लटैनाथ मल्लिकार्जुन

Monday, 1 September 2025



🌸 माँ–बाप का समान व्यवहार ही रिश्तों की नींव है 🌸


सत्ययुग से लेकर कलियुग तक एक सीख हमेशा रही है –

👉 जब माता–पिता अपने सभी बच्चों के साथ समान व्यवहार करते हैं,

तो घर में प्रेम और विश्वास का दीपक हमेशा जलता रहता है।


सत्ययुग का उदाहरण –

राजा हरिश्चंद्र ने अपने बेटे रोहिताश्व के लिए भी धर्म नहीं छोड़ा, न्याय और सत्य सबके लिए एक समान रखा।


त्रेतायुग का उदाहरण –

भगवान राम के पिता दशरथ ने चारों पुत्रों को समान शिक्षा व संस्कार दिए। राम–भरत–लक्ष्मण–शत्रुघ्न का बंधन आज भी आदर्श है।


द्वापरयुग का उदाहरण –

पांडव–कौरव की कहानी यह दिखाती है कि जब समान व्यवहार नहीं होता, तो परिवार में फूट और विनाश पनपता है।


कलियुग का सन्देश –

आज भी अगर माता–पिता अपने बच्चों में भेदभाव करेंगे,

तो दिलों में दूरियाँ आ जाएँगी और रिश्ते टूट जाएंगे।

लेकिन अगर समान प्रेम और न्याय देंगे,

तो परिवार हमेशा अटूट और सुखी रहेगा।


🕊️

माता–पिता का समान व्यवहार और बच्चों का सम्मान – यही है अटूट रिश्तों का सबसे बड़ा आधार।


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