लटैनाथ मल्लिकार्जुन

Sunday, 17 August 2025

🌸 गौरा पर्व : कुमाऊं और नेपाल के सुदूर पश्चिम की अद्भुत सांस्कृतिक धरोहर


                              



✨ प्रस्तावना


उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल और नेपाल के सुदूर पश्चिमी हिस्से में भाद्रपद अष्टमी के दिन एक विशेष पर्व मनाया जाता है – गौरा पर्व। यह पर्व देवी गौरा (पार्वती) और भगवान शंकर के पावन मिलन का प्रतीक है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।



🌺 ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि


गौरा पर्व का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार, भाद्रपद अष्टमी को पार्वतीजी अपने मायके से पति शिव के घर गईं, और तभी से इस पर्व की परंपरा चली।


इसे विवाह पर्व भी कहा जाता है।


महिलाएँ इस दिन गौरा (पार्वती) और महेश (शंकर) की पूजा कर अपने दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।



🌸 पर्व की विशेषताएँ


1. गौराछ – महिलाएँ खेतों से विभिन्न अनाज के पौधे (धान, जौ, गेंहू आदि) लाकर गौरा प्रतिमा बनाती हैं।



2. पूजा एवं व्रत – भाद्रपद अष्टमी से पूजा शुरू होती है और कई दिनों तक चलती है।



3. ढूंढिया नृत्य – महिलाएँ समूह में पारंपरिक गीत गाकर ढोल-दमाऊं की थाप पर नृत्य करती हैं।



4. सामाजिक मेल-जोल – यह पर्व गाँव-गाँव में भाईचारे, प्रेम और सहयोग की भावना को प्रकट करता है।


🌿 कुमाऊं और नेपाल में परंपराएँ


कुमाऊं : यहाँ इसे बड़े उत्साह से मनाया जाता है। विशेषकर अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और पिथौरागढ़ में।


नेपाल का सुदूर पश्चिम : इसे वहाँ गौरा महोत्सव के रूप में जाना जाता है। लोग जुलूस निकालते हैं, पारंपरिक गानों के साथ देवी-देवताओं की झाँकी सजाई जाती है।


💠 सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व


नारी सशक्तिकरण : यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं का होता है, जो पूरे आयोजन की अगुवाई करती हैं।


कृषि संस्कृति का प्रतीक : धान, जौ और गेंहू जैसी फसलों के पौधों से पूजा करना प्रकृति और खेती से गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।


लोक कला का संरक्षण : लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से पुरानी संस्कृति जीवित रहती है।


🌻 निष्कर्ष


गौरा पर्व सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह गांव की सामूहिकता, महिला नेतृत्व और सांस्कृतिक पहचान का पर्व है। कुमाऊं और नेपाल का यह पर्व हिमालयी क्षेत्र की लोक-परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है।

कुमाऊँ का गौरा पर्व : भाद्रपद अष्टमी की परंपरा




उत्तराखंड का कुमाऊँ क्षेत्र नेपाल का सूदूर पश्चिम क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ भाद्रपद मास की अष्टमी को बड़े हर्षोल्लास के साथ गौरा पर्व मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से महिलाओं का त्यौहार माना जाता है, लेकिन इसमें पूरे गाँव की भागीदारी होती है।


इतिहास और धार्मिक आधार




गौरा पर्व का संबंध पार्वती (गौरा) और शिव से माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गौरा माता अपने मायके से ससुराल (शिव के पास कैलाश) जाती हैं। इसलिए विवाहित महिलाएँ इस पर्व को विशेष रूप से मनाती हैं और अपने वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करती हैं।


पर्व की शुरुआत


भाद्रपद अष्टमी से पहले गाँव की महिलाएँ समूह बनाकर खेतों से धान और मक्का की बालियाँ लाती हैं। इन्हें गले की माला, सजावट और पूजा में उपयोग किया जाता है। मिट्टी की प्रतिमा या किसी स्थान पर प्रतीक रूप में गौरा और शिव की स्थापना की जाती है।


पूजा और अनुष्ठान


महिलाएँ दिनभर व्रत रखती हैं।


गौरा माता की पूजा कर सौभाग्य और परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं।


लोकगीत और झोड़ा-चांचरी गाए जाते हैं।


जगह-जगह मेले जैसे आयोजन होते हैं।



सामाजिक महत्व


गौरा पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का उत्सव भी है। गाँव की महिलाएँ और पुरुष नाच-गान के माध्यम से अपनी एकता और परंपरा को जीवित रखते हैं। यह पर्व खेती-बाड़ी के मौसम और फसल की समृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।


आज के दौर में


हालाँकि समय के साथ आधुनिकता का असर इस पर्व पर भी पड़ा है, फिर भी कुमाऊँ, नेपाल का सूदूर क्षेत्र में गौरा पर्व आज भी सांस्कृतिक पहचान और लोकआस्था का महत्वपूर्ण प्रतीक बना हुआ है।

Thursday, 14 August 2025

🌸 “तिरंगे की जीत” – एक छोटी कहानी 🌸



बहुत समय पहले की बात है, हमारे प्यारे भारत में लोग अपनी मर्जी से नहीं रह पाते थे।
हमारे देश पर अंग्रेज़ों का राज था। वो हमारे खेतों से अनाज लेते, हमारे बनाये कपड़े बेचते और हमारे अपने कानून भी हमसे नहीं बनाने देते थे।

लोगों को ये बिलकुल अच्छा नहीं लगा। तब कुछ बहादुर लोग उठ खड़े हुए—

रानी लक्ष्मीबाई ने घोड़े पर बैठकर तलवार चलाई,

मंगल पांडे ने विद्रोह किया,

और बाद में महात्मा गांधी आए, जिन्होंने कहा, "लड़ाई बिना हिंसा के भी जीती जा सकती है!"


गांधीजी ने नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन चलाया, तो लोगों ने अंग्रेज़ी सामान छोड़कर स्वदेशी अपनाया।
उधर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे वीरों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

धीरे-धीरे देश का हर बच्चा, बूढ़ा और जवान एक ही नारा लगाने लगा —
"वंदे मातरम्!"
"भारत माता की जय!"


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🌟 15 अगस्त 1947 – जादुई रात 🌟

आधी रात को घड़ी ने 12 बजाए, और पंडित नेहरू जी ने कहा —
"आज हम आज़ाद हैं!"
सुबह लाल किले पर तिरंगा लहराया, और आसमान में जैसे खुशियों के रंग बिखर गए।

गांव-गांव, शहर-शहर लोग नाचने लगे, मिठाइयाँ बाँटी गईं और हर कोई एक-दूसरे से कह रहा था —
"हम आज़ाद हो गए!" 🎉


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📚 सीख

अगर हम सब मिलकर, साहस और एकता से काम करें, तो कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती।
तिरंगे की तरह हमें भी हमेशा ऊँचा उड़ना चाहिए। 🇮🇳


युगों का बदलता स्वरूप



सत्ययुग – धर्म का प्रकाश पूर्ण था। देव और दानव अलग-अलग लोकों में रहते थे, अच्छाई और बुराई की सीमाएँ स्पष्ट थीं।


त्रेतायुग – देव और दानव एक ही धरती पर रहने लगे, लेकिन फिर भी धर्म और अधर्म की रेखा साफ थी। श्रीराम और रावण का युद्ध इसका उदाहरण है।


द्वापरयुग – अच्छाई और बुराई का अंतर और घटा, अब वे एक ही कुल, एक ही परिवार में दिखने लगे। श्रीकृष्ण और कंस का संबंध, बाणासुर और श्रीकृष्ण का युद्ध, तथा बाणासुर की पुत्री ऊषा और श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध का विवाह इसका प्रमाण हैं।


कलियुग – अब तो स्थिति यह है कि देवत्व और दानवत्व एक ही मनुष्य के भीतर बसते हैं। सुबह भगवान का नाम, तिलक और भजन; और दिनभर ईर्ष्या, छल, पाप, लालच, अपमान और असत्य।

सीख –

युग चाहे कोई भी हो, संघर्ष हमेशा धर्म और अधर्म का ही है। फर्क बस इतना है कि पहले शत्रु बाहर था, अब वह हमारे भीतर है।

कलियुग में विजय पाने के लिए हमें अपने भीतर के रावण, कंस और दुर्योधन को हराना होगा।



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Wednesday, 1 July 2020

२ जूलाई २०२० का राशिफल


 मेष का आज का राशिफल 

काम का बोझ आज कुछ तनाव और खीज की वजह बन सकता है। रात के समय आप आज आपको धन लाभ होने की पूरी संभावना है क्योंकि आपके द्वारा दिया गया धन आज आपको वापस मिल सकता है। किसी दूर के रिश्तेदार के यहाँ से मिली आकस्मिक अच्छी ख़बर आपके पूरे परिवार के लिए ख़ुशी के लम्हे लाएगी। आपके महंगे तोहफ़े भी आपके प्रिय के चेहरे पर मुस्कान लाने में नाकाम साबित होंगे, क्योंकि वह उनसे क़तई प्रभावित नहीं होगा/ होगी। आपका जीवनसाथी सहयोगी और मददगार रहेगा। जरुरी कामों को समय न देना और फिजूल के कामों पर वक्त जाया करना आज आपके लिए घातक सिद्ध हो सकता है। आपके जीवनसाथी की कामकाज को लेकर व्यस्तता आपकी उदासी का कारण बन सकती  

वृष का आजका  राशिफल 

आपकी उम्मीद एक महक से भरे हुए ख़ूबसूरत फूल की तरह खिलेगी। अगर आपको लगता है कि आपके पास पर्याप्त धन नहीं है तो आज घर के किसी बड़े से धन संचित करने की सलाह लें। दोस्तों के साथ शाम को घूमने बाहर जाएँ, इससे आपको बहुत फ़ायदा होगा। आपकी आँखें इतनी चमकीली हैं कि वे आपके प्रिय की अंधेरी रात को भी रोशन कर सकती हैं। तब तक कोई वादा न करें, जब तक कि आप पूरी तरह उसे पूरा करने में सक्षम न हों। महत्वपूर्ण लोगों के साथ बातचीत करते वक़्त अपने शब्दों को ग़ौर से चुनें। यह दिन आपके जीवनसाथी के रूमानी पहलू को भरपूर तरीक़े से दिखाएगा।

 मिथुन का आज का राशिफल 

आपकी उम्मीद एक महक से भरे हुए ख़ूबसूरत फूल की तरह खिलेगी। निश्चित तौर पर वित्तीय स्थिति में सुधार आएगा- लेकिन साथ ही ख़र्चों में भी इज़ाफ़ा होगी। पारिवारिक उत्तरदायित्व में वृद्धि होगी, जो आपको मानसिक तनाव दे सकती है। एक लम्बा दौर जो काफ़ी समय से आपको दबोचे हुए था, ख़त्म हो चुका है- क्योंकि जल्दी ही आपको आपका जीवन-साथी मिलने वाला है। कार्यक्षेत्र में हालात आपके पक्ष में रुख़ करते मालूम होंगे। अपनी कमियों पर आपको काम करने की जरुरत है इसके लिए आपको अपने लिए समय निकालना चाहिए। अगर आप वैवाहिक तौर पर लंबे समय से कुछ नाख़ुश हैं, तो आज के दिन आप हालात बेहतर होते हुए महसूस कर सकते हैं।

 कर्क का आज का राशिफल 

रक्तचाप के मरीज़ों को ख़ास ख़याल रखने और दवा-दारू करने की ज़रूरत है। साथ ही उन्हें कॉलेस्ट्रोल को क़ाबू में रखने की कोशिश भी करनी चाहिए। ऐसा करना आगे काफ़ी लाभदायक सिद्ध होगा। पैसे की अहमियत को आप अच्छे से जानते हैं इसलिए आज के दिन आपके द्वारा बचाया गया धन आपके बहुत काम आ सकता है और आप किसी बड़ी मुश्किल से निकल सकते हैं। आपका मज़ाकिया स्वभाव सामाजिक मेल-जोल की जगहों पर आपकी लोकप्रियता में इज़ाफ़ा करेगा। आप और आपका महबूब आज प्यार के समुन्दर में गोते लगाएंगे और प्यार की मदहोशी को महसूस करेंगे। कार्यक्षेत्र में आपको कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अपनी ख़ासियत और भविष्य की योजनाओं पर फिर से सोचने का समय। शादीशुदा ज़िन्दगी के मोर्चे पर हालात वाक़ई थोड़े मुश्किल रहे हैं, लेकिन अब आप सुधरते हालात महसूस कर सकते हैं।

 सिंह का आज का राशिफल 

कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का दबाव और घर में अनबन के चलते आपको तनाव का सामना करना पड़ सकता है- जो काम में आपकी एकाग्रता को भंग करेगा। आज आपके माता-पिता में से कोई आपको धन की बचत करने को लेकर लेक्चर दे सकता है, आपको उनकी बातोें को बहुत गौर से सुनने की जरुरत है नहीं तो आने वाले समय में परेशानी आपको ही उठानी पड़ेगी। अगर आप हर किसी की मांग पूरी करने की कोशिश करेंगे, तो सिर्फ़ नाकामी आपके हाथ लगेगी। हर बात पर प्यार का दिखावा करना ठीक नहीं है इससे आपका रिश्ता सुधरने की जगह बिगड़ सकता है। इस राशि के कारोबारियों को आज कारोबार के सिलसिले में अनचाही यात्रा करनी पड़ सकती है। यह यात्रा आपको मानसिक तनाव दे सकती है। नौकरी पेशा लोगों को आज ऑफिस में इधर-उधर की बातें करने से बचना चाहिए। यात्रा और शिक्षा से जुड़े काम आपकी जागरुकता में वृद्धि करेंगे। आप महसूस कर सकते हैं कि जीवनसाथी का प्यार सारे दुःख-दर्द भुला देता है।

 कन्या का आज का राशिफल 

किसी भी तरह के द्वन्द्व या विरोध से बचें, क्योंकि आपकी सेहत पर इसका बुरा असर होगा। आज किया गया निवेश आपकी समृद्धि और आर्थिक सुरक्षा में इज़ाफ़ा करेगा। विवाद, मतभेद और दूसरों की आपमें कमियाँ निकालने की आदत को नज़रअन्दाज़ करें। प्यार में थोड़ी निराशा आपको हतोत्साहित नहीं कर सकेगी। दफ़्तर में आप तारीफ़ पाएंगे। आज खाली वक्त का सही उपयोग करने के लिए आप अपने पुराने मित्रों से मिलने का प्लान बना सकते हैं। जीवनसाथी के ख़राब स्वास्थ्य की वजह से आपका कामकाज प्रभावित हो सकता है।

 तुला का आज का राशिफल 

अपना मूड बदलने के लिए सामाजिक मेलजोल का सहारा लें। दिन की शुुरुआत भले ही अच्छी हो लेकिन शाम के वक्त किसी वजह से आपका धन खर्च हो सकता है जिससे आप परेशान होंगे। शाम का ज़्यादातर समय मेहमानों के साथ गुज़रेगा। सोशल मीडिआ पर अपने प्रिय के पिछले 2-3 संदेश देखिए, आपको एक ख़ूबसूरत ताज्जुब का एहसास होगा। नए विचार फ़ायदेमंद साबित होंगे। खेलकूद जीवन का जरुरी हिस्सा है लेकिन खेलकूद में इतने भी व्यस्त न हो जाएं कि आपकी पढ़ाई में कमी आ जाए। इस बात की प्रबल सम्भावना है कि आपके आस-पास के लोग आप दोनों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास करेंगे। अत: बाहरी लोंगों के कहने पर अमल करना ठीक नहीं होगा। 

 वृश्चिक का आज का राशिफल 

खेलों और आउटडोर गतिविधियों में भागीदारी आपकी खोयी ऊर्जा को फिर से इकट्ठा करने में आपकी मदद करेगी। अगर आप अपनी रचनात्मक प्रतिभा को सही तरीक़े से इस्तेमाल करें तो वह काफ़ी फ़ायदेमंद साबित होगी। घर में उल्लास का माहौल आपके तनावों को कम कर देगा। आप भी इसमें पूरी सहभागिता करें और महज़ मूक दर्शक न बने रहें। आपकी प्रेम कहानी आज एक नया मोड़ ले सकती है, आपका साथी आज आपसे शादी को लेकर बात कर सकता है। ऐसे में कोई भी फैसला लेने से पहले आपको विचार अवश्य करना चाहिए। आपके पास आज अपनी क्षमताओं को दिखाने के मौक़े होंगे। आज आपको रिश्तों की अहमियत का अंदाज हो सकता है क्योंकि आज के दिन का ज्यादातर समय आप अपने परिवार के लोगों के साथ बिताएंगे। आज आप अपने जीवनसाथी से काफ़ी आत्मीय बातचीत कर सकते हैं।

 धनु का आज का राशिफल 

दोस्त से मिली ख़ास तारीफ़ ख़ुशी का ज़रिया बनेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि आपने अपनी ज़िंदगी को पेड़ की तरह बना लिया है, जो ख़ुद तपती धूप में खड़ा होकर और उसे सहकर भी राहगीरों को छांव देता है। बिना किसी अनुभवी शख्स की सलाह के आज ऐसा कोई भी काम न करें जिससे आपको आर्थिक हानि हो। पिता का तल्ख़ बर्ताव आपको नाराज़ कर सकता है। लेकिन हालात को नियंत्रण में रखने के लिए शांत रहें। इससे आपको फ़ायदा होगा। आज आपका प्रेमी अपने मनोभावों को आपके सामने खुलकर नहीं रख पाएगा जिसकी वजह से आपको खिन्नता होगी। अगर आप कई दिनों से कामकाज में दिक़्क़त महसूस कर रहे हैं, तो आज के दिन आपको राहत महसूस हो सकती है। चंंद्रमा की स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि आज आपके पास काफी खाली वक्त होगा लेकिन बावजूद इसके भी आप वो काम नहीं कर पाएंगे जो आपको करना था। आपका जीवनसाथी आपसे नाराज़ हो सकता है, क्योंकि आप उनसे कोई बात साझा करना भूल गए थे।

 मकर का आज का राशिफल 

आपको अपना अतिरिक्त समय अपने शौक़ पूरे करने या उन कामों को करने में लगाना चाहिए, जिन्हें करने में आपको सबसे ज़्यादा मज़ा आता है। बिना किसी की सलाह लिये बिना आज आपको पैसा कहीं भी इनवेस्ट नहीं करना चाहिए। आपकी ज्ञान की प्यास आपको नए दोस्त बनाने में मददगार साबित होगी। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। रचनात्मक काम में लगे लोगों के लिए सफलता से भरा दिन है, उन्हें वह शौहरत और पहचान मिलेगी जिसकी उन्हें एक अरसे से तलाश थी। इस राशि के जातक खाली वक्त में आज किसी समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर सकते हैं। जीवन साथी से पूर्णरूपेण सहयोग न मिलने के कारण आप निराश हो सकते हैं। 

 कुंभ का आज का राशिफल 

आज के मनोरंजन में बाहर की गतिविधियों और खेल-कूद को शामिल किया जाना चाहिए। धन का आगमन आज आपको कई आर्थिक परेशानियों से दूर कर सकता है। आज आपका ऊर्जा से भरपूर, ज़िंदादिल और गर्मजोशी से भरा व्यवहार आपके आस-पास के लोगों को ख़ुश कर देगा। आज आपकी कोई बुरी आदत आपके प्रेमी को बुरी लग सकती है और वो आपसे नाराज हो सकते हैं। सेमिनार और गोष्ठियों में हिस्सा लेकर आज आप कई नए विचार पा सकते हैं। अपने समय की कीमत समझें, उन लोगों के बीच रहना जिनकी बातें आपके समझ में नहीं आती हैं गलत है। ऐसा करना भविष्य में आपको परेशानियों के अलावा कुछ नहीं देगा। यह दिन आपके जीवनसाथी का बेहतरीन पहलू आपको दिखाने वाला है।

 मीन  का राशिफल 

क़िस्मत के भरोसे न बैठें और अपनी सेहत सुधारने के लिए ख़ुद मेहनत करें, क्योंकि हाथ पर हाथ रखे रहने से कुछ नहीं होने वाला। अब वक़्त आ गया है कि आप अपना वज़न क़ाबू में करें और स्वस्थ रहने के लिए नियमित व्यायाम का सहारा लें। करीबी रिश्तेदारों के घर जाना आज आपकी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ सकता है। पारिवारिक समारोह में नए दोस्त बन सकते हैं। हालाँकि अपने चयन में सावधानी बरतें। अच्छे दोस्त उस ख़ज़ाने की तरह होते हैं, जिसे सारी ज़िंदगी दिल के क़रीब रखा जाता है। प्रेमी को आज आपकी कोई बात चुभ सकती है। वो आपसे रुठें इससे ही पहले ही अपनी गलती का अहसास कर लें और उन्हें मना लें। व्यावसायिक साझीदार सहयोग करेंगे और आप साथ मिलकर टलते आ रहे कामों को पूरा कर सकते हैं। जो भी आपसे मिले, उसके साथ विनम्र और सुखद व्यवहार करें। बहुत कम लोग ही आपके इस आकर्षण का राज़ जान पाएंगे। जीवनसाथी के साथ हँसते-खिलखिलाते, हर पल के मज़े लेते हुए आप महसूस करेंगे कि आप किशोरावस्था में लौट गए हैं।

नोट:। आप सभी लोगों से निवेदन है आपको राशिफल पढ़कर, आज का दिन कैसा गया लगभग मिलता-जुलता है या ना, जो भी उत्तर है हमें दीजिए, क्योंकि आगे से हम डेली राशिफल लेकर आपके बीच में आने वाले हैं इसीलिए आप लोगों से निवेदन है कृपया फीडबैक जरूर दें। 


Friday, 26 June 2020

इस बार २०२० में पांच माह का होगा चातुर्मास, आपको क्या करना चाहिए और क्या ना करना जानिए और देखें ज्योतिष श्री हरिप्रसाद जोशी


 ज्योतिषाचार्य श्री हरिप्रसाद जोशी 

२०२० का चातुर्मास एक जुलाई से शुरू होने वाला है। इस बार चातुर्मास चार महीने का  नहीं बल्कि पांच माह का होगा। 19 साल पहले 2001 में आश्विन माह का अधिकमास आया था। अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और आश्विन के अधिकमास का योग 160 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1860 में ऐसा अधिकमास आया था, जब उसी साल लीप ईयर भी था। एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर अधिकमास नहीं होता तो हमारे त्योहारों की व्यवस्था बिगड़ जाती है। अधिकमास की वजह से ही सभी त्योहारों अपने सही समय पर मनाए जाते हैं।

ज्योतिषाचार्य श्री हरिप्रसाद जोशी 

चातुर्मास में तप और ध्यान करने का विशेष महत्व होता है चातुर्मास में सृष्टि के पालनहार श्री भगवान विष्णु क्षीर सागर में आराम कर रहे होते हैं।

चार्तुमास में संत एक ही स्थान पर रुककर तप और ध्यान करते हैं। चातुर्मास में यात्रा करने से यह बचते हैं, क्योंकि ये वर्षा ऋतु का समय रहता है, इस दौरान नदी-नाले उफान पर होते है तथा कई छोटे-छोटे कीट उत्पन्न होते हैं। इस समय में विहार करने से इन छोटे-छोटे कीटों को नुकसान होने की संभावना रहती है। इसी वजह से जैन धर्म में चातुर्मास में संत एक जगह रुककर तप करते हैं। चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद विष्णुजी फिर से सृष्टि का भार संभाल लेते हैं।



ज्योतिषाचार्य एवं आयुर्वेदाचार्य श्री हरी प्रसाद जोशी 

ज्योतिषाचार्य एवं आयुर्वेदाचार्य श्री हरी प्रसाद जोशी के अनुसार चातुर्मास की शुुरुआत आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से होती है। इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी को होता है।  चार माह में नामकरण संस्कार, यज्ञोपवित संस्कार,   विवाह संस्कार, गृह प्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने गए हैं, देवउठनी एकादशी के साथ शुभ कार्यों की शुरुआत दोबारा फिर से हो जाती है।

सृष्टि के पालनहार श्री भगवान विष्णु

चातुर्मास में क्या काम हैं वर्जित

ज्योतिषाचार्य  श्री हरी प्रसाद जोशी के मुताबिक चातुर्मास के पहले महीने सावन में हरी सब्जी, भदौ में दही, आश्विन में दूध और कार्तिक में दाल नहीं खानी चाहिए। साथ ही इस दौरान स्वेच्छा से नियमित उपयोग के पदार्थों का त्याग करने का भी विधान है। चातुर्मास में पान मसाला, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन भी वर्जित होते हैं।
यह केवल ज्योतिषी शास्त्र मैं नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है।
ज्योतिषाचार्य श्री हरी प्रसाद जोशी ने बताया कि चातुर्मास का धार्मिक ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है। वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो इन दिनों बारिश होने से हवा में नमी बढ़ जाती है। इस कारण बैक्टीरिया और कीड़े-मकोड़े ज्यादा हो जाते हैं। उनकी वजह से संक्रामक रोग सहित अन्य बीमारियां होने लगती हैं। इससे बचने के लिए इस दौरान खानपान में सावधानी रखने के साथ संतुलित जीवन शैली अपनानी चाहिए।

Friday, 17 April 2020

हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म, सिख धर्म, नेपाल और भारत में इतिहास



  ज्योतिष हरिप्रसाद जोशी
 

हिंदू धर्म
 नेपाल और भारत की ज्यादातर आबादी  हिंदू धर्म का पालन करता है जो इन देशो का सबसे प्राचीन धर्म है। सन् 2011 की नेपाल की जनगणना में, लगभग 81.3 प्रतिशत नेपाली हिंदू धर्म का पालन करते हैं।  वहीं भारत में सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 80 प्रतिशत भारतीय हिंदू धर्म का पालन करते हैं। इस धर्म को मानने वाले इसे सनातन धर्म भी कहते हैं। नेपाल में   "ने" नाम के एक हिंदू ऋषि ने प्रागैतिहासिक काल के दौरान खुद को काठमांडू की घाटी में स्थापित किया, और उन्होंने बागमती और बिष्णुमती नदियों के संगम, टेकू में धार्मिक अनुष्ठान किया। और  भारत में इस नाम को महात्मा गांधी ने लोकप्रिय बनाया। हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामायण और भगवद गीता हैं। हिंदू लोग वेदों और उनपिषदों के सिद्धांतों का अभ्यास करते हैं। उनके पूजा स्थल को मंदिर या देवस्थान कहा जाता है। ये लोग मूर्तियों की पूजा करते हैं जिसे भगवान का प्रतिबिंब माना जाता है। लेकिन वह हिंदू जो आर्य समाज के हैं, वो मूर्ति पूजा नहीं करते हैं। हिंदू धर्म में प्रतीकों की एक व्यवस्था है जैसे स्वास्तिक का चिन्ह शुभ का प्रतीक है और ओम परम ब्रम्ह का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कई हिंदू त्यौहार हैं, जैसे दीपावली, होली, बिहू, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और अन्य जो देश में मनाए जाते हैं। 

इस्लाम 
नेपाल में  मुसलमानों की आबादी करीब 4.4 प्रतिशत था। भारत में सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की 13 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है और इसका पालन करने वालों को मुसलमान कहा जाता है। यह उप वर्गों में बंटा है जिनमें सबसे प्रसिद्ध शिया और सुन्नी हैं। मुस्लिमों की पवित्र पुस्तक कुरान है और ये पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं का पालन करते हैं। इस्लाम में मक्का में की जाने वाली सालाना तीर्थयात्रा हज है जो शारीरिक और आर्थिक रुप से सक्षम हर मुस्लिम को जीवन में एक बार करनी होती है। भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख इस्लामी त्यौहारों में ईद-उल-फितर, ईद-उल-जुहा और मुहर्रम हैं। 

सिख धर्म

गुरु नानक ने 15 वीं सदी में पंजाब क्षेत्र में सिख धर्म की स्थापना की थी। सिखों की पवित्र किताब गुरु ग्रंथ साहिब है जो गुरु के लेखन का संग्रह है। नेपाल वैसे तो एक हिंदू बहुल देश है, मगर वहाँ दूसरे कई धर्मों के लोग भी रहते हैं. इनमें सिख भी शामिल हैं. मगर उनकी आबादी लगातार घट रही है , 2011 में 0.2% सिख थे,
 सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी का 2 प्रतिशत हिस्सा सिर्ख धर्म के लोगों का है। सिख धर्म में कोई विशेष त्यौहार नहीं होते हैं लेकिन कुछ आमतौर पर मनाए जाते हैं, जैसे गुरुओं का जन्मदिन या शहादत दिवस। गुरुपूरब, बैसाखी, नगर कीर्तन, होला मौहल्ला आदि कुछ त्यौहार हैं जो सिख लोग मनाते हैं। सिखों के धार्मिक विश्वासों में उपवास या तीर्थ करना शामिल नहीं है। भारत में ज्यादातर सिख पंजाब में रहते हैं और इनके समुदाय बड़ी संख्या में पड़ोसी राज्यों में रहते हैं।

बौद्ध धर्म
 नेपाल  में बौद्ध धर्म की स्थापना सिद्धार्थ गौतम ने की थी जिन्हें ‘बुद्ध’ भी कहा जाता है। 
2012 की नेपाल में हुई जनगणना के अनुसार बौद्धों की जनसंख्या 10.7 से घटकर 9 प्रतिशत रह गया था। और भारत में बौद्ध लोग भारत की आबादी का सिर्फ 1 प्रतिशत हैं। ये लोग संसार, कर्म और पुनर्जन्म मेें विश्वास रखते हैं और बुद्ध की शिक्षा का पालन करते हैं। बौद्ध भक्ति प्रथाओं में तीर्थयात्रा, झुकना और जप करना और प्रसाद शामिल हैं। बुद्ध का जन्मदिन जिसे वेसक भी कहते हैं, असालह पूजा दिवस, मघा पूजा दिवस और लाॅय रोथोंग बौद्ध धर्म के कुछ त्यौहार हैैं।

ईसाई धर्म
ईसाइयों की तादाद 1.5 फीसदी थी। हालांकि ईसाईसमूहों का कहना है कि इस समय देश में ईसाई धर्म को माननेवालों की आबादी 3 लाख पहुंच चुकी है। 1990 में बहुदलीय लोकतंत्र की शुरुआत के बाद, और धर्मांतरण पर प्रतिबंधों की छूट के बाद, नेपाली चर्च तेजी से विकसित होने लगा। ईसाई धर्म का विस्तार नेपाल में एक विवादास्पद विषय है, और नेपाली ईसाई छिटपुट हिंसा और व्यापक सामाजिक बहिष्कार के अधीन रहे हैं। नेपाली मीडिया और राजनीतिक प्रवचन में अक्सर यह दावा किया जाता है कि मिशनरियों को बदलने के लिए घटिया सामग्री प्रोत्साहन की पेशकश की जाती है, लेकिन शोध से संकेत मिलता है कि अधिकांश नेपाली ईसाई मिशनरियों के संपर्क के अलावा अन्य कारणों से धर्मांतरण करते हैं। भारत में ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार भारत में ईसाई धर्म लगभग 2000 साल पहले आया। सन् 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या का 2.3 प्रतिशत ईसाई धर्म से है। ईसाई आबादी पूरे देश में पाई जाती है, लेकिन ज्यादातर दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और कोंकण तट के इलाकों में रहती है। ईसाई लोग ईसा मसीह में विश्वास रखते हैं और उन्हीं की पूजा करते हैं। उन्हें वे मानवता का रक्षक और परमेश्वर का पुत्र मानते हैं। ईसाइसों का मुख्य त्यौहार क्रिसमस है। गुड फ्राइडे, आॅल साॅल्स डे और ईस्टर कुछ ऐसे त्यौहार हैं, जो इस धर्म के लोग भारत में मनाते हैं। 

हम यह सब देखकर समझ नहीं पा रहे हैं क्या हो रहा है? इसमें हंसना चाहिए और रोना कुछ समझ में नहीं आ रहे,, इतिहास है और क्या।।


ज्ञान विज्ञान और धर्म

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पौराणिक ज्ञान