यान में न रखकर दूसरों के चरित्र पर संदेह करता है। यहां स्थित केतू आपका अपमान करा सकता है। वैवाहिक सुख कम मिलता है। दुष्टों की संगति मिलती है। मित्रों से भी कष्ट मिलता है। यात्राएं कष्टकारी या असफल हो जाती हैं। आपको मार्ग संबंधी चिंताएं रहेंगी। आपका धन अधिक खर्च होगा।
कई मामलों में आपका धन बेकार में नष्ट हो जाएगा। आपको आर्थिक चिंता रह सकती है। पिता के द्वारा संचित धन जल्दी नष्ट हो जाता है। शत्रुओं का भय रहता है और शत्रुओं के द्वारा धन हानि भी होती है। सरकार से भी भय बना रहता है। वात रोग, अंतडियों के रोग और वीर्य संबंधी रोग हो सकते हैं। आपको जल के माध्यम से भी भय बना रहेगा।
|| नक्षत्र ||
नक्षत्र क्या है?
|
| हिन्दू ज्योतिष में नक्षत्रों का विशेष महत्व है। आकाश को यदि 27 (कभी-कभी 28) बराबर भागों में विभाजित किया जाए, तो प्रत्येक भाग एक नक्षत्र कहलाता है। हर नक्षत्र को बराबर-बराबर चार पदों में भी विभाजित किया गया है। ज्योतिष की अवधारणा के अनुसार हर पद एक अक्षर को इंगित करता है। प्रायः किसी व्यक्ति के जन्म के समय चन्द्रमा जिस पद में होता है, उससे जुड़े अक्षर से उस व्यक्ति का नाम रखा जाता है। |
आपका नक्षत्र रिपोर्ट
|
| आपका नक्षत्र रिपोर्ट :
आश्लेषा
आपका नक्षत्र चरण: 3 |
आश्लेषा नक्षत्र फल 'नक्षत्र फल बृहत जातक के अनुसार
|
| आप भाग्यशाली व हृष्ट-पुष्ट शरीर के स्वामी हैं और आपकी वाणी में
लोगों को मंत्र-मुग्ध करने की ग़ज़ब की शक्ति छुपी हुई है। संभव है कि आपको
बातचीत करना पसंद हो; किसी भी विषय पर आप घंटों बैठकर चर्चा कर सकते हैं।
आपका चेहरा वर्गाकार, मुख-मंडल बहुत सुन्दर और आँखें छोटी हैं। आपके चेहरे
पर कोई तिल अथवा दाग़-धब्बा हो सकता है। आपकी बुद्धिमानी और पहल करने की
क्षमता आपको हमेशा शीर्ष पर पहुँचने की प्रेरणा देती रहती है। अपनी
स्वतंत्रता में आपको किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं होता इसलिए
आपसे बात करते वक़्त इस बात का ख़ास ख़्याल रखा जाना चाहिए कि आपकी किसी भी
बात को काटा न जाए। आपमें एक विशेषता यह है कि जिन लोगों से आपकी पक्की
मित्रता होती है उनके हित के लिए आप किसी भी सीमा तक जा सकते हैं। कभी-कभी
आप उन व्यक्तियों के लिए कृतज्ञता व्यक्त करना भूल जाते हैं जिन्होंने आपकी
किसी-न-किसी रूप में मदद की होती है, ऐसी स्थिति में आपके सम्बन्ध बिगड़ने
की भी संभावना है। कभी-कभार आपका क्रोध करना भी लोगों को आपके ख़िलाफ़ कर
देता है इसलिए अपने क्रोध पर हमेशा क़ाबू रखना चाहिए। वैसे आप काफ़ी मिलनसार
हैं। आप किसी भी संकट का पूर्वानुमान लगाने में कुशल हैं इसलिए आप पहले से
ही हर संकट या समस्या का हल खोज कर रखते हैं। आँखें मूंद कर किसी पर
विश्वास कर लेना आपकी फ़ितरत नहीं है इसलिए आप अक्सर धोखा खाने से बच जाते
हैं। स्वादिष्ट और राजसी भोजन करना आपको पसंद है परन्तु मादक पदार्थों के
सेवन से हमेशा बचना चाहिए। आपका मन निरंतर किसी न किसी उधेड़बुन में लगा
रहता है और आप रहस्यमय ढंग से कार्य करना पसंद करते हैं। अपने शब्दों के
जादू से लोगो को वश में करने में आप माहिर हैं इसलिए आप राजनीति के क्षेत्र
में विशेष सफल हो सकते हैं। वैसे भी आपमें नेतृत्व तथा शिखर पर पहुँचने के
पैदायशी गुण छुपे हुए हैं। शारीरिक मेहनत की बजाय आप दिमाग़़ से ज़्यादा
कार्य करेंगे। लोगों से घनिष्ठता आप तब तक बनाये रखेंगे जब तक आपको लाभ
मिलता रहेगा। किसी भी व्यक्ति को परखकर अपना काम निकालने में आप माहिर हैं
और एक बार जो निश्चय कर लेंगे तो उस पर अटल रहेंगे। भाषण कला में भी आप
प्रवीण हैं, जब आप बोलना शुरू करते हैं तो अपनी बात पूरी करके ही शब्दों को
विराम देते हैं। शिक्षा और आय : आप अच्छे लेखक हैं। अगर आप अभिनय के क्षेत्र में जाते हैं तो सफल अभिनेता बन सकते हैं। कला अथवा वाणिज्य के क्षेत्र में भी आप जा सकते हैं और नौकरी की बजाय व्यवसाय में अधिक सफल हो सकते हैं। अतः संभव है कि आप अधिक समय तक नौकरी न करें। यदि नौकरी करेंगे तो साथ-ही-साथ किसी व्यवसाय से भी जुड़े रह सकते हैं। भौतिक दृष्टि से आप काफ़ी समृद्ध होंगें तथा धन-दौलत से परिपूर्ण होंगे। कीटनाशक और विष सम्बन्धी व्यवसाय, पेट्रोलियम उद्योग, रसायन शास्त्र, सिगरेट व तम्बाकू सम्बन्धी व्यवसाय, योग प्रशिक्षक, मनोविज्ञान, साहित्य, कला व पर्यटन से जुड़े कार्य, पत्रकारिता, लेखन, टाइपिंग, वस्त्र निर्माण, नर्सिंग, स्टेशनरी के सामान उत्पादन और बिक्री करके सफल होने की अधिक संभावना है। पारिवारिक जीवन : आपका कोई साथ दे या न दे, परन्तु भाइयों से पूरा सहयोग मिलेगा। आप परिवार में सबसे बड़े हो सकते हैं और परिवार में बड़ा होने के कारण परिवार की सारी ज़िम्मेदारी आप पर होने की संभावना है। जीवनसाथी की कमियों को अनदेखा करना ही उचित है अन्यथा वैचारिक मतभेद रह सकते हैं। आपका स्वभाव और व्यवहार सभी का मन मोह लेने वाला होगा। अगर इस नक्षत्र के अंतिम चरण में आपका जन्म हुआ है तो आप बहुत भाग्यशाली होंगे। |
|| राशि क्या है? ||
वैदिक ज्योतिष के अनुसार राशि
कर्क
|
कर्क राशि में रविवार, मंगलवार, सोमवार में लाभ, बुधवार में हानि। कफ वात रोगा, गोरा रंग , तीन बार अल्प मृत्यु। 2,8,21,29 में रोग। टेढे व पतले पैर, दो भर्या, जलोदर रोग। कमर, माथे व पैर में घाव या ग्रन्थि (गांठ) से पीड़ा। नजर की कमजोरी, कठोर वाक्य, नीच जनों से प्रेम, शुक्रवार में होनि। काली वस्तुओं के कष्ट , सफेद व लाल वस्तुओं से अधिक लाभ। 8 वर्ष में वर्षा, हवा, जल से भय, गन्ध से लाभ। कर्क लग्न, मकर गत चन्द्रमा या संक्रांति के दिन जो वस्तु ले वह दुगुनी हो जाए। वात-कष्टी, हानि पाने वाला, पूर्व उत्तर में गृहद्वार, 48 या 84 में मृत्यु होती है। यो रोमक मत है। जवानी में दरिद्र, मध्यावस्था में सुखी। 3.7 वर्ष में ज्वरपीड़ा। चन्द्र वर्षेश होने पर जलभय लेकिन गन्ध पदार्थो से लाभ । 3 वर्ष में वामांग में अग्निभय। लिंग पर तिल, सिर रोगी , सुखी। 32 में अल्पमृत्यु। 29 में सर्पभय। माघ शुक्ल व शुक्रवार हस्त नक्षत्र में परेशानी से मृत्यु पाता है। यह यवन मत है। 4.8.12 वर्ष में सिर, कान व आँख में फोड़े। त्रिदोष भय।16.24 वर्ष में लकड़ी, जल, भूत, पर्वत भय, गुप्तांग पीड़ा। 36 वर्ष में विष, चोर, पत्थर, जल से भय। सुन्दर नेत्र, स्त्रीवशी, उद्यान व कृषिकर्ता, कार्य कुशल लेकिन भीरू होता है |
|| लाल किताब ग्रह, घर एवं कुण्डली ||
लाल किताब ग्रह स्थिति |
| ग्रह | राशि | स्थिति | सोया | किस्मत जगानेवाला | मंदा/नेक |
|---|---|---|---|---|---|
| सूर्य | धनु | मित्र | हाँ | नहीं | नेक / शुभ |
| चंद्र | तुला | सम | नहीं | नहीं | नेक / शुभ |
| मंगल | सिंह | मित्र | हाँ | नहीं | नेक / शुभ |
| बुध | धनु | सम | हाँ | नहीं | मंदा / अशुभ |
| गुरु | तुला | शत्रु | नहीं | नहीं | मंदा / अशुभ |
| शुक्र | धनु | सम | हाँ | नहीं | मंदा / अशुभ |
| शनि | मीन | सम | हाँ | नहीं | नेक / शुभ |
| राहु | मेष | --- | नहीं | नहीं | मंदा / अशुभ |
| केतु | तुला | --- | नहीं | नहीं | नेक / शुभ |
ग्रहो के घर की स्थिति |
| खाना सं. | मालिक | पक्काघर | किस्मत | सोया | उच्च | नीच |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | मंगल | सूर्य | मंगल | --- | सूर्य | शनि |
| 2 | शुक्र | गुरु | चंद्र | हाँ | चंद्र | --- |
| 3 | बुध | मंगल | बुध | नहीं | राहु | केतु |
| 4 | चंद्र | चंद्र | चंद्र | हाँ | गुरु | मंगल |
| 5 | सूर्य | गुरु | सूर्य | हाँ | --- | --- |
| 6 | बुध | बुध केतु | केतु | नहीं | बुध राहु | शुक्र केतु |
| 7 | शुक्र | शुक्र बुध | शुक्र | हाँ | शनि | सूर्य |
| 8 | मंगल | मंगल शनि | चंद्र | हाँ | --- | चंद्र |
| 9 | गुरु | गुरु | शनि | नहीं | केतु | राहु |
| 10 | शनि | शनि | शनि | नहीं | मंगल | गुरु |
| 11 | शनि | शनि | गुरु | --- | --- | --- |
| 12 | गुरु | गुरु राहु | राहु | --- | शुक्र केतु | बुध राहु |
लाल किताब कुण्डलीआपके लाल किताब कुंडली पर आधारित ऋण
पूर्वजों के ऋण
लाल किताब के अनुसार ऋण कुण्डली की बहुत बडी कमजोरी माने जाते हैं।
पूर्वजों का ऋण मतलब अपने पूर्वजों और पितरों के द्वारा किए गए पापों से
प्रभावी होगा। दूसरे शब्दों में किसी और के द्वारा की गई गलतियों की सजा
रिश्तेदारों को भुगतनी या वहन करनी पडती। यदि किसी की कुण्डली में वास्तव
में ऋण होते हैं तो जैसे किसी एक की कुण्डली में दिखता है वैसे ही अन्य
रिश्तेदारों की कुण्डली में भी पाया जाता है।
सामान्यत: पूरा परिवार ही ऋण से प्रभावित होता है। इसलिए इनके उपाय पूरे परिवार के सहयोग से करेने पडते हैं। यदि किसी की कुण्डली में ग्रह राजयोग का निर्माण कर रहे हों और वही ग्रह ऋण संबंधी योग का गठन भी कर रहे हों तो केवल बुरे फल ही मिलते हैं।
पितृ ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब किसी कुण्डली में शुक्र, बुध या
राहू दूसरे, पांचवें, नौवें अथवा बारहवें भाव में हों तो जातक पितॄ ऋण से
पीडित होता है।
कारण: घर पितरो या बडों ने पारिवारिक पुजारी बदला होगा। संकेत: घर के पास में किसी मंदिर में तोड फोड हुई होगी या कोई पीपल का पेट काटा गया होगा। उपाय: 1. परिवार के सभी सदस्यों से सिक्के के रूप में पैसे इकट्ठा करें और किसी दिन पूरे पैसे मंदिर में दान कर दें। 2. यदि आपके पडोस या घर में कोई पीपल का पेड हो तो उसे पानी दें और उसकी सेवा करें। परिणाम: आपकी कुंडली पितृ ऋण से मुक्त है|
स्वय ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब किसी की कुण्डली में शुक्र, शनि,
राहु या केतु पाँचवें भाव में स्थित हों, तो जातक स्वयं के ऋण से पीडित
माना जाता।
कारण: आपके पूर्वजों या पितरो नें परिवार के रीति-रिवाज़ों और परम्पराओं को नहीं माना होगा अथवा उन्होंने परमात्मा पर विश्वास नहीं किया होगा। संकेत: घर के नीचे आग की भट्ठियां होंगी या छ्त में सूर्य की रोशनी आने के लिए बहुत सारे छेद होंगे। उपाय: 1. सभी संबंधियों के सहयोग से बराबर-बराबर पैसे इकट्ठा करके यज्ञ कराना चाहिए। परिणाम: आपकी कुंडली स्वय ऋण से मुक्त है|
मातृ ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब केतू कुण्डली के चौथे भाव में हो तो कुण्डली को मातृ ऋण से प्रभावित या ग्रसित माना जाता है।
कारण: इस तथ्य के पीछे कारण यह हो सकता है कि आपके पूर्वजों ने किसी मां को उपेक्षित किया हो या उसके साथ अत्याचार किया हो अथवा बच्चे के जन्म के बाद मां को उसके बच्चे से दूर रखा हो, या हो सकता है कि किसी माँ की उदासी को अनदेखा किया हो। संकेत: पास के कुंए या नदी की पूजा करने के बजाय उसे गंदगी और कचरा डालने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा होगा। उपाय: 1. अपने सभी रक्त (सगे) संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में चांदी लेकर किसी नदी में बहाएं। यह काम एक ही दिन करना है। परिणाम: आपकी कुंडली मातृ ऋण से मुक्त है|
पत्नी ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब सूर्य, चन्द्र या राहु कुण्डली के
दूसरे अथवा सातवें भाव में हो, तो कुण्डली को स्त्री-ऋण से ग्रसित माना
जाता है।
कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि आपके पूर्वजों या बडे बुजुर्गों नें किसी लालच के कारण किसी गर्भवती महिला की हत्या कर दी होगी। संकेत: घर में ऐसे जानवर होंगे जो दांत वाले हों जैसे कि गाय अथवा ऐसे जानवर जो समूह में न रहते हों। उपाय: 1. अपने सभी रक्त (सगे) संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में पैसे लेकर उससे 100 गायों को स्वादिष्ट चारा खिलाएं। यह काम एक ही दिन करना है। परिणाम: आपकी कुण्डली स्त्री ऋण से मुक्त है।
सम्बंधी ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब बुध और केतू कुण्डली के पहले अथवा आठवें भाव में हो, तो कुण्डली को सम्बंधी-ऋण से ग्रसित माना जाता है।
कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि आपके पूर्वजों ने किसी की फसल या घर में आग लगाई हो, किसी को जहर दिया हो अथवा किसी की गर्भवती भैंस को मार डाला हो। संकेत: घर में किसी बच्चे के जन्मदिन, त्यौहारों या अन्य उत्सवों के समय अपने परिवार से दूर रहना अथवा रिश्तेदारों से न मिलना इस दोष के संकेतक हैं। उपाय: 1. अपने सभी रक्त (सगे) संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में पैसे लेकर उसे दूसरों की मदद के लिए किसी चिकित्सक को दें। 2. अपने सभी रक्त (सगे) संबंधियों से बराबर-बराबर मात्रा में पैसे लेकर उससे दवाएं खरीद कर धर्मार्थ संस्थाओं को दें। परिणाम: आपकी कुण्डली सम्बंधी ऋण से मुक्त है।
पुत्री ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब चन्द्रमा कुण्डली के तीसरे या छठे भाव में हो, तो जातक को पुत्री ऋण से पीडित माना जाता है।
कारण: पूर्वजों या पितरों के द्वारा किसी की बहन या बेटी की हत्या की गई होगी या उन्हें परेशान किया गया होगा। संकेत: खोए हुए बच्चों को बेचना या उससे लाभ कमाने का प्रयास किया गया हो। उपाय: 1. सारे सम्बंधी पीले रंग की कौड़ियाँ खरीद कर, एक जगह इकट्ठी करके जलाकर राख कर दें और उस राख को उसी दिन नदी में बहा दें। परिणाम: आपकी कुण्डली पुत्री ऋण से मुक्त है।
जालिमाना ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब सूर्य, चन्द्रमा, मंगल कुण्डली के
दसवें और ग्यारहवें भाव में हो, तो जातक को जालिमाना -ऋण से ग्रसित माना
जाता है।
कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि आपके पूर्वजों या पितरों ने किसी से धोखा किया होगा या उसे घर से बाहर निकाल दिया होगा और उसे गुजारे के लिए कुछ नही दिया होगा। संकेत: घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में होगा अथवा घर की जमीन किसी ऐसे व्यक्ति से ली गई होगी जिसके पुत्र न हो या घर किसी सडक या कुएं के ऊपर निर्मित होगा। उपाय: 1. अलग-अलग जगह की सौ मछलियों या मज़दूरों को सभी परिजन धन इकट्ठा करके एक दिन में भोजन कराएँ। परिणाम: आपकी कुण्डली जालिमाना ऋण से मुक्त है।
अजन्मा ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब किसी कुण्डली में सूर्य, शुक्र, मंगल बारहवें भाव में हो, तो जातक इस अजात-ऋण का भागी कहलाता है।
कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि आपके पूर्वजों या पितरों ने ससुराल-पक्ष के लोगों को धोखा दिया होगा या किसी रिश्तेदार के परिवार के विनाश में भूमिका निभाई होगी। संकेत: दरवाजे के नीचे कोई गंदा नाला बह रहा होगा या कोई विनाशित श्मशान होगा अथवा घर की दक्षिणी दीवार से जुडी कोई भट्ठी होगी। उपाय: 1. सभी परिजनों से एक-एक नारियल लेकर उन्हें एक जगह इकट्ठा करें और उसी दिन नदी में प्रवाहित कर दें। परिणाम: आपकी कुण्डली अजन्मा ऋण से मुक्त है।
कुदरती ऋण
लक्षण : लाल किताब के अनुसार जब चन्द्रमा, मंगल कुण्डली के छठे भाव में स्थित हों, तो जातक इस कुदरती ऋण से ग्रसित माना जाता है।
कारण: इसका कारण यह हो सकता है कि आपके पूर्वजों या पितरों ने किसी कि बेबस कुत्ते की तरह तहस नहस किया होगा। संकेत: किसी कुत्ते को गोली से मारना, दूसरे के बेटे को मारना अथवा या भतीजे से इतना कपट करना कि वह पूरी तरह बर्बाद हो जाय। उपाय: 1. एक दिन में सभी परिजनों के सहयोग से सौ कुत्तों को मीठा दूध या खीर खिलानी चाहिए। 2. अपने पास में रहने वाली उस विधवा स्त्री की सेवा करके उससे आशीर्वाद प्राप्त करना करें जो कम उम्र में ही विधवा हुई हो। परिणाम: आपकी कुण्डली कुदरती ऋण से मुक्त है। |
=''''जोतिष श्री हरिप्रसाद जोशी `````

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