लटैनाथ मल्लिकार्जुन

Thursday, 14 August 2025

🌸 “तिरंगे की जीत” – एक छोटी कहानी 🌸



बहुत समय पहले की बात है, हमारे प्यारे भारत में लोग अपनी मर्जी से नहीं रह पाते थे।
हमारे देश पर अंग्रेज़ों का राज था। वो हमारे खेतों से अनाज लेते, हमारे बनाये कपड़े बेचते और हमारे अपने कानून भी हमसे नहीं बनाने देते थे।

लोगों को ये बिलकुल अच्छा नहीं लगा। तब कुछ बहादुर लोग उठ खड़े हुए—

रानी लक्ष्मीबाई ने घोड़े पर बैठकर तलवार चलाई,

मंगल पांडे ने विद्रोह किया,

और बाद में महात्मा गांधी आए, जिन्होंने कहा, "लड़ाई बिना हिंसा के भी जीती जा सकती है!"


गांधीजी ने नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन चलाया, तो लोगों ने अंग्रेज़ी सामान छोड़कर स्वदेशी अपनाया।
उधर, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आज़ाद जैसे वीरों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

धीरे-धीरे देश का हर बच्चा, बूढ़ा और जवान एक ही नारा लगाने लगा —
"वंदे मातरम्!"
"भारत माता की जय!"


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🌟 15 अगस्त 1947 – जादुई रात 🌟

आधी रात को घड़ी ने 12 बजाए, और पंडित नेहरू जी ने कहा —
"आज हम आज़ाद हैं!"
सुबह लाल किले पर तिरंगा लहराया, और आसमान में जैसे खुशियों के रंग बिखर गए।

गांव-गांव, शहर-शहर लोग नाचने लगे, मिठाइयाँ बाँटी गईं और हर कोई एक-दूसरे से कह रहा था —
"हम आज़ाद हो गए!" 🎉


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📚 सीख

अगर हम सब मिलकर, साहस और एकता से काम करें, तो कोई भी ताकत हमें रोक नहीं सकती।
तिरंगे की तरह हमें भी हमेशा ऊँचा उड़ना चाहिए। 🇮🇳


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