लटैनाथ मल्लिकार्जुन

Wednesday, 15 April 2020

ज्योतिष शास्त्र 12 तरह की विधाओं से जाना जा‍ता है भविष्य।




ज्योतिषाचार्य श्री हरीप्रसाद जोशी






 12 तरह की विधाओं से जाना जा‍ता है भविष्य।

हमारे  ज्योतिष शास्त्र में अलग-अलग तरीके से भाग्य या भविष्य बताया जाता है। नेपाल, भारत, जैसे देशों में लगभग 180 से ज्यादा ज्योतिष विद्या प्रचलित हैं। प्रत्येक विद्या आपके भविष्य को बताने का दावा करती है। माना यह ‍भी जाता है कि प्रत्येक विद्या भविष्य बताने में सक्षम है, लेकिन उक्त विद्या के जानकार कम ही मिलते हैं, जबकि भटकाने वाले ज्यादा। मन में सवाल यह उठता है कि आखिर किस विद्या से जानें हम अपना भविष्य, तो यहाँ प्रस्तुत है कुछ प्रचलित ज्योतिष विद्याओं की जानकारी।
 
1. कुंडली ज्योतिष :- यह कुंडली पर आधारित विद्या है। इसके तीन भाग है- सिद्धांत ज्योतिष, संहिता ज्योतिष और होरा शास्त्र। इस विद्या के अनुसार व्यक्ति के जन्म के समय में आकाश में जो ग्रह, तारा या नक्षत्र जहाँ था उस पर आधारित कुंडली बनाई जाती है। बारह राशियों पर आधारित नौ ग्रह और 27 नक्षत्रों का अध्ययन कर जातक का भविष्य बताया जाता है। उक्त विद्या को बहुत से भागों में विभक्त किया गया है, लेकिन आधुनिक दौर में मुख्यत: चार माने जाते हैं। ये चार निम्न हैं- नवजात ज्योतिष, कतार्चिक ज्योतिष, प्रतिघंटा या प्रश्न कुंडली और विश्व ज्योतिष विद्या।
 
2. लाल किताब की विद्या :- यह मूलत: उत्तरांचल, हिमाचल और कश्मीर क्षेत्र की विद्या है। इसे ज्योतिष के परंपरागत सिद्धांत से हटकर 'व्यावहारिक ज्ञान' माना जाता है। इसे बहुत ही कठिन विद्या माना जाता है। इसके अच्‍छे जानकार बगैर कुंडली को देखे उपाय बताकर समस्या का समाधान कर सकते हैं। उक्त विद्या के सिद्धांत को एकत्र कर सर्वप्रथम इस पर एक ‍पुस्तक प्रकाशित की थी जिसका नाम था लाल किताब मान्यता अनुसार उक्त किताब को उर्दू में लिखा गया था इससे इसके बारे में भ्रम उत्पन्न हो गया।
 
3. गणितीय ज्योतिष :- इस भारतीय विद्या को अंक विद्या भी कहते हैं। इसके अंतर्गत प्रत्येक ग्रह, नक्षत्र, राशि आदि के अंक निर्धारित हैं। फिर जन्म तारीख, वर्ष आदि के जोड़ अनुसार भाग्यशाली अंक और भाग्य निकाला जाता है।

4. नंदी नाड़ी ज्योतिष :- यह मूल रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित विद्या है जिसमें ताड़पत्र के द्वारा भविष्य जाना जाता है। इस विद्या के जन्मदाता भगवान शंकर के गण नंदी हैं इसी कारण इसे नंदी नाड़ी ज्योतिष विद्या कहा जाता है।
 
5. पंच पक्षी सिद्धान्त :- यह भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इस ज्योतिष सिद्धान्त के अंतर्गत समय को पाँच भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग का नाम एक विशेष पक्षी पर रखा गया है। इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई कार्य किया जाता है उस समय जिस पक्षी की स्थिति होती है उसी के अनुरूप उसका फल मिलता है। पंच पक्षी सिद्धान्त के अंतर्गत आने वाले पाँच पक्षी के नाम हैं गिद्ध, उल्लू, कौआ, मुर्गा और मोर। आपके लग्न, नक्षत्र, जन्म स्थान के आधार पर आपका पक्षी ज्ञात कर आपका भविष्य बताया जाता है।
 
6. हस्तरेखा ज्योतिष :- हाथों की आड़ी-तिरछी और सीधी रेखाओं के अलावा, हाथों के चक्र, द्वीप, क्रास आदि का अध्ययन कर व्यक्ति का भूत और भविष्य बताया जाता है। यह बहुत ही प्राचीन विद्या है और भारत तथा   नेपाल के सभी राज्यों में प्रचलित है।

7. नक्षत्र ज्योतिष :- वैदिक काल में नक्षत्रों पर आधारित ज्योतिष विज्ञान ज्यादा प्रचलित था। जो व्यक्ति जिस नक्षत्र में जन्म लेता था उसके उस नक्षत्र अनुसार उसका भविष्य बताया जाता था। नक्षत्र 27 होते हैं। 
 
8. अँगूठा शास्त्र :- यह विद्या भी दक्षिण भारत में प्रचलित है। इसके अनुसार अँगूठे की छाप लेकर उस पर उभरी रेखाओं का अध्ययन कर बताया जाता है कि जातक का भविष्य कैसा होगा।
 
9. सामुद्रिक विद्या:- यह विद्या भी भारत की सबसे प्राचीन विद्या है। इसके अंतर्गत व्यक्ति के चेहरे, नाक-नक्श और माथे की रेखा सहित संपूर्ण शरीर की बनावट का अध्ययन कर व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को बताया जाता है।
 
10. चीनी ज्योतिष :- चीनी ज्योतिष में बारह वर्ष को पशुओं के नाम पर नामांकित किया गया है। इसे ‘पशु-नामांकित राशि-चक्र’ कहते हैं। यही उनकी बारह राशियाँ हैं, जिन्हें 'वर्ष' या 'सम्बन्धित पशु-वर्ष' के नाम से जानते हैं। यह वर्ष निम्न हैं- चूहा, बैल, चीता, बिल्ली, ड्रैगन, सर्प, अश्व, बकरी, वानर, मुर्ग, कुत्ता और सुअर। जो व्यक्ति जिस वर्ष में जन्मा उसकी राशि उसी वर्ष अनुसार होती है और उसके चरित्र, गुण और भाग्य का निर्णय भी उसी वर्ष की गणना अनुसार माना जाता है।
 
11. वैदिक ज्योतिष :-  वैदिक ज्योतिष अनुसार राशि चक्र, नवग्रह, जन्म राशि के आधा‍र पर गणना की जाती है। मूलत: नक्षत्रों की गणना और गति को आधार बनाया जाता है। मान्यता अनुसार वेदों का ज्योतिष किसी व्यक्ति के भविष्य कथक के लिए नहीं, खगोलीय गणना तथा काल को विभक्त करने के लिए था।
 
12. टैरो कार्ड :- टैरो कार्ड में ताश की तरह पत्ते होते हैं। जब भी कोई व्यक्ति अपना भविष्य या भाग्य जानने के लिए टैरो कार्ड के जानकार के पास जाता है तो वह जानकार एक कार्ड निकालकर उसमें लिखा उसका भविष्य बताता है।
 
यह उसी तरह हो सकता है जैसा की पिंजरे के तोते से कार्ड निकलवाकर भविष्य जाना जाता है। यह उस तरह भी है जैसे कि बस स्टॉप या रेलवे स्टेशन पर एक मशीन लगी होती है जिसमें एक रुपए का सिक्का डालो और जान लो भविष्य। किसी मेले या जत्रा में एक कम्प्यूटर होता है जो आपका भविष्य बताता है।
 
उपरोक्त विद्या जुए-सट्टे जैसी है यदि अच्छा कार्ड लग गया तो अच्छी भविष्यवाणी, बुरा लगा तो बुरी और सामान्य लगा तो सामान्य। हालाँकि टैरो एक्सपर्ट मनोविज्ञान को आधार बनाकर व्यक्ति का चरित्र और भविष्य बताते हैं। अब इसमें कितनी सच्चाई होती है यह कहना मुश्किल है।
 
इसके अलावा माया, हेलेनिस्टिक, सेल्टिक, पर्शियन या इस्लामिक, बेबिलोनी आदि अनेक ज्योतिष धारणाएँ हैं। हर देश की अपनी अलग ज्योतिष धारणाएँ हैं और अलग-अलग भविष्यवाणियाँ।

नोट: लटैनाथ मालिकार्जुन ज्योतिषालय‌ में केवल, कुंडली ज्योतिष, लाल किताब की विद्या, गणितीय ज्योतिष,हस्तरेखा ज्योतिष ,नक्षत्र ज्योतिष,अँगूठा शास्त्र, ज्योतिष विद्या के आधार पर  कार्य किया जाता है।

Sunday, 12 April 2020

Donate Now, help us support covid-19 hit families





Poor labour emergency relief fund....

Millions of Indians, Nepalese living in the rural areas are at great risk of contracting the corona virus because of lack of awareness and their poor living conditions. Due to the ongoing lockdown and stay home advisory from the government, the poor and daily wage labourers are suffering with no income and struggling to meet their daily needs.

The Latinath Mallikarjuna astrologicals is helping them with much needed Hygiene & Dry Ration Relief Supplies. We request individuals & companies to come forward and support our relief efforts.
For some our Laborers, sister and brother, there is no arrangement eating and drinking, Please make a donation now.

लाखों भारतीय, नेपाली, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में जागरूकता की कमी और उनके खराब रहने की स्थिति के कारण कोरोना वायरस के संकुचन का काफी खतरा है। सरकार की ओर से जारी तालाबंदी और घरेलू सलाह के कारण गरीब और दिहाड़ी मजदूर बिना किसी आय के पीड़ित हैं और अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
लीटैनाथ मल्लिकार्जुन ज्योतिषालय, उन्हें बहुत आवश्यक स्वच्छता और सूखी राशन राहत आपूर्ति में मदद कर रहा है। हम व्यक्तियों और कंपनियों से अनुरोध करते हैं कि वे आगे आएं और हमारे राहत प्रयासों का समर्थन करें। कृपया अब एक दान करें।

सहायता राशी डाइरेक्ट बैंक खाते में जमा कर सकते हैं और UPI, code scan, Google pe, phone PE paytm,  द्वारा भी जमा कर सकते हैं.....

Poor labour emergency relief fund.
Account Holder Name: Hariorasad Joshi
Kotak Mahendra back
Account No.                :2312568012
IFSC code.                  :KKBK0008072
HSR layout Bangalore BRANCH
Phone pay, Number.  : 9380345899
UPI                             :9380345899@ybl

    hariprasad.joshi1988-3@okhdfcbank



Saturday, 11 April 2020

विक्रम संवत 2077 वार्षिक राशिफल: सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा नव संवत्सर 2077



प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरिप्रसाद जोशी

नव संवत्सर 2077 और वार्षिक राशिफल
 प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य हरिप्रसाद जोशी बता रहे हैं आपके लिए इस संवत्सर में राजा बुध और मंत्री चंद्रमा के संयोग का फल कैसा रहेगा, इसका ज्योतिषी विश्लेषण.

मेष राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी मंगल उच्चराशिगत होकर दशम कर्म भाव में बैठे हैं और साथ में शनिदेव भी विराजमान है कार्यक्षेत्र की दृष्टि से यह योग शुभ कहा जा सकता है किंतु माता पिता के स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा अतः इसका ध्यान रखें। पराक्रम भाव में राहु आपको अति साहसी, ऊर्जावान और उद्यमी बनाएंगे जिसके फलस्वरूप आप बड़े से बड़ा निर्णय अथवा कार्य बड़ी सहजता के साथ कर लेंगे।
  • अत्यधिक ऊर्जा के कारण आपको ज़िद एवं आवेश से बचना चाहिए और परिवार के वरिष्ठ सदस्यों अथवा भाइयों से मतभेद ना होने पाए इसका ध्यान भी रखना चाहिए आरंभ से ही वृहस्पति आपके भाग्य भाव में बैठे हुए हैं जिनकी अमृत दृष्टि आपके ऊपर और आपके ज्ञान के ऊपर पड़ रही है, अतः शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता तो मिलेगी ही संतान संबंधी चिंता से मुक्ति भी मिलेगी।
  • नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव का भी योग बनेगा और विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी। यात्रा देशाटन का पूर्ण आनंद उठाएंगे विदेश यात्रा एवं विदेशी नागरिकता के लिए आवेदन आदि करना चाह रहे हों तो भी यह वर्ष आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है लाभ उठाएं। व्यापारिक वर्ग के लिए भी अत्यधिक उतार-चढ़ाव के बावजूद व्यापार लाभदायक रहेगा।

rashifal 2020
वृषभ राशि- 
  • वर्ष आरंभ से ही आपके राशि स्वामी शुक्र व्यय भाव में गोचर कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप आपके लिए वर्ष भागदौड़ अधिक कराएगा और विलासिता पर वह भी होगा। स्वास्थ्य विशेष करके बाई आंख का ध्यान रखना चाहिए। 29 मार्च बाद ही वृहस्पति आरती चारी होकर मकर राशि में चले जाएंगे जहां पर पहले से ही मंगल एवं शनि विराजमान है यहां पर वृहस्पति नीच राशि संज्ञक हो जाएंगे। अतः नौकरी में स्थान परिवर्तन एवं तनाव की संभावना बढ़ जाएगी इसलिए कार्यक्षेत्र में उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें जहां तक संभव हो झगड़े विवाद से बचते रहें।
  • राहु का उच्चराशिगत होकर धनभाव में होना आकस्मिक धन प्राप्ति के योग तो बनाएगा किंतु, परिवार में कलह का भी सामना करवाएगा। आपके लिए विशेष सलाह है कि कोई भी बात ऐसी ना बोले कि विवाद पैदा हो और कठोर शब्दों का प्रयोग करने से बचें। जून के अंतिम सप्ताह में पुनः वृहस्पति अपनी राशि में आकर आपकी राशि से अष्टम मृत्यु भाव में चले जाएंगे जिसके परिणाम स्वरूप कठोर परिश्रम का सामना तो करना पड़ेगा किंतु आपको मान सम्मान भी मिलेगा।
  • आपके द्वारा लिए गए निर्णय एवं किए गए कार्यों की सराहना भी होगी इनकी अमृत दृष्टि आपके व्यभाव, धन और पराक्रम भाव पर भी पड़ेगी अतः धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करेंगे। व्यापारिक वर्ग के लिए उतार-चढ़ाव अधिक आएगा। विद्यार्थी वर्ग के लिए शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छे अंक की प्राप्ति के लिए और प्रयास करने होंगे। सूर्यदेव का गोचर सरकारी कार्यो का निपटारा कराने में मदद करेगा यहांतककि सरकारी सर्विस हेतु आवेदन भी करना चाह रहे हों तो परिणाम आपके पक्ष में आने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
मिथुन राशि- 
  • आपकी राशि स्वामी बुध संवत्सर के आरंभ से ही भाग्य भाव में बैठे हुए हैं अतः वर्ष आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है कुछ महीने तक बुध का प्रभाव आपके लिए अति शुभ रहेगा अतः आपका व्यापारिक एवं आर्थिक पक्ष मजबूत होगा शासन सत्ता से संबंधित किसी भी कार्य का निपटारा करवाना हो तो प्रयास तेज करें उच्चाधिकारियों से अच्छे संबंध बनेंगे।
  • राहु पहले से ही आपकी राशि में विद्यमान है इसलिए यह संयोग भी आपको तीक्ष्ण बुद्धि वाला बनाएगा जिसके फलस्वरूप आपके लिए बड़े से बड़ा कार्य अथवा निर्णय लेना आपके लिए सहज हो जाएगा साथ ही आपकी राशि से सप्तम भाव में बैठे वृहस्पति की पूर्ण दृष्टि भी आपके ऊपर पड़ रही है जिसके प्रभाव स्वरूप शादी विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव का भी योग बनेगा। ससुराल पक्ष से रिश्ते मजबूत बनेंगे। यदि आप व्यापारी हैं तो भी आपके लिए यह संयोग अतिशुभ साबित होगा।
  • काफी दिनों से रुका हुआ आपका धन वापस मिलेगा किंतु कोर्ट कचहरी के मामले बाहर ही निपटा लें तो बेहतर रहेगा क्योंकि अष्टम भाव में शनि और मंगल की युति आपको झगड़े विवाद से दूर रहने एवं वाहन सावधानी पूर्वक चलाने के संकेत कर रही है, कार्यक्षेत्र में भी षडयंत्र का शिकार होने से बचें, बेहतर रहेगा कि अपना कार्य संपन्न करें और सीधे घर आएं। स्वास्थ्य विशेषकर के रक्तविकार, जोड़ों में दर्द एवं वाद संबंधी रोगों से हमेशा सावधान रहना पड़ेगा। सूर्य एवं शुक्र का वर्तमान समय में गोचर आपके कार्य का विस्तार करेगा एक से अधिक आय के साधन बनेंगे।

rashifal 2020
कर्क राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही राशिस्वामी स्वामी चंद्र भाग्य भाव में बैठे हुए हैं, जो अपने पुत्र बुध के नक्षत्र में विराजमान हैं यह संयोग आपके लिए वर्ष पर्यंत कवच का काम करेगा भाग्यभाव में सूर्य देव भी विराजमान हैं अतः व्यापार अथवा रोजगार के लिए यह संयोग अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा नौकरी में पदोन्नति एवं स्थान परिवर्तन का भी योग बन रहा है। प्रशासनिक कार्यो का निपटारा होगा आपकी समझदारी इसी में है कि उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें और अपने कार्य संपन्न करवाते रहें।
  • अपनी उच्चराशि में राहु आपके व्यय भाव में विराजमान हैं इसके परिणाम स्वरूप आपको कई बार व्यर्थ भागदौड़ का सामना करना पड़ेगा। लोग आपको कार्य के लिए बुलाएंगे, मीटिंग के लिए बुलाएंगे और पहुंचने पर वह मीटिंग कैंसिल कर देंगे जिससे आपको परेशान होना पड़  सकता है। वृहस्पति आपके शत्रुभाव में गोचर कर रहे हैं तो आपको हर समय स्वास्थ्य हेतु सावधान रहना ही पड़ेगा। गुप्त शत्रुओं से भी बचते रहना पड़ेगा।
  • मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के अंतिम सप्ताह तक वृहस्पति अतिचारी होकर मकर राशि में प्रवेश करके आप पर उच्च दृष्टि डालेंगे अतः इस अवधि के मध्य आप कोई भी बड़े से बड़ा कार्य अथवा निर्णय लेना चाहें तो शीघ्रता से लें। शादी विवाह से संबंधित वार्ता सफल रहेगी और दैनिक व्यापार में अत्यधिक लाभ की संभावना रहेगी। रोजगार की दिशा में किया गया लगभग सभी प्रयास सफल रहेगा। जुलाई से पुनः ग्रह स्थितियों में सुधार होगा, आपको हर निर्णय सावधानीपूर्वक लेने पड़ेंगे।
  • सिंह राशि-
  • वर्ष के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी सूर्य अष्टम प्रताप भाव में गए हुए हैं जिसके परिणाम स्वरूप आपको अग्नि, विष एवं  दवाओं के रिएक्शन से बचना पड़ेगा किंतु यही योग आपको मान सम्मान और प्रतिष्ठा भी दिलाएगा। वृहस्पति आपकी राशि से पंचम भाव में विराजमान है अतः शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता मिलेगी, संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी। यहां तक कि नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति के भी योग बन रहे हैं। प्रेम विवाह करना चाह रहे हों तो यह संवत्सर सहायक सिद्ध होगा।
  • गुरु के मकर राशि में गोचर के समय आपको गुप्त शत्रुओं से बचना पड़ेगा। राशि से भाग्य भाव में शुक्र का गोचर राजयोग का निर्माण करेगा अतः केंद्र अथवा राज्य सरकार के संबंधित विभागों में नौकरी आदि के लिए आवेदन करना हो अथवा किसी भी तरह का लाभ लेना हो तो यह  वर्ष उपयुक्त रहेगा नौकरी में स्थान परिवर्तन के भी योग बन रहे हैं।आपके द्वारा लिए गए निर्णय एवं किए गए कार्यों की सराहना भी होगी।
  • राशि से छठे भाव में मंगल शनि और लाभ भाव में राहु का होना आपको अति ऊर्जावान और उत्साही बनाएगा जिसके कारण कई बार आप निर्णय लेने में जल्दबाजी कर सकते हैं अतः विवादित मामलों से बचें जहां तक हो सके इसका सही उपयोग अपने कार्य व्यापार की सफलता के लिए लगाएं शत्रु परास्त होंगे और कोर्ट कचहरी के मामलों में निर्णय आपके पक्ष में आने के संकेत हैं। सितंबर से राहु के कर्क राशि में चले जाने के कारण आपके ग्रह गोचर में आया परिवर्तन आर्थिक तंगी ला सकता है उसके लिए अभी से सावधान रहें और अपव्यय बचें।
कन्या राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी बुध छठे शत्रु भाव में बैठे हुए हैं अतः स्वास्थ्य के लिए यह योग थोड़ा सा प्रतिकूल रहेगा और अधिक कर्ज के लेनदेन से बचना पड़ेगा। यहां तक कि यदि आप किसी को कर्ज देना भी चाह रहे हों तो इस समय को टालें अन्यथा आपका दिया गया पैसा जल्दी वापस नहीं आएगा। मार्च के अंतिम सप्ताह से बृहस्पति का गोचर भी आपके लिए बेहतर हो जाएगा और विद्या भाव में तीन ग्रहों की युति शैक्षणिक एवं प्रतियोगिता के मामलों में कुछ चुनौतियां पेश कर सकती हैं अतः यदि आप विद्यार्थी हैं तो पढ़ाई के मामलों में लापरवाही न करें।
  • संवेदनशील बने, प्रेम संबंधी मामलों में निराशा हाथ लगेगी इसलिए अपने कार्य पर ध्यान देंगे तो बेहतर रहेगा। संतान संबंधी चिंता आपको तंग कर सकती है किंतु नव दंपत्ति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के योग बन रहे हैं। जुलाई से इन ग्रह स्थितियों में काफी सुधार आएगा और आपके सामने उपस्थित हुई विषम परिस्थितियां भी समाप्त होंगी। सूर्य का गोचर भी शादी विवाह से संबंधित मामलों में विलंब ला सकता है और दैनिक व्यापार में मंदी ला सकता है किंतु यह ज्यादा समय के लिए नहीं रहेगा परेशान ना हों।
  • दशम भाव में उच्च राशि गत राहु आपको मिलने वाली कठिन चुनौतियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करेगा आपकी प्रतिष्ठा को भी निखारेगा। राजनैतिक अथवा सामाजिक  मामलों के चुनाव से संबंधित निर्णय आपके पक्ष में होंगे अतः राजनीति में भी प्रवेश करने का यह बेहतरीन अवसर है। शासन सत्ता का पूर्ण उपयोग करते हुए अपने कार्य को संपन्न करें रोजगार की दिशा में किया गया रहा प्रयास अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा स्थान परिवर्तन न घबराएं।
तुला राशि- 
  • आपके राशि स्वामी शुक्र संवत्सर के आरंभ से ही केंद्र भाव में बैठे हुए हैं जिसके प्रभाव स्वरूप संवत्सर का आरंभ सुखद परिणाम दिलाने वाला सिद्ध होगा, विशेष करके यह समय व्यापारिक वर्ग के लिए उत्तम रहेगा। राशि से पराक्रम भाव में बृहस्पति का गोचर आपको साहसी तो बनाएगा किंतु अतिचारी होकर गुरु के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही आपको मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के अंतिम सप्ताह तक के मध्य पारिवारिक कलह एवं मानसिक अशांति का सामना करना पड़ेगा इन सबके बावजूद आपके लिए मकान वाहन के क्रय का योग बना हुआ है यदि कहीं की भी यात्रा कर रहे हैं तो अपने सामान की रखवाली स्वयं करें और घर में चोरी होने से सावधान रहें।
  • आपकी राशि के लिए राजयोग कारक ग्रह शनि भी अपने घर में चतुर्थ भाव में बैठे हुए हैं जिसके फलस्वरूप आपको माता पिता के स्वास्थ्य से कुछ चिंता तो होगी किंतु कार्य क्षेत्र में यह आपको सफल बनाएंगे। राजनीति अथवा राजनेताओं से गहरे संबंध रहेंगे इसलिए सरकार से जुड़े हुए कार्यों का निपटारा करने का सही समय है प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले छात्र यदि नौकरी हेतु आवेदन करें तो सफलता की संभावना सर्वाधिक रहेगी।
  • यात्रा देशाटन का पूर्ण आनंद मिलेगा इसी पर आपका अत्यधिक व्यय भी होगा यदि विदेशी नागरिकता के लिए वीजा आदि का आवेदन करना चाह रहे हो तो उस दृष्टि से वर्ष अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा। सितंबर माह से राहु और केतु का गोचर परिवर्तन कुछ कठिन चुनौतियां पेश कर सकता है अतः षड्यंत्र का शिकार होने एवं कोर्ट कचहरी के मामलों से बचना पड़ेगा।
वृश्चिक राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी मंगल उच्च राशि गत होकर पराक्रम भाव में बैठे हुए हैं जिसके प्रभावस्वरूप यह योग आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है इन्हीं के साथ स्वराशि गत शनि भी बैठे हुए हैं जो आपको अदम्य साहसी एवं पराक्रमी बनायेंगे। आप जो भी निर्णय लेंगे, जैसा निर्णय लेंगे वह सफल रहेगा किंतु अति उत्साह में ऐसा निर्णय न लें जिसके कारण आपको सामाजिक विरोध का सामना करना पड़े। भाइयों से मतभेद का सामना करना पड़ सकता है इसलिए इसे ग्रह योग समझकर तूल न दें।
  • धनभाव में बृहस्पति का बैठना आकस्मिक धन प्राप्ति के योग तो बनाएगा किंतु इनके मकर राशि में गोचर के समय यह प्रभाव क्षीण रहेगा। जून के अंतिम सप्ताह से पुनः वृहस्पति के धनु राशि में आ जाने के फलस्वरूप आर्थिक पक्ष और मजबूत हो जाएगा परिवार के बड़े बुजुर्गों से सहयोग मिलेगा। शुक्र का शत्रु भाव में जाना स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाएगा। गुप्त शत्रुओं से बचें। कार्यक्षेत्र में आपके खिलाफ षड्यंत्र होते रहेंगे इसके लिए सावधान रहें उच्चाधिकारियों से मधुर संबंध बनाकर रखें, राजनेताओं से भी गहरे संबंध बनेंगे।
  • समाज में पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी और आपके द्वारा लिए गए निर्णय एवं किए गए कार्यों की सराहना होगी। नौकरी में पदोन्नति के लिए प्रयास करें स्थान परिवर्तन का प्रयास भी कर सकते हैं। अक्टूबर से ग्रह गोचर में आने वाला परिवर्तन आपकी कामयाबियों में बढ़ोतरी करेगा किंतु, शादी विवाह से संबंधित वार्ता में विलंब हो सकता है ससुराल पक्ष से मतभेद न पैदा होने दें।
धनु राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके स्वामी बृहस्पति अपनी ही राशि में विराजमान है जो आपके लिए अत्यधिक शुभ फलदाई सिद्ध होते रहेंगे किंतु, मार्च के अंतिम सप्ताह से जून के अंतिम सप्ताह के मध्य यह अपनी नीच राशि 'मक'र राशि में चले जाएंगे जो आपके लिए कुछ अशुभ सिद्ध होंगे। जुलाई से पुनः यह अपनी राशि में आकर अति शुभ योगों का निर्माण करेंगे जिससे आपकी खोई प्रतिष्ठा वापस आएगी। झगड़े विवाद संबंधी मामलों का निपटारा होगा और आपका आर्थिक पक्ष मजबूत होगा।
  • इस समय इनकी दृष्टि आपके विद्या भाव पर पड़ेगी जिससे आपको शिक्षा प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। संतान संबंधी चिंता से मुक्ति मिलेगी और संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के योग बनेंगे प्रेम विवाह करना चाह रहे हों तो योग अति उत्तम रहेगा। यही दृष्टि आपके लिए भाग्यभाव पर पड़ेगी अतः धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे और विदेश यात्रा का योग बनेगा। विदेशी नागरिकता के लिए वीजा आदि का आवेदन करना चाहें तो शुभ परिणाम आपको अधिक खुशी दे सकते हैं। शादी विवाह से संबंधित वार्ता भी सफल रहेगी।
  • धनभाव में शनि देव का गोचर अनवरत चलता रहेगा इसलिए आकस्मिक धन प्राप्ति के योग के साथ-साथ किसी महंगी वस्तु के क्रय का भी योग बनेगा। मकान वाहन से संबंधित क्रय का निर्णय ले रहे हो तो विलंब ना करें सफलता की संभावना सर्वाधिक रहेगी। सितंबर से राहु और केतु का राशि परिवर्तन आपको शत्रुमर्दी बनाएगा फिर भी विवादों से बचें और कोर्ट कचहरी के मामले बाहर ही निपटा लें तो बेहतर रहेगा।
  • मकर राशि- 
  • आपकी राशि के स्वामी शनि स्वयं अपनी ही राशि मकर में विद्यमान हैं और अतिशुभ योगों का निर्माण कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप वर्ष आपके लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है अतः, अपने कार्य एवं नीले पूर्ण सावधानी के साथ करते हुए चलेंगे तो सफलता आपके कदम चूमेगी। इनके साथ उच्च राशिगत मंगल भी विद्यमान हैं यद्यपि शनि मंगल की युति बहुत अच्छी नहीं कही जा सकती किंतु कामयाबी की दृष्टि से यह ठीक तो है स्वास्थ्य की दृष्टि से कुछ अशुभ है अतः यात्रा सावधानीपूर्वक करें दुर्घटना से बचें और जोड़ों में दर्द की बीमारियों से बचते रहे।
  • कुछ दिनों के लिए अतिचारी होकर वृहस्पति भी इनके साथ आ रहे हैं जिससे स्वास्थ्य में थोड़ा सा सुधार तो होगा किंतु आप थकान का अनुभव करेंगे और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है इसे ग्रह योग समझकर भूलने की कोशिश करें। जुलाई से पुनः बृहस्पति आपके भाव में चले जाएंगे जिससे आपको किसी और देश की नागरिकता के लिए आवेदन करना सफलता दिला सकता है। धर्म-कर्म के मामलों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे परिवार में मांगलिक कार्यों का शुभ अवसर आएगा।
  • इस राशि के योग कारक ग्रह शुक्र भी केंद्र गत हैं अतः मकान वाहन के क्रय का योग बनेगा। काफी दिनों से रुका हुआ आपका धन वापस आएगा यात्रा सावधानीपूर्वक करें, सामान चोरी होने से बचाएं संतान संबंधी चिंता से पूर्ण मुक्ति मिलेगी। व्यापारिक वर्ग के लिए भी यह समय अत्यधिक लाभदायक सिद्ध होगा इसलिए अपने कार्य व्यापार के प्रति सजग रहें अधिक उधार देने से बचें। सितंबर से राहु केतु का राशि परिवर्तन भी आपको सहयोग करने लगेगा इसलिए संयम पूर्वक अपने कार्य में लगे रहें।

rashifal 2020
कुंभ राशि- 
  • संवत्सर के आरंभ से ही आपके राशि स्वामी शनि व्यय भाव में गए हैं यद्यपि वह अपनी ही राशि के हैं फिर भी आपको अत्यधिक संघर्ष के बाद ही आर्थिक लाभ पहुंचाएंगे भागदौड़ की अधिकता रहेगी जिसके परिणाम स्वरुप आपको आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ सकता है। कुछ दिनों बाद वृहस्पति के भी आ जाने से शनि मंगल वृहस्पति की युति आपकी और भी परीक्षा ले सकती है अतः वर्ष का आरंभ आपके अति संयम और सावधानी बरतने का है क्योंकि आपके बारहवें भाव में मंगल और दूसरे भाव में सूर्य के परिणाम स्वरूप आपकी राशि पर दबाव सर्वाधिक है इसलिए इस समय आप जिम्मेदारियों से जूझ रहे होंगे।
  • सबसे योगकारक ग्रह शुक्र का गोचर अपेक्षाकृत बेहतर रहेगा इसलिए साहस और पराक्रम वृद्धि होगी। यदि आप महिला हैं तो पुरुष और पुरुष हैं तो महिला आपके कार्यक्षेत्र में आपकी मदद करेंगे। जुलाई से वृहस्पति का शुभ गोचर आपको शिक्षा प्रतियोगिता में अच्छी सफलता दिलाएगा सोची समझी रणनीति भी कारगर रहेगी यदि आप प्रेम विवाह करना चाह रहे हों तो यह अवसर उपयुक्त रहेगा। नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति एवं प्रादुर्भाव के भी योग बन रहे हैं। गुरु की शुभ दृष्टि प्रभाव स्वरूप रुके हुए कार्य बनेंगे नए लोगों से मेलजोल बढ़ेगा विदेश यात्रा का भी संयोग है।
  • आरंभ में राहु एवं केतु का गोचर आपको मानसिक रूप से परेशान कर सकता है पारिवारिक कलह दे सकता है और स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव डाल सकता है इसलिए हर कार्य अथवा निर्णय बहुत सोच समझकर सावधानीपूर्वक लेना ही आपके लिए वर्ष पर्यंत श्रेयष्कर रहेगा। सितंबर माह से  कई ग्रहों के राशि परिवर्तन के प्रभाव स्वरूप विषम परिस्थितियों से कुछ हद तक मुक्ति मिलेगी किंतु तनाव की अधिकता एवं आर्थिक तंगी से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • मीन राशि- 
  • वर्ष आरंभ से ही आपके राशि स्वामी बृहस्पति स्वराशि होकर दशम कर्मभाव में बैठे हुए हैं जिसके प्रभाव स्वरूप आपके कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा जो कार्य करना चाहें जिस तरह से करना चाहें उसमें सफलता मिलेगी शासन सत्ता का पूर्ण सुख मिलेगा और उच्चाधिकारियों से संबंध बना रहेगा। इस अवधि के मध्य यदि सरकार से संबंधित कोई निर्णय अपने पक्ष में करवाना चाहें तो अवसर अच्छा रहेगा। कुछ दिनों बाद आपके लाभभाव में गुरु शनि और मंगल की युति एक साथ हो जाएगी जो आपके लिए लाभदायक तो रहेगी किंतु, स्वास्थ्य की दृष्टि से इस पर कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकता है इसलिए सावधान रहें।
  • अच्छी संगति करें नशाखोरी से दूर रहें। गुरु की दृष्टि इस अवधि के मध्य आपके संतान एवं पत्नी भाव पर पड़ रही है जिसके फलस्वरूप आप को संतान संबंधित चिंता से मुक्ति मिलेगी यदि किसी भी तरह की प्रतियोगिता में बैठना चाह रहे हों तो यह अवसर उपयुक्त रहेगा और सफलता की संभावना सर्वाधिक रहेगी। विवाह संबंधित वार्ता भी सफल रहेगी। ससुराल पक्ष से रिश्ते मजबूत बनेंगे नव दंपति के लिए संतान प्राप्ति के भी योग बन रहे हैं। यही योग कार्य व्यापार के लिए अति उत्तम सिद्ध होगा।
  • सितंबर से राहु केतु एवं बृहस्पति का राशि परिवर्तन भी आपके लिए वरदान सिद्ध होगा उस समय आपके अदम्य साहस एवं पराक्रम की वृद्धि होगी आपके द्वारा किए गए कार्य एवं लिए गए निर्णय की सराहना तो होगी किंतु अत्यधिक ऊर्जावान एवं उत्साही होने के फलस्वरूप आप अपनी जिद एवं आवेश पर नियंत्रण रखते हुए कार्य करेंगे तो वर्ष आपके लिए बेहतरीन सिद्ध होगा।

Thursday, 19 March 2020

'जनता कर्फ्यू' के बारे में वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं


   Hariprasad Joshi

कोरोना वायरस को लेकर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। उन्होंने साफ शब्दों में देश को इससे सतर्क रहने का संदेश दिया। संयम के साथ इस संकटपूर्ण स्थिति से मुकाबला करने का भी मंत्र दिया। खासतौर पर उन्होंने जनता कर्फ्यू का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनता को धैर्य के साथ इस स्थिति का मुकाबला करना होगा। 
  • मैं आज से जनता कर्फ्यू की मांग करता हूं। यानि जनता के लिए, जनता द्वारा लगाया गया कर्फ्यू। 22 मार्च रविवार को सुबह 7 से रात 9 बजे तक सभी देशवासियों को जनता कर्फ्यू का पालन करना है। जनता कर्फ्यू हमें आने वाली चुनौती से भी तैयार करेगी।  
  • हमें 22 मार्च को शाम 5 बजे ताली या थाली बजाकर, सायरन बजाकर सेवाभावियों का धन्यवाद करना चाहिए।
  • इस दिन कोई भी नागरिक घर से बाहर न निकले, न सड़क पर जाए, न मोहल्ले में जाए। लेकिन जो जरूरी काम में लगे हैं वो अपना कर्तव्य निभाएं। जनता कर्फ्यू आने वाली चुनौती से भी हमें तैयार करेगा। राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि वो जनता कर्फ्यू पालन कराएं।
  • 22 मार्च को शाम पांच बजे हम दरवाजे, बालकनी से हम काम करने वालों के लिए आभार प्रदर्शित करें। कैसे? ताली बजाकर, घंटी बजाकर। मैं स्थानीय प्रशासन से आग्रह करता हूं कि वे सायरन बजाकर सभी को इसके बारे में बताएं।
  • मैं एक और गुजारिश करना चाहता हूं। लाखों लोग अस्पताल, एयरपोर्ट, दफ्तरों में व्यस्त हैं। लोगों ने दूसरों की खातिर काम किया है। उन्होंने खतरे के बावजूद लगातार काम किया है। ये लोग वायरस और देश के बीच एक सुरक्षा की तरह हैं। पूरा देश इन्हें सैल्यूट करता है। 
  • ये जनता कर्फ्यू दुनिया को दिखाएगा कि हम इस वायरस से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं।
  • पीएम मोदी ने कहा कि एक व्यक्ति अन्य दस लोगों को जनता कर्फ्यू की जरूरत के बारे में बताए। 
  • एनसीसी, एनएसएस व धार्मिक संस्थाएं से निवेदन करता हूं कि वो जनता कर्फ्यू के बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बताएं। 
  • 22 मार्च का दिन हमारे लिए टेस्ट का दिन होगा कि हम वायरस से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं। 
  • पहले के दिनों में युद्ध के समय लोग घरों की लाइट बंद कर लेते थे। इसी तरह से रोम में भी किया गया ताकि जरूरत के समय इसे अपनाया जा सके। 
Copy from Amar ujyala.....

Wednesday, 18 March 2020

Coronavirus कौनसे ग्रह हैं इस महामारी के कारण

                                             coronavirus 👊👊👊


                                         Astrologer: Hariprasad Joshi

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि, राहु और केतु ये तीनों ग्रह अप्रत्याशित परिणामों के कारक गए हैं। शनि जब अपनी स्वराशि में आता है, अप्रत्याशित घटनाओं को पैदा करता है। वर्तमान में शनि अपनी स्वराशि मकर में स्थित है। इस साल 24 जनवरी को यह इस राशि में आया था। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि इस महामारी का कारक है। इसके अलावा चंद्रमा इस बीमारी को फैलाने में अपनी भूमिका निभा रहा है। क्योंकि समुद्र और समुद्र से संबंधित चीजों के लिए चंद्रमा उत्तरदायी है। साथ ही मंगल और केतु भी गुरु के साथ धनु राशि में बैठे हैं जो कि इस स्थिति को गंभीर बना रहे हैं। लेकिन 22 मार्च 2020 को जब मंगल शनि की राशि मकर में प्रवेश करेगा तो परिस्थितियां और भी गंभीर हो सकती हैं। 

इतिहास बताता है कि साल 1312 में जब शनि मकर राशि में आया था तब पूरा यूरोप प्लेग जैसी महामारी से ग्रसित हो गया था। इस महामारी ने 7.5 करोड़ लोगों को मौत की नींद सुला दी थी। 1666 में भी शनि का मकर राशि में होना पुनः दुनिया के लिए बड़ा खतरा बना। इस दौरान प्लेग के कारण केवल लंदन की 20 फीसदी आबादी खत्म हो गई थी। फिर उन्नीसवीं सदी में भी शनि के अपनी स्वराशि में परिवर्तन से करोड़ों लोगों की मौतें हुई थी।

गुरु का राशि परिवर्तन करेगा इस महामारी का खात्मा
देव गुरु बृहस्पति कोविड-19 इस महीने 30 मार्च को राशि परिवर्तन कर रहे हैं। ज्योतिष गणना के मुताबिक गुरु का राशि परिवर्तन इस महामारी का काल बन सकता है। बृहस्पति का मकर में प्रवेश शनि-मंगल के इस प्रकोप को खत्म करेगा। शनि-बृहस्पति की युति इस महामारी को कमजोर कर देगी। वहीं 4 मई 2020 को जब मंगल मकर से कुंभ राशि में जाएगा तब इस वायरस का प्रभाव बहुत ही कम हो जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, कोरोना वायरस का कहर मई 2020 में कम हो जाएगा। हालांकि तब तक सुरक्षा और सावधानी ही बचाव है। 

Monday, 17 September 2018

गीता के श्लोक एवं भावार्थ : गीता का प्रथम अध्याय

                               ज्योतिष: हरिप्रसाद जोशी


 
अथ ध्यानम्
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्यनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णु भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

 
भावार्थ : जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, ऐसे लक्ष्मीपति, कमलनेत्र भगवान श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।
 
यं ब्रह्मा वरुणेन्द्ररुद्रमरुत: स्तुन्वन्ति दिव्यै: स्तवै-
र्वेदै: साङ्गपदक्रमोपनिषदैर्गायन्ति यं सामगा:।
ध्यानावस्थिततद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो-
यस्तानं न विदु: सुरासुरगणा देवाय तस्मै नम:।।
 
भावार्थ : ब्रह्मा, वरुण, इन्द्र, रुद्र और मरुद्‍गण दिव्य स्तोत्रों द्वारा जिनकी स्तुति करते हैं, सामवेद के गाने वाले अंग, पद, क्रम और उपनिषदों के सहित वेदों द्वारा जिनका गान करते हैं, योगीजन ध्यान में स्थित तद्‍गत हुए मन से जिनका दर्शन करते हैं, देवता और असुर गण (कोई भी) जिनके अन्त को नहीं जानते, उन (परमपुरुष नारायण) देव के लिए मेरा नमस्कार है।

( दोनों सेनाओं के प्रधान-प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन )
धृतराष्ट्र उवाच
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥
भावार्थ :  धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥1॥
संजय उवाच
दृष्टवा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा ।
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्‌ ॥
भावार्थ :  संजय बोले- उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूहरचनायुक्त पाण्डवों की सेना को देखा और द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहा॥2॥
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्‌ ।
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
भावार्थ :  हे आचार्य! आपके बुद्धिमान्‌ शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिए॥3॥
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि ।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्‌ ।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङवः ॥
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्‌ ।
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ॥
भावार्थ :  इस सेना में बड़े-बड़े धनुषों वाले तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान शूरवीर सात्यकि और विराट तथा महारथी राजा द्रुपद, धृष्टकेतु और चेकितान तथा बलवान काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य, पराक्रमी युधामन्यु तथा बलवान उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र- ये सभी महारथी हैं॥4-6॥
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
नायका मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥
भावार्थ :  हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिए। आपकी जानकारी के लिए मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ॥7॥
भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥
भावार्थ :  आप-द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा॥8॥
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः ।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ॥
भावार्थ :  और भी मेरे लिए जीवन की आशा त्याग देने वाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित और सब-के-सब युद्ध में चतुर हैं॥9॥
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्‌ ।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्‌ ॥
भावार्थ :  भीष्म पितामह द्वारा रक्षित हमारी वह सेना सब प्रकार से अजेय है और भीम द्वारा रक्षित इन लोगों की यह सेना जीतने में सुगम है॥10॥
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥
भावार्थ :   इसलिए सब मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह स्थित रहते हुए आप लोग सभी निःसंदेह भीष्म पितामह की ही सब ओर से रक्षा करें॥11॥
 
( दोनों सेनाओं की शंख-ध्वनि का कथन )
 
तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शंख दध्मो प्रतापवान्‌ ॥
भावार्थ :  कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया॥12॥
ततः शंखाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः ।
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्‌ ॥
भावार्थ :  इसके पश्चात शंख और नगाड़े तथा ढोल, मृदंग और नरसिंघे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ॥13॥
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः ॥
भावार्थ :  इसके अनन्तर सफेद घोड़ों से युक्त उत्तम रथ में बैठे हुए श्रीकृष्ण महाराज और अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाए॥14॥
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः ।
पौण्ड्रं दध्मौ महाशंख भीमकर्मा वृकोदरः ॥
भावार्थ :   श्रीकृष्ण महाराज ने पाञ्चजन्य नामक, अर्जुन ने देवदत्त नामक और भयानक कर्मवाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया॥15॥
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥
भावार्थ :  कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय नामक और नकुल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाए॥16॥
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते ।
सौभद्रश्च महाबाहुः शंखान्दध्मुः पृथक्पृथक्‌ ॥
भावार्थ :  श्रेष्ठ धनुष वाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टद्युम्न तथा राजा विराट और अजेय सात्यकि, राजा द्रुपद एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु- इन सभी ने, हे राजन्‌! सब ओर से अलग-अलग शंख बजाए॥17-18॥
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्‌ ।
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्‌ ॥
भावार्थ :   और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुंजाते हुए धार्तराष्ट्रों के अर्थात आपके पक्षवालों के हृदय विदीर्ण कर दिए॥19॥
 
( अर्जुन द्वारा सेना-निरीक्षण का प्रसंग )
 
अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्‌ कपिध्वजः ।
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः ॥
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते ।
अर्जुन उवाचः
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥
भावार्थ :  हे राजन्‌! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने मोर्चा बाँधकर डटे हुए धृतराष्ट्र-संबंधियों को देखकर, उस शस्त्र चलने की तैयारी के समय धनुष उठाकर हृषीकेश श्रीकृष्ण महाराज से यह वचन कहा- हे अच्युत! मेरे रथ को दोनों सेनाओं के बीच में खड़ा कीजिए॥20-21॥
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्‌ ।
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे ॥
भावार्थ :  और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख न लूँ कि इस युद्ध रूप व्यापार में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है, तब तक उसे खड़ा रखिए॥22॥
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः ।
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः ॥
भावार्थ :  दुर्बुद्धि दुर्योधन का युद्ध में हित चाहने वाले जो-जो ये राजा लोग इस सेना में आए हैं, इन युद्ध करने वालों को मैं देखूँगा॥23॥
संजय उवाचः
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्‌ ॥
भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्‌ ।
उवाच पार्थ पश्यैतान्‌ समवेतान्‌ कुरूनिति ॥
भावार्थ :  संजय बोले- हे धृतराष्ट्र! अर्जुन द्वारा कहे अनुसार महाराज श्रीकृष्णचंद्र ने दोनों सेनाओं के बीच में भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने उत्तम रथ को खड़ा कर इस प्रकार कहा कि हे पार्थ! युद्ध के लिए जुटे हुए इन कौरवों को देख॥24-25॥
तत्रापश्यत्स्थितान्‌ पार्थः पितृनथ पितामहान्‌ ।
आचार्यान्मातुलान्भ्रातृन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा ॥
श्वशुरान्‌ सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि ।
भावार्थ :  इसके बाद पृथापुत्र अर्जुन ने उन दोनों ही सेनाओं में स्थित ताऊ-चाचों को, दादों-परदादों को, गुरुओं को, मामाओं को, भाइयों को, पुत्रों को, पौत्रों को तथा मित्रों को, ससुरों को और सुहृदों को भी देखा॥26 और 27वें का पूर्वार्ध॥
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्‌ बन्धूनवस्थितान्‌ ॥
कृपया परयाविष्टो विषीदत्रिदमब्रवीत्‌ ।
भावार्थ :  उन उपस्थित सम्पूर्ण बंधुओं को देखकर वे कुंतीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणा से युक्त होकर शोक करते हुए यह वचन बोले। ॥27वें का उत्तरार्ध और 28वें का पूर्वार्ध॥
 
 
(मोह से व्याप्त हुए अर्जुन के कायरता, स्नेह और शोकयुक्त वचन )
 
अर्जुन उवाच 
दृष्टेवमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्‌ ॥
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ।
वेपथुश्च शरीरे में रोमहर्षश्च जायते ॥
भावार्थ :  अर्जुन बोले- हे कृष्ण! युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इस स्वजनसमुदाय को देखकर मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कम्प एवं रोमांच हो रहा है॥28वें का उत्तरार्ध और 29॥
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्वक्चैव परिदह्यते ।
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः ॥
भावार्थ :  हाथ से गांडीव धनुष गिर रहा है और त्वचा भी बहुत जल रही है तथा मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है, इसलिए मैं खड़ा रहने को भी समर्थ नहीं हूँ॥30॥
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव ।
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे ॥
भावार्थ :  हे केशव! मैं लक्षणों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर कल्याण भी नहीं देखता॥31॥
न काङ्‍क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च ।
किं नो राज्येन गोविंद किं भोगैर्जीवितेन वा ॥
भावार्थ :  हे कृष्ण! मैं न तो विजय चाहता हूँ और न राज्य तथा सुखों को ही। हे गोविंद! हमें ऐसे राज्य से क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है?॥32॥
येषामर्थे काङक्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च ।
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च ॥
भावार्थ :  हमें जिनके लिए राज्य, भोग और सुखादि अभीष्ट हैं, वे ही ये सब धन और जीवन की आशा को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं॥33॥
आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः ।
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः संबंधिनस्तथा ॥
भावार्थ :  गुरुजन, ताऊ-चाचे, लड़के और उसी प्रकार दादे, मामे, ससुर, पौत्र, साले तथा और भी संबंधी लोग हैं ॥34॥
एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥
भावार्थ :  हे मधुसूदन! मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिए भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता, फिर पृथ्वी के लिए तो कहना ही क्या है?॥35॥
निहत्य धार्तराष्ट्रान्न का प्रीतिः स्याज्जनार्दन ।
पापमेवाश्रयेदस्मान्‌ हत्वैतानाततायिनः ॥
भावार्थ :  हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा॥36॥
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्‌ ।
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ॥
भावार्थ :  अतएव हे माधव! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के लिए हम योग्य नहीं हैं क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?॥37॥
यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः ।
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम्‌ ॥
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्‌ ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥
भावार्थ :  यद्यपि लोभ से भ्रष्टचित्त हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते, तो भी हे जनार्दन! कुल के नाश से उत्पन्न दोष को जानने वाले हम लोगों को इस पाप से हटने के लिए क्यों नहीं विचार करना चाहिए?॥38-39॥
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः ।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥
भावार्थ :  कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं तथा धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है॥40॥
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः ।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः ॥
भावार्थ :  हे कृष्ण! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है॥41॥
संकरो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च ।
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥
भावार्थ :  वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिए ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जल की क्रिया वाले अर्थात श्राद्ध और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं॥42॥
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसंकरकारकैः ।
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥
भावार्थ :  इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं॥43॥
उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन ।
नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥
भावार्थ :  हे जनार्दन! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चितकाल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आए हैं॥44॥
अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्‌ ।
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः ॥
भावार्थ :  हा! शोक! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान पाप करने को तैयार हो गए हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिए उद्यत हो गए हैं॥45॥
यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्‌ ॥
 
भावार्थ :   यदि मुझ शस्त्ररहित एवं सामना न करने वाले को शस्त्र हाथ में लिए हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिए अधिक कल्याणकारक होगा॥46॥
 
संजय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः सङ्‍ख्ये रथोपस्थ उपाविशत्‌ ।
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः ॥
 
भावार्थ :  संजय बोले- रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाले अर्जुन इस प्रकार कहकर, बाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पिछले भाग में बैठ गए॥47॥
ॐ तत्सदिति श्रीमद्भगवद्गीतासूपनिषत्सु ब्रह्मविद्यायां योगशास्त्रे श्रीकृष्णार्जुनसंवादेऽर्जुनविषादयोगो नाम प्रथमोऽध्यायः। ॥1॥

ज्ञान विज्ञान और धर्म

🌅 शास्त्र अनुसार छठ पूजा की शुरुआत, महत्त्व और कहाँ-कहाँ मनाई जाती है

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