लटैनाथ मल्लिकार्जुन

Friday, 26 June 2020

इस बार २०२० में पांच माह का होगा चातुर्मास, आपको क्या करना चाहिए और क्या ना करना जानिए और देखें ज्योतिष श्री हरिप्रसाद जोशी


 ज्योतिषाचार्य श्री हरिप्रसाद जोशी 

२०२० का चातुर्मास एक जुलाई से शुरू होने वाला है। इस बार चातुर्मास चार महीने का  नहीं बल्कि पांच माह का होगा। 19 साल पहले 2001 में आश्विन माह का अधिकमास आया था। अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और आश्विन के अधिकमास का योग 160 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1860 में ऐसा अधिकमास आया था, जब उसी साल लीप ईयर भी था। एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर अधिकमास नहीं होता तो हमारे त्योहारों की व्यवस्था बिगड़ जाती है। अधिकमास की वजह से ही सभी त्योहारों अपने सही समय पर मनाए जाते हैं।

ज्योतिषाचार्य श्री हरिप्रसाद जोशी 

चातुर्मास में तप और ध्यान करने का विशेष महत्व होता है चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार श्री भगवान विष्णु क्षीर सागर में आराम कर रहे होते हैं।

चार्तुमास में संत एक ही स्थान पर रुककर तप और ध्यान करते हैं। चातुर्मास में यात्रा करने से यह बचते हैं, क्योंकि ये वर्षा ऋतु का समय रहता है, इस दौरान नदी-नाले उफान पर होते है तथा कई छोटे-छोटे कीट उत्पन्न होते हैं। इस समय में विहार करने से इन छोटे-छोटे कीटों को नुकसान होने की संभावना रहती है। इसी वजह से जैन धर्म में चातुर्मास में संत एक जगह रुककर तप करते हैं। चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद विष्णुजी फिर से सृष्टि का भार संभाल लेते हैं।



ज्योतिषाचार्य एवं आयुर्वेदाचार्य श्री हरी प्रसाद जोशी 

ज्योतिषाचार्य एवं आयुर्वेदाचार्य श्री हरी प्रसाद जोशी के अनुसार चातुर्मास की शुुरुआत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है। इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को होता है।  चार माह में नामकरण संस्कार, यज्ञोपवित संस्कार,   विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं, देवउठनी एकादशी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत दोबारा फिर से हो जाती है।

सृष्टि के पालनहार श्री भगवान विष्णु

चातुर्मास में क्या काम हैं वर्जित

ज्योतिषाचार्य  श्री हरी प्रसाद जोशी के मुताबिक चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भदौ में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है। चातुर्मास में पान मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होते हैं।
यह केवल ज्योतिषी शास्त्र मैं नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है।
ज्योतिषाचार्य श्री हरी प्रसाद जोशी ने बताया कि चातुर्मास का धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इन दिनों बारिश होने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इस कारण बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। उनकी वजह से संक्रामक रोग सहित अन्य बीमारियां होने लगती हैं। इससे बचने के लिए इस दौरान खानपान में सावधानी रखने के साथ संतुलित जीवन शैली अपनानी चाहिए।

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