लटैनाथ मल्लिकार्जुन

Friday, 17 April 2020

हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म, सिख धर्म, नेपाल और भारत में इतिहास



  ज्योतिष हरिप्रसाद जोशी
 

हिंदू धर्म
 नेपाल और भारत की ज्यादातर आबादी  हिंदू धर्म का पालन करता है जो इन देशो का सबसे प्राचीन धर्म है। सन् 2011 की नेपाल की जनगणना में, लगभग 81.3 प्रतिशत नेपाली हिंदू धर्म का पालन करते हैं।  वहीं भारत में सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 80 प्रतिशत भारतीय हिंदू धर्म का पालन करते हैं। इस धर्म को मानने वाले इसे सनातन धर्म भी कहते हैं। नेपाल में   "ने" नाम के एक हिंदू ऋषि ने प्रागैतिहासिक काल के दौरान खुद को काठमांडू की घाटी में स्थापित किया, और उन्होंने बागमती और बिष्णुमती नदियों के संगम, टेकू में धार्मिक अनुष्ठान किया। और  भारत में इस नाम को महात्मा गांधी ने लोकप्रिय बनाया। हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामायण और भगवद गीता हैं। हिंदू लोग वेदों और उनपिषदों के सिद्धांतों का अभ्यास करते हैं। उनके पूजा स्थल को मंदिर या देवस्थान कहा जाता है। ये लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं जिसे भगवान का प्रतिबिंब माना जाता है। लेकिन वह हिंदू जो आर्य समाज के हैं, वो मूर्ति पूजा नहीं करते हैं। हिंदू धर्म में प्रतीकों की एक व्यवस्था है जैसे स्वास्तिक का चिन्ह शुभ का प्रतीक है और ओम परम ब्रम्ह का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कई हिंदू त्यौहार हैं, जैसे दीपावली, होली, बिहू, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और अन्य जो देश में मनाए जाते हैं। 

इस्लाम 
नेपाल में  मुसलमानों की आबादी करीब 4.4 प्रतिशत था। भारत में सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 13 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है और इसका पालन करने वालों को मुसलमान कहा जाता है। यह उप वर्गों में बंटा है जिनमें सबसे प्रसिद्ध शिया और सुन्नी हैं। मुस्लिमों की पवित्र पुस्तक कुरान है और ये पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का पालन करते हैं। इस्लाम में मक्का में की जाने वाली सालाना तीर्थयात्रा हज है जो शारीरिक और आर्थिक रुप से सक्षम हर मुस्लिम को जीवन में एक बार करनी होती है। भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख इस्लामी त्यौहारों में ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा और मुहर्रम हैं। 

सिख धर्म

गुरु नानक ने 15 वीं सदी में पंजाब क्षेत्र में सिख धर्म की स्थापना की थी। सिखों की पवित्र किताब गुरु ग्रंथ साहिब है जो गुरु के लेखन का संग्रह है। नेपाल वैसे तो एक हिंदू बहुल देश है, मगर वहाँ दूसरे कई धर्मों के लोग भी रहते हैं. इनमें सिख भी शामिल हैं. मगर उनकी आबादी लगातार घट रही है , 2011 में 0.2% सिख थे,
 सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी का 2 प्रतिशत हिस्सा सिर्ख धर्म के लोगों का है। सिख धर्म में कोई विशेष त्यौहार नहीं होते हैं लेकिन कुछ आमतौर पर मनाए जाते हैं, जैसे गुरुओं का जन्मदिन या शहादत दिवस। गुरुपूरब, बैसाखी, नगर कीर्तन, होला मौहल्ला आदि कुछ त्यौहार हैं जो सिख लोग मनाते हैं। सिखों के धार्मिक विश्वासों में उपवास या तीर्थ करना शामिल नहीं है। भारत में ज्यादातर सिख पंजाब में रहते हैं और इनके समुदाय बड़ी संख्या में पड़ोसी राज्यों में रहते हैं।

बौद्ध धर्म
 नेपाल  में बौद्ध धर्म की स्थापना सिद्धार्थ गौतम ने की थी जिन्हें ‘बुद्ध’ भी कहा जाता है। 
2012 की नेपाल में हुई जनगणना के अनुसार बौद्धों की जनसंख्या 10.7 से घटकर 9 प्रतिशत रह गया था। और भारत में बौद्ध लोग भारत की आबादी का सिर्फ 1 प्रतिशत हैं। ये लोग संसार, कर्म और पुनर्जन्म मेें विश्वास रखते हैं और बुद्ध की शिक्षा का पालन करते हैं। बौद्ध भक्ति प्रथाओं में तीर्थयात्रा, झुकना और जप करना और प्रसाद शामिल हैं। बुद्ध का जन्मदिन जिसे वेसक भी कहते हैं, असालह पूजा दिवस, मघा पूजा दिवस और लाॅय रोथोंग बौद्ध धर्म के कुछ त्यौहार हैैं।

ईसाई धर्म
ईसाइयों की तादाद 1.5 फीसदी थी। हालांकि ईसाईसमूहों का कहना है कि इस समय देश में ईसाई धर्म को माननेवालों की आबादी 3 लाख पहुंच चुकी है। 1990 में बहुदलीय लोकतंत्र की शुरुआत के बाद, और धर्मांतरण पर प्रतिबंधों की छूट के बाद, नेपाली चर्च तेजी से विकसित होने लगा। ईसाई धर्म का विस्तार नेपाल में एक विवादास्पद विषय है, और नेपाली ईसाई छिटपुट हिंसा और व्यापक सामाजिक बहिष्कार के अधीन रहे हैं। नेपाली मीडिया और राजनीतिक प्रवचन में अक्सर यह दावा किया जाता है कि मिशनरियों को बदलने के लिए घटिया सामग्री प्रोत्साहन की पेशकश की जाती है, लेकिन शोध से संकेत मिलता है कि अधिकांश नेपाली ईसाई मिशनरियों के संपर्क के अलावा अन्य कारणों से धर्मांतरण करते हैं। भारत में ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार भारत में ईसाई धर्म लगभग 2000 साल पहले आया। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 2.3 प्रतिशत ईसाई धर्म से है। ईसाई आबादी पूरे देश में पाई जाती है, लेकिन ज्यादातर दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और कोंकण तट के इलाकों में रहती है। ईसाई लोग ईसा मसीह में विश्वास रखते हैं और उन्हीं की पूजा करते हैं। उन्हें वे मानवता का रक्षक और परमेश्वर का पुत्र मानते हैं। ईसाइसों का मुख्य त्यौहार क्रिसमस है। गुड फ्राइडे, आॅल साॅल्स डे और ईस्टर कुछ ऐसे त्यौहार हैं, जो इस धर्म के लोग भारत में मनाते हैं। 

हम यह सब देखकर समझ नहीं पा रहे हैं क्या हो रहा है? इसमें हंसना चाहिए और रोना कुछ समझ में नहीं आ रहे,, इतिहास है और क्या।।


Wednesday, 15 April 2020

ज्योतिष शास्त्र 12 तरह की विधाओं से जाना जा‍ता है भविष्य।




ज्योतिषाचार्य श्री हरीप्रसाद जोशी






 12 तरह की विधाओं से जाना जा‍ता है भविष्य।

हमारे  ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग तरीके से भाग्य या भविष्य बताया जाता है। नेपाल, भारत, जैसे देशों में लगभग 180 से ज्यादा ज्योतिष विद्या प्रचलित हैं। प्रत्येक विद्या आपके भविष्य को बताने का दावा करती है। माना यह ‍भी जाता है कि प्रत्येक विद्या भविष्य बताने में सक्षम है, लेकिन उक्त विद्या के जानकार कम ही मिलते हैं, जबकि भटकाने वाले ज्यादा। मन में सवाल यह उठता है कि आखिर किस विद्या से जानें हम अपना भविष्य, तो यहाँ प्रस्तुत है कुछ प्रचलित ज्योतिष विद्याओं की जानकारी।
 
1. कुंडली ज्योतिष :- यह कुंडली पर आधारित विद्या है। इसके तीन भाग है- सिद्धांत ज्योतिष, संहिता ज्योतिष और होरा शास्त्र। इस विद्या के अनुसार व्यक्ति के जन्म के समय में आकाश में जो ग्रह, तारा या नक्षत्र जहाँ था उस पर आधारित कुंडली बनाई जाती है। बारह राशियों पर आधारित नौ ग्रह और 27 नक्षत्रों का अध्ययन कर जातक का भविष्य बताया जाता है। उक्त विद्या को बहुत से भागों में विभक्त किया गया है, लेकिन आधुनिक दौर में मुख्यत: चार माने जाते हैं। ये चार निम्न हैं- नवजात ज्योतिष, कतार्चिक ज्योतिष, प्रतिघंटा या प्रश्न कुंडली और विश्व ज्योतिष विद्या।
 
2. लाल किताब की विद्या :- यह मूलत: उत्तरांचल, हिमाचल और कश्मीर क्षेत्र की विद्या है। इसे ज्योतिष के परंपरागत सिद्धांत से हटकर 'व्यावहारिक ज्ञान' माना जाता है। इसे बहुत ही कठिन विद्या माना जाता है। इसके अच्‍छे जानकार बगैर कुंडली को देखे उपाय बताकर समस्या का समाधान कर सकते हैं। उक्त विद्या के सिद्धांत को एकत्र कर सर्वप्रथम इस पर एक ‍पुस्तक प्रकाशित की थी जिसका नाम था लाल किताब मान्यता अनुसार उक्त किताब को उर्दू में लिखा गया था इससे इसके बारे में भ्रम उत्पन्न हो गया।
 
3. गणितीय ज्योतिष :- इस भारतीय विद्या को अंक विद्या भी कहते हैं। इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि के अंक निर्धारित हैं। फिर जन्म तारीख, वर्ष आदि के जोड़ अनुसार भाग्यशाली अंक और भाग्य निकाला जाता है।

4. नंदी नाड़ी ज्योतिष :- यह मूल रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित विद्या है जिसमें ताड़पत्र के द्वारा भविष्य जाना जाता है। इस विद्या के जन्मदाता भगवान शंकर के गण नंदी हैं इसी कारण इसे नंदी नाड़ी ज्योतिष विद्या कहा जाता है।
 
5. पंच पक्षी सिद्धान्त :- यह भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इस ज्योतिष सिद्धान्त के अंतर्गत समय को पाँच भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग का नाम एक विशेष पक्षी पर रखा गया है। इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई कार्य किया जाता है उस समय जिस पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप उसका फल मिलता है। पंच पक्षी सिद्धान्त के अंतर्गत आने वाले पाँच पक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर। आपके लग्न, नक्षत्र, जन्म स्थान के आधार पर आपका पक्षी ज्ञात कर आपका भविष्य बताया जाता है।
 
6. हस्तरेखा ज्योतिष :- हाथों की आड़ी-तिरछी और सीधी रेखाओं के अलावा, हाथों के चक्र, द्वीप, क्रास आदि का अध्ययन कर व्यक्ति का भूत और भविष्य बताया जाता है। यह बहुत ही प्राचीन विद्या है और भारत तथा   नेपाल के सभी राज्यों में प्रचलित है।

7. नक्षत्र ज्योतिष :- वैदिक काल में नक्षत्रों पर आधारित ज्योतिष विज्ञान ज्यादा प्रचलित था। जो व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता था उसके उस नक्षत्र अनुसार उसका भविष्य बताया जाता था। नक्षत्र 27 होते हैं। 
 
8. अँगूठा शास्त्र :- यह विद्या भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसके अनुसार अँगूठे की छाप लेकर उस पर उभरी रेखाओं का अध्ययन कर बताया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा होगा।
 
9. सामुद्रिक विद्या:- यह विद्या भी भारत की सबसे प्राचीन विद्या है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के चेहरे, नाक-नक्श और माथे की रेखा सहित संपूर्ण शरीर की बनावट का अध्ययन कर व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को बताया जाता है।
 
10. चीनी ज्योतिष :- चीनी ज्योतिष में बारह वर्ष को पशुओं के नाम पर नामांकित किया गया है। इसे ‘पशु-नामांकित राशि-चक्र’ कहते हैं। यही उनकी बारह राशियाँ हैं, जिन्हें 'वर्ष' या 'सम्बन्धित पशु-वर्ष' के नाम से जानते हैं। यह वर्ष निम्न हैं- चूहा, बैल, चीता, बिल्ली, ड्रैगन, सर्प, अश्व, बकरी, वानर, मुर्ग, कुत्ता और सुअर। जो व्यक्ति जिस वर्ष में जन्मा उसकी राशि उसी वर्ष अनुसार होती है और उसके चरित्र, गुण और भाग्य का निर्णय भी उसी वर्ष की गणना अनुसार माना जाता है।
 
11. वैदिक ज्योतिष :-  वैदिक ज्योतिष अनुसार राशि चक्र, नवग्रह, जन्म राशि के आधा‍र पर गणना की जाती है। मूलत: नक्षत्रों की गणना और गति को आधार बनाया जाता है। मान्यता अनुसार वेदों का ज्योतिष किसी व्यक्ति के भविष्य कथक के लिए नहीं, खगोलीय गणना तथा काल को विभक्त करने के लिए था।
 
12. टैरो कार्ड :- टैरो कार्ड में ताश की तरह पत्ते होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपना भविष्य या भाग्य जानने के लिए टैरो कार्ड के जानकार के पास जाता है तो वह जानकार एक कार्ड निकालकर उसमें लिखा उसका भविष्य बताता है।
 
यह उसी तरह हो सकता है जैसा की पिंजरे के तोते से कार्ड निकलवाकर भविष्य जाना जाता है। यह उस तरह भी है जैसे कि बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन पर एक मशीन लगी होती है जिसमें एक रुपए का सिक्का डालो और जान लो भविष्य। किसी मेले या जत्रा में एक कम्प्यूटर होता है जो आपका भविष्य बताता है।
 
उपरोक्त विद्या जुए-सट्टे जैसी है यदि अच्छा कार्ड लग गया तो अच्छी भविष्यवाणी, बुरा लगा तो बुरी और सामान्य लगा तो सामान्य। हालाँकि टैरो एक्सपर्ट मनोविज्ञान को आधार बनाकर व्यक्ति का चरित्र और भविष्य बताते हैं। अब इसमें कितनी सच्चाई होती है यह कहना मुश्किल है।
 
इसके अलावा माया, हेलेनिस्टिक, सेल्टिक, पर्शियन या इस्लामिक, बेबिलोनी आदि अनेक ज्योतिष धारणाएँ हैं। हर देश की अपनी अलग ज्योतिष धारणाएँ हैं और अलग-अलग भविष्यवाणियाँ।

नोट: लटैनाथ मालिकार्जुन ज्योतिषालय‌ में केवल, कुंडली ज्योतिष, लाल किताब की विद्या, गणितीय ज्योतिष,हस्तरेखा ज्योतिष ,नक्षत्र ज्योतिष,अँगूठा शास्त्र, ज्योतिष विद्या के आधार पर  कार्य किया जाता है।

Sunday, 12 April 2020

Donate Now, help us support covid-19 hit families





Poor labour emergency relief fund....

Millions of Indians, Nepalese living in the rural areas are at great risk of contracting the corona virus because of lack of awareness and their poor living conditions. Due to the ongoing lockdown and stay home advisory from the government, the poor and daily wage labourers are suffering with no income and struggling to meet their daily needs.

The Latinath Mallikarjuna astrologicals is helping them with much needed Hygiene & Dry Ration Relief Supplies. We request individuals & companies to come forward and support our relief efforts.
For some our Laborers, sister and brother, there is no arrangement eating and drinking, Please make a donation now.

लाखों भारतीय, नेपाली, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में जागरूकता की कमी और उनके खराब रहने की स्थिति के कारण कोरोना वायरस के संकुचन का काफी खतरा है। सरकार की ओर से जारी तालाबंदी और घरेलू सलाह के कारण गरीब और दिहाड़ी मजदूर बिना किसी आय के पीड़ित हैं और अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
लीटैनाथ मल्लिकार्जुन ज्योतिषालय, उन्हें बहुत आवश्यक स्वच्छता और सूखी राशन राहत आपूर्ति में मदद कर रहा है। हम व्यक्तियों और कंपनियों से अनुरोध करते हैं कि वे आगे आएं और हमारे राहत प्रयासों का समर्थन करें। कृपया अब एक दान करें।

सहायता राशी डाइरेक्ट बैंक खाते में जमा कर सकते हैं और UPI, code scan, Google pe, phone PE paytm,  द्वारा भी जमा कर सकते हैं.....

Poor labour emergency relief fund.
Account Holder Name: Hariorasad Joshi
Kotak Mahendra back
Account No.                :2312568012
IFSC code.                  :KKBK0008072
HSR layout Bangalore BRANCH
Phone pay, Number.  : 9380345899
UPI                             :9380345899@ybl

    hariprasad.joshi1988-3@okhdfcbank



Saturday, 11 April 2020

विक्रम संवत 2077 वार्षिक राशिफल: सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा नव संवत्सर 2077



प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरिप्रसाद जोशी

नव संवत्सर 2077 और वार्षिक राशिफल
 प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरिप्रसाद जोशी बता रहे हैं आपके लिए इस संवत्सर में राजा बुध और मंत्री चंद्रमा के संयोग का फल कैसा रहेगा, इसका ज्योतिषी विश्लेषण.

मेष राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी मंगल उच्चराशिगत होकर दशम कर्म भाव में बैठे हैं और साथ में शनिदेव भी विराजमान है कार्यक्षेत्र की दृष्टि से यह योग शुभ कहा जा सकता है किंतु माता पिता के स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा अतः इसका ध्यान रखें। पराक्रम भाव में राहु आपको अति साहसी, ऊर्जावान और उद्यमी बनाएंगे जिसके फलस्वरूप आप बड़े से बड़ा निर्णय अथवा कार्य बड़ी सहजता के साथ कर लेंगे।
  • अत्यधिक ऊर्जा के कारण आपको ज़िद एवं आवेश से बचना चाहिए और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों अथवा भाइयों से मतभेद ना होने पाए इसका ध्यान भी रखना चाहिए आरंभ से ही वृहस्पति आपके भाग्य भाव में बैठे हुए हैं जिनकी अमृत दृष्टि आपके ऊपर और आपके ज्ञान के ऊपर पड़ रही है, अतः शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता तो मिलेगी ही संतान संबंधी चिंता से मुक्ति भी मिलेगी।
  • नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव का भी योग बनेगा और विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी। यात्रा देशाटन का पूर्ण आनंद उठाएंगे विदेश यात्रा एवं विदेशी नागरिकता के लिए आवेदन आदि करना चाह रहे हों तो भी यह वर्ष आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है लाभ उठाएं। व्यापारिक वर्ग के लिए भी अत्यधिक उतार-चढ़ाव के बावजूद व्यापार लाभदायक रहेगा।

rashifal 2020
वृषभ राशि- 
  • वर्ष आरंभ से ही आपके राशि स्वामी शुक्र व्यय भाव में गोचर कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप आपके लिए वर्ष भागदौड़ अधिक कराएगा और विलासिता पर वह भी होगा। स्वास्थ्य विशेष करके बाई आंख का ध्यान रखना चाहिए। 29 मार्च बाद ही वृहस्पति आरती चारी होकर मकर राशि में चले जाएंगे जहां पर पहले से ही मंगल एवं शनि विराजमान है यहां पर वृहस्पति नीच राशि संज्ञक हो जाएंगे। अतः नौकरी में स्थान परिवर्तन एवं तनाव की संभावना बढ़ जाएगी इसलिए कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें जहां तक संभव हो झगड़े विवाद से बचते रहें।
  • राहु का उच्चराशिगत होकर धनभाव में होना आकस्मिक धन प्राप्ति के योग तो बनाएगा किंतु, परिवार में कलह का भी सामना करवाएगा। आपके लिए विशेष सलाह है कि कोई भी बात ऐसी ना बोले कि विवाद पैदा हो और कठोर शब्दों का प्रयोग करने से बचें। जून के अंतिम सप्ताह में पुनः वृहस्पति अपनी राशि में आकर आपकी राशि से अष्टम मृत्यु भाव में चले जाएंगे जिसके परिणाम स्वरूप कठोर परिश्रम का सामना तो करना पड़ेगा किंतु आपको मान सम्मान भी मिलेगा।
  • आपके द्वारा लिए गए निर्णय एवं किए गए कार्यों की सराहना भी होगी इनकी अमृत दृष्टि आपके व्यभाव, धन और पराक्रम भाव पर भी पड़ेगी अतः धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करेंगे। व्यापारिक वर्ग के लिए उतार-चढ़ाव अधिक आएगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छे अंक की प्राप्ति के लिए और प्रयास करने होंगे। सूर्यदेव का गोचर सरकारी कार्यो का निपटारा कराने में मदद करेगा यहांतककि सरकारी सर्विस हेतु आवेदन भी करना चाह रहे हों तो परिणाम आपके पक्ष में आने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
मिथुन राशि- 
  • आपकी राशि स्वामी बुध संवत्सर के आरंभ से ही भाग्य भाव में बैठे हुए हैं अतः वर्ष आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है कुछ महीने तक बुध का प्रभाव आपके लिए अति शुभ रहेगा अतः आपका व्यापारिक एवं आर्थिक पक्ष मजबूत होगा शासन सत्ता से संबंधित किसी भी कार्य का निपटारा करवाना हो तो प्रयास तेज करें उच्चाधिकारियों से अच्छे संबंध बनेंगे।
  • राहु पहले से ही आपकी राशि में विद्यमान है इसलिए यह संयोग भी आपको तीक्ष्ण बुद्धि वाला बनाएगा जिसके फलस्वरूप आपके लिए बड़े से बड़ा कार्य अथवा निर्णय लेना आपके लिए सहज हो जाएगा साथ ही आपकी राशि से सप्तम भाव में बैठे वृहस्पति की पूर्ण दृष्टि भी आपके ऊपर पड़ रही है जिसके प्रभाव स्वरूप शादी विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव का भी योग बनेगा। ससुराल पक्ष से रिश्ते मजबूत बनेंगे। यदि आप व्यापारी हैं तो भी आपके लिए यह संयोग अतिशुभ साबित होगा।
  • काफी दिनों से रुका हुआ आपका धन वापस मिलेगा किंतु कोर्ट कचहरी के मामले बाहर ही निपटा लें तो बेहतर रहेगा क्योंकि अष्टम भाव में शनि और मंगल की युति आपको झगड़े विवाद से दूर रहने एवं वाहन सावधानी पूर्वक चलाने के संकेत कर रही है, कार्यक्षेत्र में भी षडयंत्र का शिकार होने से बचें, बेहतर रहेगा कि अपना कार्य संपन्न करें और सीधे घर आएं। स्वास्थ्य विशेषकर के रक्तविकार, जोड़ों में दर्द एवं वाद संबंधी रोगों से हमेशा सावधान रहना पड़ेगा। सूर्य एवं शुक्र का वर्तमान समय में गोचर आपके कार्य का विस्तार करेगा एक से अधिक आय के साधन बनेंगे।

rashifal 2020
कर्क राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही राशिस्वामी स्वामी चंद्र भाग्य भाव में बैठे हुए हैं, जो अपने पुत्र बुध के नक्षत्र में विराजमान हैं यह संयोग आपके लिए वर्ष पर्यंत कवच का काम करेगा भाग्यभाव में सूर्य देव भी विराजमान हैं अतः व्यापार अथवा रोजगार के लिए यह संयोग अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा नौकरी में पदोन्नति एवं स्थान परिवर्तन का भी योग बन रहा है। प्रशासनिक कार्यो का निपटारा होगा आपकी समझदारी इसी में है कि उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें और अपने कार्य संपन्न करवाते रहें।
  • अपनी उच्चराशि में राहु आपके व्यय भाव में विराजमान हैं इसके परिणाम स्वरूप आपको कई बार व्यर्थ भागदौड़ का सामना करना पड़ेगा। लोग आपको कार्य के लिए बुलाएंगे, मीटिंग के लिए बुलाएंगे और पहुंचने पर वह मीटिंग कैंसिल कर देंगे जिससे आपको परेशान होना पड़  सकता है। वृहस्पति आपके शत्रुभाव में गोचर कर रहे हैं तो आपको हर समय स्वास्थ्य हेतु सावधान रहना ही पड़ेगा। गुप्त शत्रुओं से भी बचते रहना पड़ेगा।
  • मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के अंतिम सप्ताह तक वृहस्पति अतिचारी होकर मकर राशि में प्रवेश करके आप पर उच्च दृष्टि डालेंगे अतः इस अवधि के मध्य आप कोई भी बड़े से बड़ा कार्य अथवा निर्णय लेना चाहें तो शीघ्रता से लें। शादी विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी और दैनिक व्यापार में अत्यधिक लाभ की संभावना रहेगी। रोजगार की दिशा में किया गया लगभग सभी प्रयास सफल रहेगा। जुलाई से पुनः ग्रह स्थितियों में सुधार होगा, आपको हर निर्णय सावधानीपूर्वक लेने पड़ेंगे।
  • सिंह राशि-
  • वर्ष के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी सूर्य अष्टम प्रताप भाव में गए हुए हैं जिसके परिणाम स्वरूप आपको अग्नि, विष एवं  दवाओं के रिएक्शन से बचना पड़ेगा किंतु यही योग आपको मान सम्मान और प्रतिष्ठा भी दिलाएगा। वृहस्पति आपकी राशि से पंचम भाव में विराजमान है अतः शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता मिलेगी, संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। यहां तक कि नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति के भी योग बन रहे हैं। प्रेम विवाह करना चाह रहे हों तो यह संवत्सर सहायक सिद्ध होगा।
  • गुरु के मकर राशि में गोचर के समय आपको गुप्त शत्रुओं से बचना पड़ेगा। राशि से भाग्य भाव में शुक्र का गोचर राजयोग का निर्माण करेगा अतः केंद्र अथवा राज्य सरकार के संबंधित विभागों में नौकरी आदि के लिए आवेदन करना हो अथवा किसी भी तरह का लाभ लेना हो तो यह  वर्ष उपयुक्त रहेगा नौकरी में स्थान परिवर्तन के भी योग बन रहे हैं।आपके द्वारा लिए गए निर्णय एवं किए गए कार्यों की सराहना भी होगी।
  • राशि से छठे भाव में मंगल शनि और लाभ भाव में राहु का होना आपको अति ऊर्जावान और उत्साही बनाएगा जिसके कारण कई बार आप निर्णय लेने में जल्दबाजी कर सकते हैं अतः विवादित मामलों से बचें जहां तक हो सके इसका सही उपयोग अपने कार्य व्यापार की सफलता के लिए लगाएं शत्रु परास्त होंगे और कोर्ट कचहरी के मामलों में निर्णय आपके पक्ष में आने के संकेत हैं। सितंबर से राहु के कर्क राशि में चले जाने के कारण आपके ग्रह गोचर में आया परिवर्तन आर्थिक तंगी ला सकता है उसके लिए अभी से सावधान रहें और अपव्यय बचें।
कन्या राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी बुध छठे शत्रु भाव में बैठे हुए हैं अतः स्वास्थ्य के लिए यह योग थोड़ा सा प्रतिकूल रहेगा और अधिक कर्ज के लेनदेन से बचना पड़ेगा। यहां तक कि यदि आप किसी को कर्ज देना भी चाह रहे हों तो इस समय को टालें अन्यथा आपका दिया गया पैसा जल्दी वापस नहीं आएगा। मार्च के अंतिम सप्ताह से बृहस्पति का गोचर भी आपके लिए बेहतर हो जाएगा और विद्या भाव में तीन ग्रहों की युति शैक्षणिक एवं प्रतियोगिता के मामलों में कुछ चुनौतियां पेश कर सकती हैं अतः यदि आप विद्यार्थी हैं तो पढ़ाई के मामलों में लापरवाही न करें।
  • संवेदनशील बने, प्रेम संबंधी मामलों में निराशा हाथ लगेगी इसलिए अपने कार्य पर ध्यान देंगे तो बेहतर रहेगा। संतान संबंधी चिंता आपको तंग कर सकती है किंतु नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के योग बन रहे हैं। जुलाई से इन ग्रह स्थितियों में काफी सुधार आएगा और आपके सामने उपस्थित हुई विषम परिस्थितियां भी समाप्त होंगी। सूर्य का गोचर भी शादी विवाह से संबंधित मामलों में विलंब ला सकता है और दैनिक व्यापार में मंदी ला सकता है किंतु यह ज्यादा समय के लिए नहीं रहेगा परेशान ना हों।
  • दशम भाव में उच्च राशि गत राहु आपको मिलने वाली कठिन चुनौतियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करेगा आपकी प्रतिष्ठा को भी निखारेगा। राजनैतिक अथवा सामाजिक  मामलों के चुनाव से संबंधित निर्णय आपके पक्ष में होंगे अतः राजनीति में भी प्रवेश करने का यह बेहतरीन अवसर है। शासन सत्ता का पूर्ण उपयोग करते हुए अपने कार्य को संपन्न करें रोजगार की दिशा में किया गया रहा प्रयास अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा स्थान परिवर्तन न घबराएं।
तुला राशि- 
  • आपके राशि स्वामी शुक्र संवत्सर के आरंभ से ही केंद्र भाव में बैठे हुए हैं जिसके प्रभाव स्वरूप संवत्सर का आरंभ सुखद परिणाम दिलाने वाला सिद्ध होगा, विशेष करके यह समय व्यापारिक वर्ग के लिए उत्तम रहेगा। राशि से पराक्रम भाव में बृहस्पति का गोचर आपको साहसी तो बनाएगा किंतु अतिचारी होकर गुरु के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही आपको मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के अंतिम सप्ताह तक के मध्य पारिवारिक कलह एवं मानसिक अशांति का सामना करना पड़ेगा इन सबके बावजूद आपके लिए मकान वाहन के क्रय का योग बना हुआ है यदि कहीं की भी यात्रा कर रहे हैं तो अपने सामान की रखवाली स्वयं करें और घर में चोरी होने से सावधान रहें।
  • आपकी राशि के लिए राजयोग कारक ग्रह शनि भी अपने घर में चतुर्थ भाव में बैठे हुए हैं जिसके फलस्वरूप आपको माता पिता के स्वास्थ्य से कुछ चिंता तो होगी किंतु कार्य क्षेत्र में यह आपको सफल बनाएंगे। राजनीति अथवा राजनेताओं से गहरे संबंध रहेंगे इसलिए सरकार से जुड़े हुए कार्यों का निपटारा करने का सही समय है प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले छात्र यदि नौकरी हेतु आवेदन करें तो सफलता की संभावना सर्वाधिक रहेगी।
  • यात्रा देशाटन का पूर्ण आनंद मिलेगा इसी पर आपका अत्यधिक व्यय भी होगा यदि विदेशी नागरिकता के लिए वीजा आदि का आवेदन करना चाह रहे हो तो उस दृष्टि से वर्ष अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा। सितंबर माह से राहु और केतु का गोचर परिवर्तन कुछ कठिन चुनौतियां पेश कर सकता है अतः षड्यंत्र का शिकार होने एवं कोर्ट कचहरी के मामलों से बचना पड़ेगा।
वृश्चिक राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी मंगल उच्च राशि गत होकर पराक्रम भाव में बैठे हुए हैं जिसके प्रभावस्वरूप यह योग आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है इन्हीं के साथ स्वराशि गत शनि भी बैठे हुए हैं जो आपको अदम्य साहसी एवं पराक्रमी बनायेंगे। आप जो भी निर्णय लेंगे, जैसा निर्णय लेंगे वह सफल रहेगा किंतु अति उत्साह में ऐसा निर्णय न लें जिसके कारण आपको सामाजिक विरोध का सामना करना पड़े। भाइयों से मतभेद का सामना करना पड़ सकता है इसलिए इसे ग्रह योग समझकर तूल न दें।
  • धनभाव में बृहस्पति का बैठना आकस्मिक धन प्राप्ति के योग तो बनाएगा किंतु इनके मकर राशि में गोचर के समय यह प्रभाव क्षीण रहेगा। जून के अंतिम सप्ताह से पुनः वृहस्पति के धनु राशि में आ जाने के फलस्वरूप आर्थिक पक्ष और मजबूत हो जाएगा परिवार के बड़े बुजुर्गों से सहयोग मिलेगा। शुक्र का शत्रु भाव में जाना स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाएगा। गुप्त शत्रुओं से बचें। कार्यक्षेत्र में आपके खिलाफ षड्यंत्र होते रहेंगे इसके लिए सावधान रहें उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें, राजनेताओं से भी गहरे संबंध बनेंगे।
  • समाज में पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आपके द्वारा लिए गए निर्णय एवं किए गए कार्यों की सराहना होगी। नौकरी में पदोन्नति के लिए प्रयास करें स्थान परिवर्तन का प्रयास भी कर सकते हैं। अक्टूबर से ग्रह गोचर में आने वाला परिवर्तन आपकी कामयाबियों में बढ़ोतरी करेगा किंतु, शादी विवाह से संबंधित वार्ता में विलंब हो सकता है ससुराल पक्ष से मतभेद न पैदा होने दें।
धनु राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके स्वामी बृहस्पति अपनी ही राशि में विराजमान है जो आपके लिए अत्यधिक शुभ फलदाई सिद्ध होते रहेंगे किंतु, मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के अंतिम सप्ताह के मध्य यह अपनी नीच राशि 'मक'र राशि में चले जाएंगे जो आपके लिए कुछ अशुभ सिद्ध होंगे। जुलाई से पुनः यह अपनी राशि में आकर अति शुभ योगों का निर्माण करेंगे जिससे आपकी खोई प्रतिष्ठा वापस आएगी। झगड़े विवाद संबंधी मामलों का निपटारा होगा और आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।
  • इस समय इनकी दृष्टि आपके विद्या भाव पर पड़ेगी जिससे आपको शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी और संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के योग बनेंगे प्रेम विवाह करना चाह रहे हों तो योग अति उत्तम रहेगा। यही दृष्टि आपके लिए भाग्यभाव पर पड़ेगी अतः धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे और विदेश यात्रा का योग बनेगा। विदेशी नागरिकता के लिए वीजा आदि का आवेदन करना चाहें तो शुभ परिणाम आपको अधिक खुशी दे सकते हैं। शादी विवाह से संबंधित वार्ता भी सफल रहेगी।
  • धनभाव में शनि देव का गोचर अनवरत चलता रहेगा इसलिए आकस्मिक धन प्राप्ति के योग के साथ-साथ किसी महंगी वस्तु के क्रय का भी योग बनेगा। मकान वाहन से संबंधित क्रय का निर्णय ले रहे हो तो विलंब ना करें सफलता की संभावना सर्वाधिक रहेगी। सितंबर से राहु और केतु का राशि परिवर्तन आपको शत्रुमर्दी बनाएगा फिर भी विवादों से बचें और कोर्ट कचहरी के मामले बाहर ही निपटा लें तो बेहतर रहेगा।
  • मकर राशि- 
  • आपकी राशि के स्वामी शनि स्वयं अपनी ही राशि मकर में विद्यमान हैं और अतिशुभ योगों का निर्माण कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप वर्ष आपके लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है अतः, अपने कार्य एवं नीले पूर्ण सावधानी के साथ करते हुए चलेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी। इनके साथ उच्च राशिगत मंगल भी विद्यमान हैं यद्यपि शनि मंगल की युति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती किंतु कामयाबी की दृष्टि से यह ठीक तो है स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ अशुभ है अतः यात्रा सावधानीपूर्वक करें दुर्घटना से बचें और जोड़ों में दर्द की बीमारियों से बचते रहे।
  • कुछ दिनों के लिए अतिचारी होकर वृहस्पति भी इनके साथ आ रहे हैं जिससे स्वास्थ्य में थोड़ा सा सुधार तो होगा किंतु आप थकान का अनुभव करेंगे और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है इसे ग्रह योग समझकर भूलने की कोशिश करें। जुलाई से पुनः बृहस्पति आपके भाव में चले जाएंगे जिससे आपको किसी और देश की नागरिकता के लिए आवेदन करना सफलता दिला सकता है। धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे परिवार में मांगलिक कार्यों का शुभ अवसर आएगा।
  • इस राशि के योग कारक ग्रह शुक्र भी केंद्र गत हैं अतः मकान वाहन के क्रय का योग बनेगा। काफी दिनों से रुका हुआ आपका धन वापस आएगा यात्रा सावधानीपूर्वक करें, सामान चोरी होने से बचाएं संतान संबंधी चिंता से पूर्ण मुक्ति मिलेगी। व्यापारिक वर्ग के लिए भी यह समय अत्यधिक लाभदायक सिद्ध होगा इसलिए अपने कार्य व्यापार के प्रति सजग रहें अधिक उधार देने से बचें। सितंबर से राहु केतु का राशि परिवर्तन भी आपको सहयोग करने लगेगा इसलिए संयम पूर्वक अपने कार्य में लगे रहें।

rashifal 2020
कुंभ राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी शनि व्यय भाव में गए हैं यद्यपि वह अपनी ही राशि के हैं फिर भी आपको अत्यधिक संघर्ष के बाद ही आर्थिक लाभ पहुंचाएंगे भागदौड़ की अधिकता रहेगी जिसके परिणाम स्वरुप आपको आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ सकता है। कुछ दिनों बाद वृहस्पति के भी आ जाने से शनि मंगल वृहस्पति की युति आपकी और भी परीक्षा ले सकती है अतः वर्ष का आरंभ आपके अति संयम और सावधानी बरतने का है क्योंकि आपके बारहवें भाव में मंगल और दूसरे भाव में सूर्य के परिणाम स्वरूप आपकी राशि पर दबाव सर्वाधिक है इसलिए इस समय आप जिम्मेदारियों से जूझ रहे होंगे।
  • सबसे योगकारक ग्रह शुक्र का गोचर अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा इसलिए साहस और पराक्रम वृद्धि होगी। यदि आप महिला हैं तो पुरुष और पुरुष हैं तो महिला आपके कार्यक्षेत्र में आपकी मदद करेंगे। जुलाई से वृहस्पति का शुभ गोचर आपको शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता दिलाएगा सोची समझी रणनीति भी कारगर रहेगी यदि आप प्रेम विवाह करना चाह रहे हों तो यह अवसर उपयुक्त रहेगा। नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के भी योग बन रहे हैं। गुरु की शुभ दृष्टि प्रभाव स्वरूप रुके हुए कार्य बनेंगे नए लोगों से मेलजोल बढ़ेगा विदेश यात्रा का भी संयोग है।
  • आरंभ में राहु एवं केतु का गोचर आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकता है पारिवारिक कलह दे सकता है और स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है इसलिए हर कार्य अथवा निर्णय बहुत सोच समझकर सावधानीपूर्वक लेना ही आपके लिए वर्ष पर्यंत श्रेयष्कर रहेगा। सितंबर माह से  कई ग्रहों के राशि परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप विषम परिस्थितियों से कुछ हद तक मुक्ति मिलेगी किंतु तनाव की अधिकता एवं आर्थिक तंगी से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • मीन राशि- 
  • वर्ष आरंभ से ही आपके राशि स्वामी बृहस्पति स्वराशि होकर दशम कर्मभाव में बैठे हुए हैं जिसके प्रभाव स्वरूप आपके कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा जो कार्य करना चाहें जिस तरह से करना चाहें उसमें सफलता मिलेगी शासन सत्ता का पूर्ण सुख मिलेगा और उच्चाधिकारियों से संबंध बना रहेगा। इस अवधि के मध्य यदि सरकार से संबंधित कोई निर्णय अपने पक्ष में करवाना चाहें तो अवसर अच्छा रहेगा। कुछ दिनों बाद आपके लाभभाव में गुरु शनि और मंगल की युति एक साथ हो जाएगी जो आपके लिए लाभदायक तो रहेगी किंतु, स्वास्थ्य की दृष्टि से इस पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है इसलिए सावधान रहें।
  • अच्छी संगति करें नशाखोरी से दूर रहें। गुरु की दृष्टि इस अवधि के मध्य आपके संतान एवं पत्नी भाव पर पड़ रही है जिसके फलस्वरूप आप को संतान संबंधित चिंता से मुक्ति मिलेगी यदि किसी भी तरह की प्रतियोगिता में बैठना चाह रहे हों तो यह अवसर उपयुक्त रहेगा और सफलता की संभावना सर्वाधिक रहेगी। विवाह संबंधित वार्ता भी सफल रहेगी। ससुराल पक्ष से रिश्ते मजबूत बनेंगे नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति के भी योग बन रहे हैं। यही योग कार्य व्यापार के लिए अति उत्तम सिद्ध होगा।
  • सितंबर से राहु केतु एवं बृहस्पति का राशि परिवर्तन भी आपके लिए वरदान सिद्ध होगा उस समय आपके अदम्य साहस एवं पराक्रम की वृद्धि होगी आपके द्वारा किए गए कार्य एवं लिए गए निर्णय की सराहना तो होगी किंतु अत्यधिक ऊर्जावान एवं उत्साही होने के फलस्वरूप आप अपनी जिद एवं आवेश पर नियंत्रण रखते हुए कार्य करेंगे तो वर्ष आपके लिए बेहतरीन सिद्ध होगा।

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